Home / नवरात्रि की नौ देवियाँ
नवरात्रि की नौ देवियाँ
Divider

जगत जननी माँ दुर्गा के नवरुपो  का वर्णन:

 

नवरात्रि समारोह के दौरान देवी दुर्गा के नौ रूपों का सम्मान किया जाता है और पूजा जाता है जिसे नवदुर्गा के नाम से भी जाना जाता है।

माँ दुर्गा के नौ रूप

शैलपुत्री 

ब्रह्मचारिणी 

चन्द्रघंटा

कूष्माण्डा

स्कंदमाता

कात्यायनी

कालरात्रि

महागौरी

सिद्धिदात्री

 

शैलपुत्री 

नवरात्रि उत्सव के दौरान माँ दुर्गा के नौ विभिन्न रूपों का सम्मान एवं पूजा की जाती है।माँ दुर्गा का पहला पवित्र स्वरुप शैलपुत्री है शैल का अर्थ है शिखर शास्त्रों में शैलपुत्री को पर्वत शिखर की बेटी के नाम से जाना जाता है


ब्रह्मचारिणी 

मां दुर्गा की नवशक्ति का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानी तप का आचरण करने वाली। देवी का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है। इस देवी के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में यह कमण्डल धारण किए हैं।पूर्वजन्म में इस देवी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात् ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया। एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया। और दुर्गा पूजा के दूसरे दिन देवी के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है। इस देवी की कथा का सार यह है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए।

 

नवरात्रि के दिनों में किस दिन कौन से रंग के वस्त्र पहनना शुभ हैं 

माता ब्रह्मचारिणी  की पूजा के दिन

माता ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना के दिन जातकों को हरे रंगे के वस्त्र पहनने चाहिए. देवी मां प्रसन्न होकर हर मनोकामना पूरी करेंगी.

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।

देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

 

चन्द्रघंटा

माँ दुर्गा के चंद्रघंटा रूप की पूजा नवरात्रि के तीसरे दिन होती है माँ दुर्गा का तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है नवरात्रि उपासना मे तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन-आराधन किया जाता है माँ का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला हैं। इनके दस हाथ हैं। इनके दसों हाथों में खड्ग, बाण अस्त्र  शस्त्र आदि विभूषित हैं। इनका वाहन सिंह है। इनकी मुद्रा युद्ध के लिए उद्यत रहने की होती है। इनके घंटे सी भयानक चण्ड ध्वनि से अत्याचारी दानव-दैत्य-राक्षस सदैव प्रकम्पित रहते हैं।


मां चन्द्रघंटा की उपासना मन्त्र 

पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता.

प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥

नवरात्रि के दिनों में किस दिन कौन से रंग के वस्त्र पहनना शुभ हैं 

नवरात्रि के तीसरे दिन दो तिथियां एक साथ पड़ने की वजह से मां दुर्गा के चंद्रघंटा और मां कुष्मांडा स्वरूप की पूजा होगी. इसलिए इस दिन भूरे रंग और नारंगी रंग के कपड़े पहनकर पूजा करने से देवी मां की कृपा मिलेगी

 

कूष्माण्डा

नवरात्र-पूजन के चौथे दिन कुष्माण्डा देवी के स्वरूप की पूजा की जाती है। इस दिन साधक का मन 'अनाहत' चक्र में अवस्थित होता है। अतः इस दिन उसे अत्यंत पवित्र और अचंचल मन से कूष्माण्डा देवी के स्वरूप को ध्यान में रखकर पूजा-उपासना के कार्य में लगना चाहिए। इस दिन जहाँ तक संभव हो बड़े माथे वाली तेजस्वी विवाहित महिला का पूजन करना चाहिए। उन्हें भोजन में दही, हलवा खिलाना श्रेयस्कर है। इसके बाद फल, सूखे मेवे और सौभाग्य का सामान भेंट करना चाहिए जिससे माता जी प्रसन्न होती हैं। और मनवांछित फलों की प्राप्ति होती है।

मां कूष्माण्डा की उपासना मन्त्र 

कुष्मांडा: ऐं ह्री देव्यै नम:

वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्विनीम्॥

 

स्कंदमाता

नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है।

भगवान स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण दुर्गा जी के इस पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता कहा जाता है  भगवान स्कंद जी बालरूप में माता की गोद में बैठे होते हैं इस दिन साधक का मन विशुद्ध चक्र में अवस्थित होता है। माँ स्कंदमाता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी है। ये कमल के आसन पर उज्जवल रहती हैं। इसीलिए इन्हें पद्मासना देवी के नाम से भी जाना जाता है इनकी उपासना करने से साधक अलौकिक तेज की प्राप्ति करता है। और संतान प्राप्ति के लिए स्ंकदमाता की आराधना करना लाभकारी माना गया है।माता को लाल रंग प्रिय है इसलिए इनकी आराधना में लाल रंग के पुष्प जरूर अर्पित करना चाहिए।

इस दिन मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है इस दिन सफेद रंग के कपड़े पहनकर मां की आराधना करनी चाहिए।  

मां स्कंदमाता की उपासना मन्त्र 

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।


कात्यायनी

माँ कात्यायनी अमरकोश में पार्वती के लिए दूसरा नाम है  माँ कात्यायनी का जन्म कात्यायन ऋषि के घर हुआ था अतः इनको कात्यायनी कहा जाता है. और संस्कृत शब्दकोश में उमा, कात्यायनी, गौरी, काली, हेमावती, इन्ही के अन्य नाम है और शक्तिवाद में शक्ति या दुर्गा, जिसमे भद्रकाली और चंडिका भी शामिल है परम्परागत रूप से देवी दुर्गा की तरह वे लाल रंग से जुड़ी हुई हैं। नवरात्रि उत्सव के षष्ठी को उनकी पूजा की जाती है। उस दिन साधक का मन 'आज्ञा चक्र' में स्थित होता है।ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं गोपियों ने कृष्ण की प्राप्ति के लिए इनकी पूजा की थी विवाह सम्बन्धी मामलों के लिए इनकी पूजा अचूक होती है योग्य और मनचाहा पति इनकी कृपा से प्राप्त होता है

मां कात्यायनी को लाल रंग काफी भाता है. इसलिए भक्तों को इस दिन लाल रंग के कपड़े पहनने चाहिए

मां कात्यायनी की उपासना मन्त्र

चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।

कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥

 

कालरात्रि

माँ दुर्गा की सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती हैं।

नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की  पूजा की जाती है  इस दिन साधक का मन सहस्रार चक्र में स्थित रहता है  देवी कालात्रि को व्यापक रूप से माता देवी - काली महाकाली  भैरवी चंडी और दुर्गा के कई विनाशकारी रूपों में से एक माना जाता है। देवी के इन रूपों में सभी राक्षस भूत, प्रेत, पिसाच और नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश होता है माँ कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है लेकिन ये सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं। इसी कारण इनका एक नाम शुभंकारी भी है। अतः इनसे भक्तों को किसी प्रकार भी भयभीत अथवा आतंकित होने की आवश्यकता नहीं है। मां कालरात्रि की पूजा करके आप अपने क्रोध पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। कालरात्रि माता को काली का रूप भी माना जाता है इनकी उत्पत्ति देवी पार्वती से हुई है

इस दिन मां कालरात्रि का पूजन होता है भक्तों को इस दिन नीले रंग के कपड़े पहनकर मां की पूजा-अर्चना करना चाहिए


मां कालरात्रि की उपासना मन्त्र

1 कालरात्र्यै नम:।

2 फट् शत्रून साघय घातय ॐ।

 

महागौरी

नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा की जाती है इनकी शक्ति अमोघ और सद्यः फलदायिनी है  इनकी उपासना से भक्तों के सभी कल्मष धुल जाते हैं, पूर्वसंचित पाप भी विनष्ट हो जाते हैं 

माँ महागौरी ने देवी पार्वती रूप में भगवान शिव को पति-रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी जिससे इनका शरीर काला पड़ गया। इनकी कठोर तपस्या से महादेव प्रसन्न हो गए और इनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली। इनके शरीर का रंग तपस्या से काला हो जाने के कारण महादेव ने इन्हें गंगाजल से धोया तो ये फिर से गौर रंग वाली हो गईं। इसी कारण इनका नाम गौरी पड़ गया इसी कारण अष्टमी के दिन व्रत रखने से भक्तों को उनका मनचाहा जीवनसाथी मिलता है महागौरी की एक अन्य कथा भी प्रचलित है। इसके अनुसार जब मां उमा जंगल में तपस्या कर रही थीं, तभी एक शेर वन में भूखा घूम रहा था। खाने की तलाश में वहां पहुंचा जहां मां तपस्या में लीन थी। देवी को देखकर शेर की भूख बढ़ गई और शेर उनके तपस्या पूरी करने का इंतजार करने लगा। इस इंतजार में वह काफी कमजोर हो गया। देवी जब तप से उठी तो शेर की दशा देखकर उन्हें उस पर बहुत दया आई मां ने उसे अपनी सवारी ली और एक प्रकार से उसने भी मां के साथ तपस्या की थी इसलिए देवी महागौरी का वाहन बैल और सिंह दोनों ही हैं।

इस दिन पूजन करते समय भक्तों को गुलाबी रंग के कपड़े पहनने चाहिए

मां महागौरी की उपासना मन्त्र

हाथ जोड़कर इस मंत्र का उच्चारण करें :-

'सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। 

सेव्यामाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥'

सिद्धिदात्री

नवरात्रि के आखिरी दिन यानि नवमी को दुर्गाजी के नवें स्वरुप माँ सिद्धिदात्री की उपासना की जाती है माँ का यह रूप सभी सिद्धियों को प्रदान करने वाला है  इनकी उपासना से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है| 

भगवान शिव ने इन्हीं की कृपा से सिद्धियों  को प्राप्त किया था व इन्हीं के द्वारा भगवान शिव को अर्द्धनारीश्वर रूप प्राप्त हुआ - अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व- ये आठ सिद्धियाँ होती हैं| भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया था। इनकी अनुकम्पा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण वे लोक में 'अर्द्धनारीश्वर' नाम से प्रसिद्ध हुए शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता,सर्वत्र विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है

मां सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा-अर्चना के दिन  भक्तों के लिए बैंगनी रंग के कपड़े पहनना शुभ है

मां सिद्धिदात्री उपासना मंत्र

वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।

कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम्॥

 

 

Follow Us

Gurudev GD Vashist

Divider

Gurudev GD Vashist is also the author of Lal Kitab Amrit Vashist Jyotish. He is prominent in the India electronic media, like, leading TV channels like India News, Divya TV, Sadhna TV, Disha TV.
Read More

WhatsApp
Phone