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शरद पूर्णिमा पर जानें चन्द्रमा के अमृत बरसाने का रहस्य?
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भारतीय ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन चाँद अपनी सोहल कलाओं से युक्त होता है। इस वर्ष शुभ योग में चन्द्रमा और मंगल का द्रष्टि संबंध होने के कारण बहुत ही बड़ा दुर्लभ महालक्ष्मी योग निर्मित होने जा रहा है, जोकि धन वृद्धि और समृद्धि का कारक होता है। हिन्दू धर्म के हिसाब से यह तिथि बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। प्राचीन पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचाया था और एक गोपी के कृष्ण बने थे अर्थात् हर गोपी का अपना एक कृष्ण था। शरद पूर्णिमा के दिन भगवान श्री कृण्ण जी ने कामदेव का भी अभिमान चकनाचूर कर दिया था। शरद पूर्णिमा हर लिहाज से हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण और अच्छे फलों को प्रदान करने वाली है।

हमारे सनातन धर्म में शरद पूर्णिमा को लेकर बहुत सारी मान्यताएं प्रचलित है। शरद पूर्णिमा के व्रत करने से सारी मनोकामनाओं की पूर्ती होती है। इसे कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. यह पूर्णिमा अन्‍य पूर्णिमा की तुलना में काफी लोकप्रिय है। मान्‍यता है कि यही वो दिन है जब चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्‍त होकर धरती पर अमृत की वर्षा करता है। हिन्दू पंचाग के अऩुसार अश्विन मास के शुक्‍ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार शरद पूर्णिमा 13 अक्‍टूबर दिन रविवार को मनाई जायेगी। शरद पूर्णिमा हर प्रकार से हमारे लिए बहुत ही लाभकारी होती है, क्योंकि इस दिन चन्द्रमा प्रथ्वी के सबसे करीब होता है, और उससे चाँद की रोशनी में होनी वाली हल्की-हल्की ओस की वर्षा अमृत के समान होती है जो हमारे शरीर और स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा वाली रात को घर की छत पर खीर बनाकर रखने से रात्रि में होने वाली चन्द्रमा की अमृत वर्षा रखी खीर में होती है, जिसे खाने से हमारा शरीर एक वर्ष के लिए पूर्णतः निरोगी हो जाता है। शरद पूर्णिमा पर बनाई जाने वाली खीर मात्र एक व्यंजन नहीं होती है। ग्रंथों के अनुसार ये एक दिव्य औषधि होती है। इस खीर को गाय के दूध और गंगाजल के साथ ही अन्य पूर्ण सात्विक चीजों के साथ बनाना चाहिए। अगर संभव हो तो ये खीर चांदी के बर्तन में बनाएं। इसे गाय के दूध में चावल डालकर ही बनाएं। ग्रंथों में चावल को हविष्य अन्न यानी देवताओं का भोजन बताया गया है। महालक्ष्मी भी चावल से प्रसन्न होती हैं। इसके साथ ही केसर, गाय का घी और अन्य तरह के सूखे मेवों का उपयोग भी इस खीर में करना चाहिए। संभव हो तो इसे चंद्रमा की रोशनी में ही बनाना चाहिए।

हिन्दु पूजा पद्धति के अनुसार सूर्यास्त के बाद देवी लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। पूजा में दक्षिणावर्ती शंख से महालक्ष्मी और विष्णुजी का अभिषेक करें। शंख में केसर मिश्रित दूध डालकर भगवान को स्नान कराना चाहिए। कमल के गट्टे की माला से जाप करना चाहिए। पूर्णिमा की शाम को शिवलिंग के पास दीपक जलाएं और ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें। शरद पूर्णिमा का चांद और साफ आसमान मॉनसून के पूरी तरह चले जाने का प्रतीक है। कहते हैं ये दिन इतना शुभ और सकारात्मक होता है कि छोटे से उपाय से बड़ी-बड़ी विपत्तियां  टल जाती हैं। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इसी दिन मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था। इसलिए धन प्राप्ति के लिए भी ये तिथि सबसे उत्तम मानी जाती है। कहा जाता है कि जो विवाहित स्त्रियां इस दिन व्रत रखती हैं उन्‍हें संतान की प्राप्‍ति होती है. जो माताएं इस व्रत को करती हैं उनके बच्‍चे दीर्घायु होते हैं। अगर कुंवारी लड़कियां ये व्रत रखें तो उन्‍हें मनचाहा पति मिलता है।

शुभ मुहूर्त 

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ:       13 अक्‍टूबर 2019 की रात 12 बजकर 36 मिनट से

पूर्णिमा तिथि समाप्‍त:      14 अक्‍टूबर की रात 02 बजकर 38 मिनट तक

चंद्रोदय का समय:         13 अक्‍टूबर 2019 की शाम 05 बजकर 26 मिनट

 

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Gurudev GD Vashist

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Gurudev GD Vashist is also the author of Lal Kitab Amrit Vashist Jyotish. He is prominent in the India electronic media, like, leading TV channels like India News, Divya TV, Sadhna TV, Disha TV.
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