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ब्रह्म मुहूर्त - एक ऐसा मुहूर्त जो आपकी उम्र बढ़ा देगा
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हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार मनुष्य के प्रकृति को तीन भागों में विभाजित किया गया है। सत्वगुण, रजोगुण और तमोगुण। जहां सत्वगुणी को देव प्रकृति कहा जाता है वही तमोगुणी को असुर या राक्षस प्रकृति कहा जाता है।  रजोगुण इन दोनों के मेल वाली प्रकृति को कहा जाता है जिसमें इन दोनों गुणों का मेल हो। इसी प्रकार समय को भी इन तीन गुणों के अनुसार तीन भागों में विभाजित किया गया है।

रात्रि का समय तमोगुणी प्रकृति का, दोपहर का समय रजोगुणी और सुबह का समय सत्व यानी सत्वगुणी प्रकृति का होता है। जो व्यक्ति जिस समय जागता है उसकी प्रकृति उसी गुण के अनुरूप ढल जाती है। यही कारण है के हमारे बड़े बुज़ुर्ग हमको अक्सर सूर्योदय से पहले जागने को कहा करते थे। सुबह का समय यानि ब्रम्ह मुहूर्त में अगर व्यक्ति उठता है तो उसमें प्रकृति के सत्व यानि पॉजिटिव ऊर्जा का प्रभाव सबसे ज़्यादा होता है।  वही दूसरी ओर व्यक्ति जितना देर से उठेगा यह प्रभाव उतना ही कम होता जायेगा।

आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो ब्रह्म मुहूर्त किसी भी शुभ कार्य या उपाय को करने के लिए सबसे ज्यादा शुभ माना गया है। इस समय संपूर्ण वातावरण शांतिमय और निर्मल होता है। देवी-देवता इस काल में विचरण कर रहे होते हैं। सत्व गुणों की प्रधानता रहती है। प्रमुख मंदिरों के पट भी ब्रह्म मुहूर्त में खोल दिए जाते हैं तथा भगवान का श्रृंगार व पूजन भी ब्रह्म मुहूर्त में किए जाने का विधान है। इस समय में किए गए कार्य का फल दुगना मिलता है। यह समय देवों का काल माना जाता है जिसमें दैवीय शक्तियां अपनी चरम सीमा पर होती है जिसके कारण कोई भी मंगल कार्य अपनी क्षमता से कई गुना ज्यादा फल प्राप्त करता है। इसीलिए माना जाता है कि कोई भी अनुष्ठान अगर ब्रह्म मुहूर्त में किया जाए तो वह सर्वश्रेष्ठ है।

ब्रह्म मुहूर्त का अर्थ क्या है?

सुर्य उदय से 1 घंटा 36 मिनट पहले शुरू होने वाला समय ब्रह्म मुहूर्त कहलाता है। इस समय में किये आध्यात्मिक कार्यो का फल कई गुना बढ़ जाता है। ब्रम्ह शब्द की उत्पत्ति "बृहद" शब्द से हुई है जिसका अर्थ होता है सबसे महान और वहीं मुहूर्त का अर्थ है 48 मिनट का अंतराल। दोनों को मिला दिया जाए तो इसका अर्थ बनता है ऐसा मुहूर्त जो बहुत महान हो। ब्रह्म शब्द का अर्थ आत्मा भी होता है। आत्मा यानि वो तत्व जिसके कारण इस नश्वर शरीर में प्राण बने रहते है। अगर इस अर्थ से समझा जाये तो ब्रम्ह मुहूर्त का समय वो समय है जो आपकी आत्मा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। हमारे शास्त्रीय संगीत में भी रागों को एक निर्धारित समय पर गाने की रीति है। अगर आपने गौर किया होगा तो रेडियो में गाने भी इन तीन गुणों से प्रभावित होते है।

इस समय का मुख्य लक्षण है ज्ञान और अध्यात्म और यही वजह है के हमारे बड़े बुजुर्ग हमको इस समय उठकर अध्ययन करने की सलाह देते  थे। कहते है इस समय का ज्ञान कभी क्षीण नहीं होता।

ब्रह्म मुहूर्त के स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदे

ब्रह्म मुहूर्त को अमृत बेला भी कहा जाता है। इस शब्द से आप इसकी स्वास्थ्य संबंधी महिमा को समझ ही गए होंगे। हिन्दू धर्म ग्रंथो में प्रमुख श्रीमद भगवत गीता अथर्ववेद और अस्टांग हृदयम जैसे कई ग्रंथो में ब्रह्म मुहूर्त में उठने के कई सारे फायदे बताए गए हैं जिसमें स्वास्थ्य का फायदा सबसे ज्यादा प्रमुख है। जो व्यक्ति ब्रह्म मुहूर्त में स्नान आदि करके अपने सभी कार्यों से निवृत्त होते हैं उन लोगों में एजिंग की समस्या कम देखी जाती है। ऐसे लोगों में बाहरी बीमारियों से लड़ने की क्षमता यानी इम्यूनिटी भी ज्यादा देखी गई है।

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठने से ब्रह्म तेज मुख पर होता है जिसके कारण त्वचा और भी ज्यादा तेजवान नजर आती है। इस मुहूर्त में उठने के बाद आदमी पूरा दिन एनर्जेटिक बना रहता है। वहीं अगर आप देर से उठते हैं तो शरीर में आलस्य बना रहता है।




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Gurudev GD Vashist

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Gurudev GD Vashist is also the author of Lal Kitab Amrit Vashist Jyotish. He is prominent in the India electronic media, like, leading TV channels like India News, Divya TV, Sadhna TV, Disha TV.
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