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रविदास जयंती - संत रविदास ने अपने वचनो से कैसे किया भेद-भाव का अंत
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रविदास जयंती – 9 फरवरी 2020

दिन – रविवार

“मन चंगा तो कठौती मे गंगा” अर्थात यदि मन साफ हो और उसमे किसी प्रकार का मैल या हींन भावना नही हो तो कठौत के पानी से स्नान करना भी गंगा मे स्नान कर सिद्धि पाने के समान है। ऐसे नेक वचन बोलने वाले शिरोमणि गुरु,संत कवि रविदास जी के जन्म दिन को माघ मास की पुर्णिमा के दिन हर साल पूरे भारतवर्ष मे बड़े ही धूमधाम और उत्साह से मनाया जाता है। इस बार माघ मास की पुर्णिमा अर्थात 9 फरवरी को संत कवि रविदास जी के 643वें जन्मोत्सव का आयोजन किया जाएगा। ऐसा माना जाता है की संत रविदास जी का जन्म पंद्रहवी शताब्दी मे (सऩ् 1377 ई० या 1434 विक्रम संवत) के आस-पास वाराणसी मे हुआ था। इनकी माता का नाम श्रीमती कालसा देवी तथा पिता का नाम श्री संतोक दास जी था। बचपन से ही संतो-महात्माओ की ओर इनका अत्यधिक रुझान था जिस कारण इनके पिता इनसे चिढ़ा करते थे। संत रविदास जी के जन्म को लेकर एक दोहा प्रचलित है।

“चौदह सौतैंतीस को  माघ सुदी  पंद्रास

दुखियों के कल्याण हित प्रगटे श्री रविदास।।“

रविदास कैसे बने संत

बचपन से हि रविदास जी मे साधू –संतो और धार्मिक कार्यो की ओर अत्यधिक रुझान था। ये अपने पिता के साथ वाराणसी मे जूता बनाने का कार्य करते थे। कोई भी साधु संत जो भी इनके दुकान के सामने से गुजरे उसे मुफ्त मे चप्पले और जूते दे दिया करते थे। इनका ये स्वभाव इनके पिता को जरा भी पसंद नही आता था। यहीं दयालु और उपकार की भावना इनके अंदर धीरे-धीरे एकत्रित होती गयी और ये निर्गुण ब्रह्म की उपासना मे भक्ति के पद गाने लगे। मुख्य रूप से “रविदास के पद”, “नारद भक्ति सूत्र”और “रविदास की बानी”उनके प्रमुख संग्रहों में से हैं। अपने गीतो और छंदो से ये समाज मे व्याप्त बुराइयों जैसे छुआ-छूट, अश्पृश्यता, भेद-भाव ,उंच-नीच को जड़ से समाप्त करने का प्रयास करने लगे। उनके ये सभी प्रयास रंग लाये और लोगो पर उनका असर होना शुरू हुआ। लोग इनके अनुयाई बनना शुरू हो गए जिससे इन्हे संत की उपाधि प्राप्त हुई।

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विशेष रूप से कहाँ मनाई जाती है रविदास जयंती

वैसे तो ज्ञान और समानता के साधक संत रविदास जी कि जयंती पूरे भारतवर्ष मे मनाई जाती है परंतु उनके जन्मस्थल वाराणसी मे आज के दिन को लोग उत्सव की भांति मनाते है। आज के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है जिससे गुरु के दिव्य ज्ञान कि प्राप्ति होती है। आज के दिन वाराणसी के सिर गोवर्धन मंदिर मे भव्य आयोजन किया जाता है। जिसमे बड़ी संख्या मे लोग उपस्थित होकर गुरु की भक्ति के पद गाते है और ईश्वर की भक्ति मे सराबोर हो जाते है।

ईश्वर समान इस दिव्य पुरुष संत कवि रविदास जी की जयंती पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के रविदास गेट के प्रांगण मे भी भव्य आयोजन किया जाता है जिसमे सभी छात्र-छात्राएँ और संत के अनुयाई बड़ी संख्या मे उपस्थित होते है।

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Published on: 12-05-2021




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Gurudev GD Vashist

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Gurudev GD Vashist is also the author of Lal Kitab Amrit Vashist Jyotish. He is prominent in the India electronic media, like, leading TV channels like India News, Divya TV, Sadhna TV, Disha TV.
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