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महाशिवरात्रि पर बन रहे अनुपम संयोग पर करें, भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना
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महाशिवरात्रि पर बन रहे अनुपम संयोग पर करें, भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना

भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के पर्व महाशिवरात्रि का अद्भतु संयोग इस शिवरात्रि  पर बना रहा है l पिछले चार वर्षो के बाद इस बार महाशिवरात्रि सोमवार के दिन ही पड़ रही है जो की भगवान शिव का सबसे प्रिय दिवस है l यह महा संयोग आने वाले 12 वर्षो तक नहीं बनेगा l सोमवार के दिन महाशिवरात्रि को बहुत ही शुभ और कल्याणकारी माना गया है l भारतीय पंचांग के अनुसार यह महापर्व इस वर्ष फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी यानि की 4 मार्च 2019 को मनाया जाएगा l महाशिवरात्रि को लेकर हमारे शास्त्रों और समाज मे दो प्रकार की मान्यताएं प्रचलित है l एक तो ये है की इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह सम्पन्न हुआ था दूसरा है की इस दिन सृष्टि का प्रारम्भ हुआ था l शास्त्रों के अनुसार जो श्रद्धालु महाशिवरात्रि की सच्चे मन से पूजा-अर्चना व शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं। भोलेनाथ उन्हें मनोवांछित फल प्रदान करते हैं।  ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिसका चंद्रमा, शुक्र व राहु खराब हो उनके लिए महाशिवरात्रि में शिव पूजा विशेष फलदायी होती है। वहीं, जिन बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता है अथवा विवाह में दिक्कतें आती हैं तो ऐसे में शिव पूजा बहुत ही फलदायी मानी जाती है।
इस दिन प्रात: स्नान करने के बाद भस्म का तिलक कर रुद्राक्ष की माला धारण कर व्रती को भगवान भोले नाथ का ध्यान करना चाहिए l इसके ईशान कोण दिशा की ओर मुख कर शिव का पूजन धूप, पुष्पादि और अन्य पूजन सामग्री से पूजन करना चाहिए l अगर शिव मंदिर में यह जाप करना संभव न हों, तो घर की पूर्व दिशा में, किसी शान्त स्थान पर जाकर ॐ नमः शिवाय के  मंत्र का जाप करना चाहिए l इस मंत्र जाप से विशेष पुन्य प्राप्त होता है l उपावस के दौरान रुद्राभिषेक करने से भगवान शंकर अत्यन्त प्रसन्न होते है l महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त 4 मार्च  2019, सोमवार को 16:28 बजे से 5 मार्च 2019, मंगलवार 19:07 बजे तक रहेगा l देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने वाला आस्था से परिपूर्ण महाशिवरात्रि का व्रत सबसे महत्वपूर्ण होता है। जो शख्स भगवान शिव में आस्था रखते हैं वह भोले के महाशिवरात्रि व्रत को जरूर करते हैं। हिंदू धर्म में, महाशिवरात्रि व्रत, पूजा, कथा और उपायों का खास महत्व होता है।
महाशिवरात्रि का समुद्र मंथन और चंद्रमा से भी गहरा नाता है इसमे एक तथ्य यह भी है की समुद्र मंथन अमर अमृत का उत्पादन करने के लिए निश्चित थी, लेकिन इसके साथ ही कालकूट नामक विष भी पैदा हुआ था। कालकूट विष में ब्रह्मांड को नष्ट करने की क्षमता थी और इसलिए केवल शिव ही  इसे समाप्त कर सकते थे। भगवान शिव ने कालकूट नामक विष को अपने कंठ में रख लिया था। जहर इतना शक्तिशाली था कि भगवान शिव बहुत दर्द से पीड़ित थे और उनका गला बहुत नीला हो गया था। इस कारण से भगवान शिव का नाम नीलकंठ पड़ा । सभी देवताओं ने भगवान शिव को रात भर जागते रहने की सलाह दी। इस प्रकार, भगवान शिव के चिंतन में एक सतर्कता रखी। शिव का आनंद लेने और जागने के लिए, देवताओं ने अलग-अलग नृत्य और संगीत बजाने लगे। जैसे सुबह हुई, उनकी भक्ति से प्रसन्न भगवान शिव ने उन सभी को आशीर्वाद दिया। इसी प्रथा के कारण पूरी रात्री जागरण का प्रावधान भी है l

 

यह भी पढ़ें - जानिए क्या है प्राचीन ज्योतिष का इतिहास ?

महाशिवरात्रि पर बन रहे अनुपम संयोग पर करें, भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना

भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के पर्व महाशिवरात्रि का अद्भतु संयोग इस शिवरात्रि  पर बना रहा है l पिछले चार वर्षो के बाद इस बार महाशिवरात्रि सोमवार के दिन ही पड़ रही है जो की भगवान शिव का सबसे प्रिय दिवस है l यह महा संयोग आने वाले 12 वर्षो तक नहीं बनेगा l सोमवार के दिन महाशिवरात्रि को बहुत ही शुभ और कल्याणकारी माना गया है l भारतीय पंचांग के अनुसार यह महापर्व इस वर्ष फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी यानि की 4 मार्च 2019 को मनाया जाएगा l महाशिवरात्रि को लेकर हमारे शास्त्रों और समाज मे दो प्रकार की मान्यताएं प्रचलित है l एक तो ये है की इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह सम्पन्न हुआ था दूसरा है की इस दिन सृष्टि का प्रारम्भ हुआ था l शास्त्रों के अनुसार जो श्रद्धालु महाशिवरात्रि की सच्चे मन से पूजा-अर्चना व शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं। भोलेनाथ उन्हें मनोवांछित फल प्रदान करते हैं।  ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिसका चंद्रमा, शुक्र व राहु खराब हो उनके लिए महाशिवरात्रि में शिव पूजा विशेष फलदायी होती है। वहीं, जिन बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता है अथवा विवाह में दिक्कतें आती हैं तो ऐसे में शिव पूजा बहुत ही फलदायी मानी जाती है।
इस दिन प्रात: स्नान करने के बाद भस्म का तिलक कर रुद्राक्ष की माला धारण कर व्रती को भगवान भोले नाथ का ध्यान करना चाहिए l इसके ईशान कोण दिशा की ओर मुख कर शिव का पूजन धूप, पुष्पादि और अन्य पूजन सामग्री से पूजन करना चाहिए l अगर शिव मंदिर में यह जाप करना संभव न हों, तो घर की पूर्व दिशा में, किसी शान्त स्थान पर जाकर ॐ नमः शिवाय के  मंत्र का जाप करना चाहिए l इस मंत्र जाप से विशेष पुन्य प्राप्त होता है l उपावस के दौरान रुद्राभिषेक करने से भगवान शंकर अत्यन्त प्रसन्न होते है l महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त 4 मार्च  2019, सोमवार को 16:28 बजे से 5 मार्च 2019, मंगलवार 19:07 बजे तक रहेगा l देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने वाला आस्था से परिपूर्ण महाशिवरात्रि का व्रत सबसे महत्वपूर्ण होता है। जो शख्स भगवान शिव में आस्था रखते हैं वह भोले के महाशिवरात्रि व्रत को जरूर करते हैं। हिंदू धर्म में, महाशिवरात्रि व्रत, पूजा, कथा और उपायों का खास महत्व होता है।
महाशिवरात्रि का समुद्र मंथन और चंद्रमा से भी गहरा नाता है इसमे एक तथ्य यह भी है की समुद्र मंथन अमर अमृत का उत्पादन करने के लिए निश्चित थी, लेकिन इसके साथ ही कालकूट नामक विष भी पैदा हुआ था। कालकूट विष में ब्रह्मांड को नष्ट करने की क्षमता थी और इसलिए केवल शिव ही  इसे समाप्त कर सकते थे। भगवान शिव ने कालकूट नामक विष को अपने कंठ में रख लिया था। जहर इतना शक्तिशाली था कि भगवान शिव बहुत दर्द से पीड़ित थे और उनका गला बहुत नीला हो गया था। इस कारण से भगवान शिव का नाम नीलकंठ पड़ा । सभी देवताओं ने भगवान शिव को रात भर जागते रहने की सलाह दी। इस प्रकार, भगवान शिव के चिंतन में एक सतर्कता रखी। शिव का आनंद लेने और जागने के लिए, देवताओं ने अलग-अलग नृत्य और संगीत बजाने लगे। जैसे सुबह हुई, उनकी भक्ति से प्रसन्न भगवान शिव ने उन सभी को आशीर्वाद दिया। इसी प्रथा के कारण पूरी रात्री जागरण का प्रावधान भी है l

 

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Gurudev GD Vashist

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Gurudev GD Vashist is also the author of Lal Kitab Amrit Vashist Jyotish. He is prominent in the India electronic media, like, leading TV channels like India News, Divya TV, Sadhna TV, Disha TV.
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