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बिना सच्चाई के निर्णय बन सकते है, आपके पूरे जीवन भर का पछतावा
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बिना सच्चाई के निर्णय बन सकते है, आपके पूरे जीवन भर का पछतावा

भारतीय प्राचीन कथा के अनुसार पुराने समय में किसी नगर मे एक राजा था,  उस राजा का एक प्रिय सेवक था। सेवक हर पल राजा की देखभाल में लगे रहता था। राजा भी सेवक के सुख का ध्यान रखता था। एक दिन सेवक ने राजा से कहा कि उसे कुछ दिनों की छुट्टी चाहिए, वह अपने माता-पिता से मिलने के लिए गांव जाना चाहता है। राजा ने उसे बहुत सारा धन और अनाज दिया और छुट्टी भी दे दी। सेवक धन और अनाज लेकर अपने बूढ़े माता-पिता के घर पहुंच गया। कुछ दिन माता-पिता की सेवा की, घर में जरूरत की सभी चीजें लाकर रख दीं और फिर राजा के महल पहुंचने के लिए घर से निकल गया। रास्ता में उसे एक अमर फल का पेड़ का दिखाई दिया। 

यह पेड़ एक ऊंचे पर्वत पर था। सेवक ने सोचा कि ये फल राजा को दे दूंगा तो राजा हमेशा जवान रहेंगे जिससे प्रजा का भला हमेशा होता रहेगा। ये सोचकर वह पर्वत पर चढ़ा और बहुत मुश्किल से एक फल तोड़ लिया। पर्वत पर चढ़ने की वजह से बहुत थक गया था,  और रात भी हो गई थी। सेवक ने सोचा कि रात में यहीं आराम कर लेता हूं, सुबह उठकर राजा की सेवा में हाजिर हो जाऊंगा। जब रात में वह सेवक सो रहा था, तब वहां एक सांप आया और उसने अमर फल पर अपना जहर डाल दिया और वह वहां से चला गया। सेवक नींद में था,  उसे मालूम ही नहीं हुआ कि वहां कोई सांप आया था। सुबह सेवक की नींद खुली और उसने सोचा कि अब राजमहल चलना चाहिए। उसने वह फल उठाया और राजा को ले जाकर दे दिया। राजा ने फल को कटवाया और कुछ टुकड़े एक कुत्ते को खाने को दिए। जैसे ही कुत्ते ने फल खाया, वह तड़प-तड़पकर मर गया। 

इस नज़ारे को देखर राजा को गुस्सा आ गया और उसने तुरंत ही अपनी तलवार निकालकर सेवक की गर्दन धड़ से अलग कर दी। बाकी बचे हुए फल के टुकड़े राजा में बाग में फेंक दिए। कुछ दिनों बाद फल के बीज से वहां एक पेड़ उग गया। जब पेड़ बड़ा हुआ तो उसमें फल लगना शुरू हो गए। राजा ने सभी से ये कह दिया था कि कोई भी इस पेड़ के फल न खाए, क्योंकि ये फल जहरीले हैं। एक दिन उस पेड़ के नीचे एक वृद्ध आराम कर रहा था। उसने अनजाने में उस पेड़ का एक फल खा लिया। फल खाते ही वह जवान हो गया। जब ये बात राजा को मालूम हुई तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने बिना पूरी बात जाने, एक निर्दोष को मौत की सजा दे दी थी।

इसलिए जब तक हमें पूरी बात न मालूम हो जाए, तब तक किसी को भी दोषी नहीं मानना चाहिए। राजा ने क्रोध में आकर बिना पूरी बात जाने, निर्दोष सेवक को मौत की सजा दे दी थी। बाद में उसके पास पछताने के अलावा कोई और रास्ता नहीं था। जीवन मेँ अगर यह जानना है की क्या सत्य है और क्या झूठ तो सबसे पहले इसको परखना सीखों इसके बाद उसके निर्णय तक पहुचो अन्यथा आप भी इस दुविधा का शिकार हो सकते है l 

 

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Gurudev GD Vashist

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Gurudev GD Vashist is also the author of Lal Kitab Amrit Vashist Jyotish. He is prominent in the India electronic media, like, leading TV channels like India News, Divya TV, Sadhna TV, Disha TV.
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