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मकर संक्रांति 2022 - पढ़ें इस पर्व का इतिहास, महत्व, शुभ मुहूर्त
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पूरे ब्रह्मांड को प्रकाशमय से सुशोभित बनाये रखने वाले सूर्य ग्रह पर आधारित हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का बहुत बड़ा महत्व माना गया है। हिन्दू धर्म से जुड़े अनेकों जाति समुदाय के लोग और वेद-पुराणों में भी इस पर्व का विशेष उल्लेख व महत्त्व मिलता है। धर्म ग्रन्थों में उलेखित अनेकों पर्व-त्योहारों की सात्विक कथायेँ तो प्राप्त होती है पर वहीं मकर संक्रांति को भी प्रमुख स्थान दिया है। मकर संक्रांति का महत्व हिंदू धर्म ग्रन्थों के लिए वैसा ही है जैसे की वृक्षों में पीपल वृक्ष का प्रमुख स्थान और  हाथियों में ऐरावत जैसे गतिमान पशु का तथा पहाड़ों में हिमालय जैसे शिखर का।

 

वैज्ञानिकता के अनुसार मकर संक्रांति पर्व को खगोलीय घटना भी मानी जाति है। जिससे भू मण्डल की जड़ और चेतन की दशा और दिशा तय कि जाती है। जैसे- कि कब दिन होगा कब रात्री होगी कब शर्दी होगी तो कब गर्मी इत्यादि। खगोलीय घटना क्रम के अनुसार जब सूर्य पिण्ड धनु से मकर राशि में प्रवेश करता है तो उत्तरायण माना जाता है। इस राशि परिवर्तन के समय को ही मकर संक्रांति कहते हैं। यही एकमात्र ऐसा पर्व है जिसे पूरे भारत वर्ष में अलग-अलग राज्यों के अनुसार अलग-अलग तरीकों से बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है।

 

इस दिन तीर्थ स्थलों या प्रयोगों मे गंगा स्नान,ध्यान दान पूजा-पाठा करने से व्यक्ति को अनंत कोटी फल प्राप्त होते हैं। तथा मोक्ष कि  गीता के अनुसार स्वयं ही भगवान श्रीकृष्ण ने सूर्य के उत्तरायण में प्रवेश करने का महत्व बताते हुए कहा कि सूर्य के उत्तरायण में रहने कि छह मास कि अवधि के शुभ काल में पृथ्वी उदितमान रहती है तो इस उदितमान प्रकाश में यदि शरीर का परित्याग करने से व्यक्ति का पुनर्जन्म नहीं होता। एसी स्थित में परित्याग शरीर की आत्मा ब्रह्म को प्राप्त हैं। ठीक इस स्थिति के विपरीत सूर्यदेव के दक्षिणायण होने पर पृथ्वी रात्रिमय जैसी हो जाती है और इस अंधकाररूपी रात्रिमय में शरीर त्याग करने पर व्यक्ति को पुनः-पुनः जन्म लेना पड़ता है।

 

माना जाता है कि जब सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश कर रहे थे तो ठीक उसी समय भागीरथ के तपस्या से परम पवित्र माँ गंगा का धरती (भू धरा ) पर अवतरण हुआ था। कुरुक्षेत्र महासंग्राम में कौरव-पांडव के युद्ध के दौरान भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर ही अपनी इच्छा अनुसार अपनी आत्मा से अपने पञ्चमहाभूत से निर्मित अपने स्थूल शरीर का परित्याग किया था। उपरोक्त बताये गए कारण से सूर्य का उत्तरायण में जाने से देह का परित्याग करने वाली आत्मा ईश्वरी लोक में प्रवेश कर लेती है और बार-बार के जन्मित चक्र से व्यक्ति को मुक्ति मिल जाती है।

 

शुभ मुहूर्त

 

मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी दिन शुक्रवार को मनाया जा रहा है। इस बार पुण्यकाल 14 जनवरी 2022 को सुबह 07 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर शाम 05 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। तथा महापुण्य काल सुबह 09 बजे से शुरू होकर 10:30 तक रहेगा।

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Gurudev GD Vashist

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Gurudev GD Vashist is also the author of Lal Kitab Amrit Vashist Jyotish. He is prominent in the India electronic media, like, leading TV channels like India News, Divya TV, Sadhna TV, Disha TV.
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