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करवा चौथ 2021 - जानिए कब है करवा चौथ, इसका पौराणिक इतिहास, महत्व तथा पूजा विधि
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करवाचौथ (Karva Chauth) शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, 'करवा' यानी 'मिट्टी का बरतन' और 'चौथ' यानि 'चतुर्थी'। इस दिन मिट्टी के बरतन यानी करवे का विशेष महत्व माना गया है। सभी विवाहित स्त्रियां सालभर इस त्यौहार का इंतजार करती हैं और इसकी सभी विधियों को बड़े श्रद्धा-भाव से पूरा करती हैं। करवाचौथ का त्यौहार पति-पत्नी के मजबूत रिश्ते, प्यार और विश्वास का प्रतीक है।  इस बार यह व्रत 24 अक्टूबर 2021, रविवार को है। हिंदू धर्म में करवाचौथ सुहागन स्त्रियों के लिए विशेष महत्व रखता है।

 

करवाचौथ का इतिहास

 

एक कथा के अनुसार एक बार देवताओं और दानवों में युद्ध शुरू हो गया और उस युद्ध में देवताओं की हार हो रही थी। ऐसे में देवता ब्रह्मदेव के पास गए और रक्षा की प्रार्थना की। ब्रह्मदेव ने कहा कि इस संकट से बचने के लिए सभी देवताओं की पत्नियों को अपने-अपने पतियों के लिए व्रत रखना चाहिए और सच्चे दिल से उनकी विजय के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। ब्रह्मदेव ने यह वचन दिया कि ऐसा करने पर निश्चित ही इस युद्ध में देवताओं की जीत होगी। ब्रह्मदेव के इस सुझाव को सभी देवताओं और उनकी पत्नियों ने खुशी-खुशी स्वीकार किया। ब्रह्मदेव के कहे अनुसार कार्तिक माह की चतुर्थी के दिन सभी देवताओं की पत्नियों ने व्रत रखा और अपने पतियों यानी देवताओं की विजय के लिए प्रार्थना की। उनकी यह प्रार्थना स्वीकार हुई और युद्ध में देवताओं की जीत हुई। इस खुशखबरी को सुनकर सभी देव पत्नियों ने अपना व्रत खोला और खाना खाया। उस समय आकाश में चांद भी निकल आया था। माना जाता है कि इसी दिन से करवाचौथ के व्रत के परंपरा शुरू हुई।

 

इस व्रत में भगवान शंकर, माता पार्वती, कार्तिकेय, गणेश और चंद्र देवता की पूजा-अर्चना करने का विधान है। करवाचौथ की कथा सुनने से विवाहित महिलाओं का सुहाग बना रहता है, उनके घर में सुख, शान्ति,समृद्धि और सन्तान सुख मिलता है।

 

बन रहा है यह शुभ योग

 

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार करवा चौथ (Karva Chauth 2021) पर चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में उदित होगा और इसी नक्षत्र में पूजा भी की जाएगी। धार्मिक दृष्टि से यह नक्षत्र बेहद ही शुभ माना जाता है। इस नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं इसलिए माना जाता है कि इस नक्षत्र में चंद्रमा दर्शन करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। करवा चौथ पर रोहिणी नक्षत्र में चंद्रोदय का शुभ संयोग 5 साल बाद बन रहा है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, चंद्रमा की सत्ताईस पत्नियां थीं, जिन्हें हम नक्षत्र के रूप में जानते हैं। चंद्रमा अपनी रोहिणी नाम की पत्नी से अधिक प्रेम करते थे। अन्य पत्नियों ने जब ये बात अपने पिता दक्ष को बताई तो वे क्रोधित हो गए और उन्होंने चंद्रमा को क्षय रोग होने का श्राप दे दिया। बाद में चंद्रमा ने भगवान की तपस्या से इस श्राप से मुक्ति पाई। इसलिए करवा चौथ पर चंद्रमा और रोहिणी नक्षत्र का योग बहुत ही शुभ माना जाता है क्योंकि ये चंद्रमा की सबसे प्रिय पत्नी है।

 

करवा चौथ व्रत की पूजा विधि

 

चंद्रमा, शिव, पार्वती, स्वामी कार्तिकेय और गौरा की मूर्तियों की पूजा षोडशोपचार विधि से विधिवत करके एक तांबे या मिट्टी के पात्र में चावल, उड़द की दाल, सुहाग की सामग्री, जैसे- सिंदूर, चूडियां शीशा, कंघी, रिबन और रुपया रखकर किसी बड़ी सुहागिन स्त्री या अपनी सास के पांव छूकर उन्हें भेंट करनी चाहिए। तत्पश्चात रात्रि में जब पूर्ण चंद्रोदय हो जाए 'ॐ शिवायै नमः' से पार्वती का, 'ॐ नमः शिवाय' से शिव का, 'ॐ षण्मुखाय नमः' से स्वामी कार्तिकेय का, 'ॐ गणेशाय नमः' से गणेश का तथा 'ॐ सोमाय नमः' से चंद्रमा का पूजन करें। तब चंद्रमा को छलनी से देखकर अर्घ्य दें, आरती उतारें और अपने पति का दर्शन करते हुए पूजा करें। इससे पति की उम्र लंबी होती है। तत्पश्चात पति के हाथ से पानी पीकर व्रत तोड़ें।

 

कब से कब तक रहेगी चतुर्थी तिथि?

 

कार्तिक मास की चतुर्थी तिथि आरंभ - 24 अक्टूबर, रविवार की सुबह 03.01 मिनट से

कार्तिक मास की चतुर्थी तिथि समाप्त - 25 अक्टूबर, सोमवार की सुबह 05.43 मिनट तक

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Gurudev GD Vashist

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Gurudev GD Vashist is also the author of Lal Kitab Amrit Vashist Jyotish. He is prominent in the India electronic media, like, leading TV channels like India News, Divya TV, Sadhna TV, Disha TV.
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