Home / जानिए क्या है प्राचीन ज्योतिष का इतिहास ?
जानिए क्या है प्राचीन ज्योतिष का इतिहास ?
Divider

जानिए क्या है प्राचीन ज्योतिष का इतिहास ?

ज्योतिष विज्ञान को सरल शब्दों में कहा जाये तो यह बहुत बड़ा विज्ञान है जो नक्षत्रो, आकाश पिण्डों  और सितारों के माध्यम से मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में विभिन्न गणनाओ और विभिन्न समीकरणों द्वारा पहले ही हर हालत को जान लेने की विधि है।  अंग्रेजी में एस्ट्रोलॉजी (Astrology) शब्द से ज्योतिष विज्ञान को समझे तो Astro का मतलब है सितारे और Logy का मतलब है अध्ययन करना यानी Astrology के माध्यम से ही सितारों की चाल जानकर मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया जा सकता है।

इसमें सबसे पहली पद्धति वैदिक ज्योतिष की रही।  यह ज्योतिष शास्त्र का दुर्भाग्य रहा की जब पूरी दुनिया विज्ञान की दूसरी शाखाओ पर भारी भरकम काम कर रही थी तब सारे ज्योतिष आचार्य सो रहे थे। उन्होंने कभी आपस में मिलकर के कुछ नया बनाने और इसको आसान करने के बारे में सोचा ही नहीं। समय के साथ-साथ जब ज्योतिष आचार्य काम कर रहे थे तो नतीजा यह हुआ की प्रगाढ़ गणनाये सटीक ना होने के कारण इस महान विज्ञान के अस्तित्व पर सवाल या निशान लगने लगे। 

इसका नतीजा यह हुआ की बहुत से लोग तो यह कहने में गर्व महसूस करने लगे की वह ज्योतिष को नहीं मानते लेकिन वही लोग जिंदगी में मुसीबत आने पर जगह जगह एक अच्छे ज्योतिष को ढूंढते फिरते है।उसका कारण सिर्फ इतना है की दूसरे लोगो को पता ना चले और लोग उन्हें अंधविश्वाशी ना कहे।  इसका कारण शायद यह भी रहा की पिछले कुछ 100 सालो में शिक्षा का स्तर बहुत ही कम रहा जिसके कारण इतने भारी विज्ञान  को समझना करोड़ो में एक आदमी के बस का ही रह गया। परन्तु फिर एक उम्मीद पैदा हुई जब लाल किताब का आगमन हुआ। 1922-1923 के आस-पास हिमांचल में लाल किताब पद्धति को बहुत माना जाता था परन्तु तब लाल किताब पूर्ण रूप से एक या ही घरो में ही मुश्किल से होती थी परन्तु उसके ज्ञान को बहुत सारे लोग जानते थे। 

जैसे - अगर व्यक्ति के दांतो में दर्द होता है या ख़राब हो जाते है तो उस व्यक्ति को नौकरी तो सूट कर सकती है परन्तु वह बहुत अच्छा Business नहीं कर सकता क्योकि  Business बुध ग्रह से सम्बंधित होता है और दांत भी बुध ग्रह से देखे जाते है।  इसी प्रकार रिश्तो में भी बुआ, बहन, बेटी बुध ग्रह के करक माने जाते है। इंसान का बुध ग्रह ख़राब होने पर उसकी बुआ, बहन, बेटी किसी ना किसी कारण मुसीबतो से घिरी रहती है और सुख से जीवन नहीं बिता पाती है।

इस बहुत ही गहरे विज्ञान के बारे में जब एक अंग्रेज अफसर ने सुना तो उन्होंने पंडित रूपचंद जोशी जी को और इस विज्ञान की की किताब जिसको उर्दू और फार्सी में लिखी गयी थी उसको अंग्रेजी (English) में

ट्रांसलेट(Translate) करने के लिए कहा। पंडित रूपचंद जोशी जी पंजाब के गाँव (Pharwala) डिस्ट्रिक्ट(District) जालंधर(Jalandhar) के रहने वाले एक स्कूल मास्टर हुआ करते थे जब उन्होंने इसे अंग्रेजी(English) और हिंदी में ट्रांसलेट कर लिया तो इसकी बहुत सी प्रतिरूप अपने साथ वाले अच्छे लोगो में बाँट दी और साथ ही उन्होंने पड़ोस में रहने वाले पंडित गिरधारीलाल जी के नाम से इस किताब को प्रकाशित किया क्योकि वे स्वयं सरकारी स्कूल के मास्टर होने के कारण अपने नाम पर प्रकाशित नहीं कर सकते थे। लालकिताब की गणना से लोगो के बारे में जो बताया जाता था और साथ ही लाल किताब के उपाय देकर उनकी मुसीबतो को दूर किया जाता था उससे भारत के North में लाल किताब बहुत ही ज्यादा प्रिय हो गयी और लोगो के काम ज्यादा से ज्यादा संख्या में बनते चले गये।

वैसे तो ज्योतिष का इतिहास इतना पुराना है की हिन्दू धर्म के प्राचीन कथाओ में कहा गया है की सृष्टि के निर्माण के साथ ही श्री ब्रह्मा जी ने यह विज्ञान  ऋषि गर्ग को सौप दिया और ऋषि गर्ग ने ही दुनिया ने प्रचार और प्रसिद्द किया या यह कह सकते है की ऋषि गर्ग भारत के धरती पर पहले ज्योतिषी रहे उनके बाद 1000 से 600 ईसा पूर्व उत्तर वैदिक काल के दौरान अरबी , मिस्र, यहुदी और फारसी लोगो ने जिन ज्योतिषीय ग्रंथों को लिखा उनमे उनमे यह जानकारी मिलती है की 3769 ईसा पूर्व के दौरान 'सेठ' नाम के एक ज्योतिषाचार्य हुआ करते थे जिन्हे पश्चिम सभ्यता का पहला ज्योतिष माना जाता था  उन ग्रंथो से यह भी पता चलता है की सेठ ही ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने ग्रहो और उनकी गति मार्ग का अध्ययन किया तथा उनका ज्योतिष सूर्य की गति और पथ पर आधारित था। 

ज्योतिष का स्वर्ण काल 2600 वर्ष पूर्व कहा जाता है यह समय इसके विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण था जिसमे खाल्डिया के पादरियों और गरड़ियो ने इस विज्ञान का गहरा अध्ययन किया और यह ज्ञात किया की ग्रहो की गति मानव जीवन को किस हद तक प्रभावित कर सकती है और साथ ही यह भी जाना की मानव जीवन में पैदा होने वाले विभिन्न प्रकार की घटनाओ में कौन सा ग्रह जिम्मेदार है। शायद वही समय था जब ज्योतिष सम्पूर्णता की ओर बढ़ा।

10 ईसा पूर्व से अंतिम और 9 ईसा पूर्व से शुरुआत के 'क्लेडिया' नाम का एक राष्ट्र सामने आया जोकि एक यहूदी राष्ट्र था और यहूदियो ने इस विज्ञान पर बखूबी काम किया जिससे की पश्चिम के सभी देश ज्योतिष आचार्यो को 'क्लेडियन्स' कहने लगे।

'क्लेडियन्स' के बाद विज्ञान को 'Pythogoriyans' ने आगे बढ़ाया और यही से ज्योतिष विज्ञान के साथ गणित के गणनाओ का जुड़ना आरम्भ हुआ और यह विद्या ग्रीक पहुँच गयी। जैसा की सारी दुनिया जानती है की ग्रीक के लोग स्वाभाव में बहुत जिज्ञासु होते है उनके हाँथ में यह विद्या आते ही उन्होंने इस विज्ञान  

को आत्म आंकलन के साथ जोड़ दिया। उन्होंने जन्म कुंडली का इतना गहरा अध्ययन किया दुनिया में अपने आने के उद्देश्य की खोज में लग गये और उसके बाद जन्म समय की कुंडली बनाकर व्यक्ति के भाग्य और भविष्य की परिस्थिति के बारे में बहुत अच्छी भविष्यवाणी करने लगे। ब्रिटिश म्यूजियम में ज्योतिष से सम्बंधित कई प्राचीन दस्तावेज सुरक्षित है। ऐसा कहा जाता है की यंहा 2000 वर्ष पूर्व की एक कुंडली भी सुरक्षित रखी गयी है।

इजिप्ट(Egypt) यानि मिश्र देश के राजा अपने राज-पाठ को बचाने के लिए भी ज्योतिष का इस्तेमाल करते थे। माना जाता है की मिस्र के राजा 'फ़राओह' जोकि इजिप्ट के 18वे वंश के मध्य राजा थे वे भी अपना हर कार्य ज्योतिष से पूछकर करते थे। जब भी कोई बच्चा राजा बनने वाले नक्षत्र या योग में पैदा होता था तो उसकी सूचना राजा को दी जाती थी और राजा उसी वक़्त उन बच्चे के क़त्ल का हुक्म दे देता था ताकि वह लम्बे समय तक उस राजपाठ पर अपना शाशन जमा सके।

इसके बाद 'Persia' में भी ऐसे ज्योतिष थे जिनको वह के राजा उनको अपने अद्भुत ज्ञान के लिए सम्मानित किया करते थे और उनको राज्य सभा में भी एक खास स्थान दिया करते थे। पर्सियन राजा ' हेस्टॉस्पेस ' (Hystaspes) के राजकाज के दौरान 'ज़मास्प' (Gjamasp) वहाँ के एक काउंसलर की भूमिका में थे और वह काफी सटीक ज्योतिष गणनाकार भविष्यवाणी किया करते थे और उन्होंने ही उस वक़्त में पैगम्बर मोहम्मद के दुनिया में आने की सटीक गणना और भविष्यवाणी की थी।

स्पेन में भी इस विज्ञान का विस्तार हुआ जिसका श्रेय 'सेरेकेन्स'(Saracens) को जाता है। 711 ए. डी. में वह इसे स्पेन लेकर आए और इस विज्ञान का अध्ययन किया। मध्यकालीन मुस्लिम जिन्हे मूर कहा गया उन्होंने 711 ए. डी में आईवेरियन पेनेन्सुला (वर्तमान में गिब्राल्टर, स्पेन, पुर्तगाल और दक्षिणी फ्रांस के कई हिस्से) में घुसपैठ की और 1237 में इस विज्ञान का ज्ञान लेकर यूरोप आ गए। 

2513 ईसा पूर्व में चीन का राजा (Chiyun) भी ज्योतिष गणना के आधार पर चुना गया जिसके प्रमाण आज भी मिलते है। उस समय में हर राजा के साथ उसका सबसे अच्छा ज्योतिष खगोल आचार्य साथ मौजूद रहता था।

जॉन डी (John D), महरानी एलिजाबेथ की पसंदीदा ज्योतिषी थी और सिकंदर के बारे में भी कहा जाता है की जब वे कंही बाहर लड़ाई के लिए जाते थे तब वे ज्योतिष को साथ लेकर जाते थे और युद्ध से सम्बंधित सारे विचार विमर्श कर उनसे सलाह जरूर लेते थे। इसके अलावा बुल्ल्हा के अब्बू मजार ने बग़दाद में मुंडन ज्योतिष की नीव रखी थी इस विद्या को अरब ले जाने के लिए मन्नोर रसीद ने कई ज्योतिषी ग्रन्थ का अनुवाद किया था फिर भी काफी प्रसिद्द नाम रहे है

‘पाईथागोरस’, ‘सिकंदर महान’ , ‘लिली बेकन’, ‘हिप्पोक्रेटस’ जैसे महान लोगो के द्वारा विज्ञान को संपूर्ण बनाने के लिए अपने जीवन काल में बहुत काम किया।  इसमें कोई शक नहीं है  की प्राचीन काल में जितना काम ज्योतिष पर हुआ और कही नहीं हुआ। प्राचीन काल के दौरान ऋषि गर्ग , आर्यभट्ट, भाग बृहस्पति, भद्रायायन , देवस्वामी इस प्रकार और बहुत  से  ऋषियों  ने इस पर काम  किया और संकरण स्थापित  किया।  

19 वी सदी के शुरुआत के बाद ज्योतिष विज्ञान में कोई ख़ास कार्य नहीं हुआ जिसके परिणाम स्वरुप नई पीढ़ी का विश्वास ज्योतिष पर से हट गया। इसके फलस्वरूप आज लोग गर्व से कहते है की हम ज्योतिष को नहीं मानते है। लेकिन परमात्मा की कृपा से 1940-1950 में लाल किताब का आना एक नए सिरे से ज्योतिष में नया प्राण डालने जैसा था। 1980 दशक में गुरुदेव जी. डी. वशिष्ठ जी का इस लाल किताब को सीखना और 90 की दशक में आते आते लोगो के लिए भविष्यवाणी करके एक प्रकाश के रूप में दुनिया में आये।

1950-1960 दशकों में तमिल के एक ज्योतिष के. के. कृष्णमूर्ति जी जिन्होंने ज्योतिष का अध्ययन करते हुए यह पाया की जब वे गणनाये करते है और उन गणनाओ के आधार पर भविष्यवाणी करते है तो उसमे कई भविष्यवाणी गलत साबित होती है। उन्होंने जब इसके बारे में और ज्योतिष आचार्यो के चर्चा की और बताया की हमारी गणनाओ में कुछ गलतिया है और हमे इस पर और अध्ययन करना चाहिए तो काफी ज्योतिषियों ने उनकी इस बात का बहुत बड़ा विरोध किया परन्तु वे भी अपने धुन के पक्के थे और उन्हीने रिसर्च करते करते एक ऐसा ज्योतिष बनाया जिसमे उन्होंने Ruling planet नाम का एक तरीका बनाया जिससे की भविष्यवाणी कथन में हर तरह की सच्चाई आ सके। जैसे की कोई जिस वक़्त में कोई प्रश्न करता  हुआ आता था तो उस वक़्त में लग्न का स्वामी देखा जाता था। प्रश्न करते समय चंद्र जिस नक्षत्र में होता था उसका स्वामी देखा जाता था और उस समय चंद्र जिस राशि में होता था उसका स्वामी देखा जाता था और हफ्ते का जो दिन हो उसका स्वामी देखा जाता था।

यह चार Planet Ruling planet कहलाते है।  इस चार रूलिंग ग्रह को यह बताना बहुत आसान हो गया की आदमी जो प्रश्न कर रहा है उसका सटीक जवाब क्या होगा। इस तरह से के. के.कृष्णमूर्ति जी ने के. पी. ज्योतिष को जन्म दिया।

ठीक इसी प्रकार 1990-2000 दसक में यही समस्या गुरुदेव जी. डी. वशिष्ठ जी के सामने आयी की उन्हें कई सवालो के जवाब सही तरह से नहीं मिलते थे। 1990 से ही इन सवालो के जवाब ढूंढने के लिए उनके द्वारा ज्योतिष को पढ़ा गया परन्तु उनकी खोज 2006-2007 में के. पी. को पढ़ने पर समाप्त हुई।

के. पी. ज्योतिष की खासियत है की वह केवल प्रश्न का का उत्तर देती है परन्तु गुरुदेव जी. डी. वशिष्ठ जी ने के. पी. के ज्योतिष में असूल में ज्यादातर बदलाव करके और पराशर ज्योतिष की राशि और भाव की गणनाओ को लेकर और लाल किताब की भविष्यवाणी को मिलाकर एक ऐसा सॉफ्टवेयर बनाया जिसको बनाने ने ग्यारह साल लगे जो इन तीनो पद्धतियों (पराशर, के. पी. और लाल किताब ) के आधार पर बताया गया और इतना सक्षम बनाया गया की धरती पर मौजूद हर इंसान की जन्म तिथि , जन्म समय और जन्म स्थान डालकर यह जाना जा सके की उस इन्सान की आत्मा कैसी है, कार्य शैली और स्वभाव कैसा है और उसके आधार पर वह अपने जीवन काल में किस प्रकार के सुख और दुःख से गुजरेगा और किस हद तक की उचाई व गिरावट अपने जीवन में प्राप्त करेगा। सिर्फ इतना ही नहीं लाल किताब ज्योतिष के आधार पर बहुत से नए उपाय बनाकर दुनिया को इसका बहुत बड़ा लाभ दिया।

उन्होंने इस ज्योतिष का निर्माण करके इस ज्योतिष को वशिष्ठ ज्योतिष का नाम दिया। आप यह भी कह सकते है की (पराशर, लाल किताब और के. पी. ) उन तीनो माँओ के गर्भ से पूर्णतः सक्षम और उसी से गुणकारी वशिष्ठ ज्योतिष नाम के पुत्र का जन्म हुआ और अपने आप में इंसान के सुख और दुःख उसके जीवन में घटी घटना और इंसान की जिंदगी की हर हार जीत बताने में इतना सक्षम है की गुरुदेव कहते है की अगले 1000 साल तक इंसानो को वशिष्ठ ज्योतिष को मानना एक मज़बूरी होगी या यह कह सकते है की अपने जीवन के आधार को जानकर आसान बनाना हो तो इसको अपनाना हर इंसान के लिए बहुत जरुरी होगा।

इसको यहाँ तक संभव कर दिया गया है की अब हर महीने 50 से 60 लोग गुरुदेव जी. डी. वशिष्ठ जी के पास इसलिए आते है की उनके यहाँ पैदा होने वाली संतान को कौन से दिन के कौन से घंटे में जन्म दिलवाया जाये जिससे की बच्चा हर तरह से सक्षम और संमृद्ध हो साथ ही माँ बाप के जीवन में जो बड़ी समस्याएं व कमिया है वो भी उस बच्चे के आने के बाद उसके जीवन से दूर हो जाये। इसके अलावा गुरूजी ने भारतीय संस्कृति, संस्कार और सभ्यता को समझकर गुरुकुल में पढ़ने वाले बच्चो के लिए यह अद्भुत सॉफ्टवेयर (Software) और ज्ञान निःशुल्क प्रदान करने का फैसला किया है जिससे की गुरुकुल में पढ़ने वाले बच्चो का भविष्य उज्वल हो सके एवं दुनिया में हमारी भारतीय संस्कृति को उज्जवल कर सके।

गुरुदेव जी. डी. वशिष्ठ जी इस अद्भुत ज्ञान के लिए अपने गुरुओ और अपने पारलौकिक गुरु श्री भोलेनाथ को तथा अपनी आत्मा में बसी माँ दुर्गा को धन्यवाद स्वरुप सत सत नमन करते है। 

 

यह भी पढ़ें - दस महाविद्याओं की आराधना से कैसे होगा आपका जीवन धन्य

Follow Us

Gurudev GD Vashist

Divider

Gurudev GD Vashist is also the author of Lal Kitab Amrit Vashist Jyotish. He is prominent in the India electronic media, like, leading TV channels like India News, Divya TV, Sadhna TV, Disha TV.
Read More

WhatsApp
Phone