Home / परशुराम अवतार - क्यों किया भगवान् परशुराम ने क्षत्रियों का 21 बार संहार
परशुराम अवतार - क्यों किया भगवान् परशुराम ने क्षत्रियों का 21 बार संहार
Divider


Divider

क्षत्रियरुधिरमये जगदपगतपापम् ।

स्नपयसि पयसि शमितभवतापम् ।।

केशव धृतभृगुपतिरूप जय जगदीश हरे ।।6।।

"हे केशव ! हे मधुसूदन! आपने परशुराम के रूप में अवतार लिया और मानव जाति के कष्टों को दूर करने के लिए दुष्ट क्षत्रिय राजाओं का विनाश किया। आपकी सदा जय हो !"

भगवान् के दस अवतारों में से छठा स्थान भगवान् भृगुवंशी राम का है। भृगुपति राम का जन्म महर्षि भृगु के वंश में ऋषि जमदग्नि जी के यहाँ हुआ। भगवान् का यह रूप ब्राह्मण क्षत्रिय का था जो वेदों में तो प्रखर है ही और साथ ही साथ युद्ध कला में भी निपुण है। भगवान् परशुराम अष्ट चीरञ्जीवियों में से एक है और साथ ही में सप्तऋषि उत्तराधिकारी भी हैं।

उनके धरती को क्षत्रिय विहीन करने की कहानी तो आप जानते ही होंगे, लेकिन क्या आप जानते है के उन्होंने ऐसा आखिर क्यों किया? ये उस समय की बात है जब धरती धूर्त और अहंकारी शासकों से भरी हुई थी। धरती को इन सब से विहीन करना अनिवार्य हो गया था। इस कार्य के लिए भगवान् नारायण ने पृथ्वी पर जन्म लिया। त्रेता युग में अक्षय तृतीया के शुभ दिन, भगवान के छठे अवतार, परशुराम का जन्म हुआ।

भगवान् राम ऋषि जमदग्नि के सबसे छोटे पुत्र थे और वेद, वेदांत और अग्निहोत्र के साथ साथ युद्ध कला में भी निपुण थे। उनके पिता ऋषि जमदग्नि जी अग्निहोत्र ब्राह्मण थे जो अपने परिवार के साथ जंगल में अपना जीवन निर्वाह करते। ऋषि के पास कामधेनु नाम की एक गाय थी जो यज्ञ के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध कराया करती थी। एक बार आश्रम में महिष्मती राज्य के महाराज कार्तवीर्य अर्जुन का आना हुआ। आते ही अर्जुन की दृष्टि कामधेनु पर पड़ी और उसने उस पवित्र गाय को चुराने का पाप कृत्य कर दिया था।

कार्तीवीर्य अर्जुन भी कभी नेक आचरण वाला एक गुणी राजा था। वह इतना शक्तिशाली था कि उसने पराक्रमी रावण को हराकर उसे अपना बंधक बना लिया था। लेकिन दौलत और ताकत के नशे ने उसे बिल्कुल विपरीत बना दिया था।

जैसे ही ये बात परशुराम जी को पता चली भगवान् ने उसी समय महिष्मती पर धावा बोल दिया था। गाय को छुड़ाने के लिए उन्होंने कार्तवीर्य अर्जुन की पूरी सेना का सफाया कर उसे को वापस ले आए। जैसे ही कार्तवीर्य अर्जुन को ये बात पता चली तब उसने अपने पुत्रों को प्रतिशोध लेने के लिए भेजा। अर्जुन के पुत्रों ने ऋषि जमदग्नि के आश्रम को नष्ट- भ्रष्ट कर दिया था। इतना ही नहीं, अर्जुन के पुत्रों ने ऋषि जमदग्नि की निर्मम हत्या कर दी जिससे परशुराम क्रोधित हो उठे। उन्होंने अपना परशु लिया और उन सभी का संघार कर दिया। अब कार्तवीर्य अर्जुन को बचाने वाला कोई नहीं था। उसके अत्याचार का अंत निकट था, वह जानता था कि वह जल्द ही मर जाएगा। कार्तवीर्य ने अपने अंतिम युद्ध की तैयारी शुरू कर दी।

युद्ध के मैदान में परशुराम अकेले अपने दिव्य परशु के साथ खड़े थे। वह शांत थे और उसकी शांति अर्जुन को विचलित किये हुए थी। वह जानता था कि उसका अंत निकट है। लड़ाई शुरू हुई। राम ने अकेले ही उसकी पूरी सेना का सफाया कर दिया। और अब बारी सहस्रबाहु अर्जुन की थी।

अर्जुन ने अपने हजार हाथों से राम पर प्रहार शुरू किया। अपनी पूरी ताकत से भी वह परशुराम को नहीं रोक पाए। भगवान परशुराम ने अपनी कुल्हाड़ी के एक वार से उसके सभी हजारों हाथों को काट डाला और उन्हें अपने कर्म का पश्चाताप कराया। परशुराम ने कार्तवीर्य अर्जुन का सिर काट कर उसे मुक्ति दी। अर्जुन को मोक्ष मिला, और परशुराम ने पूरे भ्रष्ट क्षत्रिय कुल सहित संहार करने का प्रण लिया।




Follow Us

Gurudev GD Vashist

Divider

Gurudev GD Vashist is also the author of Lal Kitab Amrit Vashist Jyotish. He is prominent in the India electronic media, like, leading TV channels like India News, Divya TV, Sadhna TV, Disha TV.
Read More

WhatsApp
Phone