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क्यों मनाई जाती है नवरात्रि और कब से है नवरात्रि

क्यों मनाई जाती है नवरात्रि और कब से है नवरात्रि

माँ भगवती की कृपा पाने के दिन शुरू हो चुके हैं। आप भी माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा उपासना करके अपने मन की मुरादों को पूरा कर सकते हैं। इस नवरात्र आप भी माँ अष्टभुजा माँ महा शक्ति को खुश कर सकते हैं। माँ आपको सुख-समृद्धि का वरदान देंगी।

नवरात्रि शब्द का अर्थ है नौ रातों का समूह नवरात्रि नौ दिनों तक मनाया जाने वाला हिंदुओं का प्रमुख पर्व है। इन नौ दिनों तक माँ दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों का पूजन किया जाता है। नवरात्र का पर्व भारत वर्ष में बड़ी धूम-धाम और आस्था के साथ मनाया जाता है।

अब आपको बताते हैं की आखिर सबसे पहले कब हुई नव दुर्गा की पूजा और सबसे पहले कब मनाया गया नवरात्रि का पर्व

दरअसल इसके पीछे 1 रोचक कथा है।

कथा के अनुसार जब भगवान राम और रावण का युद्ध हुआ तब रावण कि शक्तियों से ब्रह्मा जी भली-भांति अवगत थे। इसलिए उन्होने भगवान राम चन्द्र से माँ चंडी कि उपासना करने के लिए कहा और इस पूजन के लिए उन्होने 108 अति दुर्लभ नीलकमलों का प्रबंधन किया। ब्रह्मा जी कि ये चालाकी रावण समझ गया और उसने भी अमर होने की चाह में चंडी पूजा प्रारम्भ की। और रावण ने अपनी मायावी शक्ति से भगवान राम के पूजन सामग्री से 1 नील कमल चूरा लिया। जब राम जी को इस बात का पता चला तो उनको देवी के रुष्ट होने का भय होने लगा। तब भगवान राम को स्मरण हुआ कि मुझे तो लोग कमलनयन नवकंच लोचन  भी कहते हैं, तो क्यों ना संकल्प पूरा करने के लिए एक नेत्र अर्पित कर दिया जाए और राम जैसे ही बाण निकालकर अपना नेत्र निकालने गए, तब देवी प्रकट हो गयी और श्रीराम से प्रसन्न हुई और उन्हे विजयश्री का आशीर्वाद दिया।

वहीं रावण के चंडी पाठ में यज्ञ कर रहे ब्राह्मणों की सेवा में ब्राह्मण बालक का रूप लेकर हनुमानजी सेवा में लग गए। हनुमानजी की निःस्वार्थ सेवा देखकर ब्राह्मण खुश हो गए और उनसे वरदान माँगने को कहा इस पर हनुमानजी ने विनम्रतापूर्वक कहा- प्रभु, आप प्रसन्न हैं तो जिस मंत्र से यज्ञ कर रहे हैं, उसका एक अक्षर मेरे कहने से बदल दीजिए। मंत्र में जयादेवी भूर्तिहरिणी में के स्थान पर उच्चारित करें, यही मेरी इच्छा है। ब्राह्मण इस रहस्य को समझ नहीं सके और तथास्तु कह दिया। भूर्तिहरिणी यानी कि प्राणियों की पीड़ा हरने वाली और करिणी का अर्थ हो गया प्राणियों को पीड़ित करने वाली, जिससे देवी रुष्ट हो गई और रावण का सर्वनाश करवा दिया।

सबसे पहले श्रीरामजी ने इस शारदीय नवरात्रि पूजा की शुरुआत की थी. तत्पश्चात श्रीराम जी ने दसवे दिन लंका को जीतने के लिए निकले और रावण को मारकर लंका पर विजय प्राप्त की. तब से अधर्म पर सत्य और धर्म की जीत का पर्व दशहरा मनाया जाने लगा।

शारदीय नवरात्रि 2018

 10 अक्टूबर 2018: नवरात्रि का पहला दिन, प्रतिपदा, कलश स्‍थापना, चंद्र दर्शन और शैलपुत्री पूजन. 
11 अक्टूबर 2018: नवरात्रि का दूसरा दिन, द्व‍ितीया, बह्मचारिणी पूजन.
12 अक्टूबर 2018:  नवरात्रि का तीसरा दिन, तृतीया, चंद्रघंटा पूजन.
13 अक्टूबर 2018: नवरात्रि का चौथा दिन, चतुर्थी, कुष्‍मांडा पूजन.
14 अक्टूबर 2018: नवरात्रि का पांचवां दिन, पंचमी, स्‍कंदमाता पूजन.
15 अक्टूबर 2018: नवरात्रि का छठा दिन, षष्‍ठी, सरस्‍वती पूजन.
16 अक्टूबर 2018: नवरात्रि का सातवां दिन, सप्‍तमी, कात्‍यायनी पूजन.
17 अक्टूबर 2018: नवरात्रि का आठवां दिन, अष्‍टमी, कालरात्रि पूजन, कन्‍या पूजन.
18 अक्‍टूबर 2018: नवरात्रि का नौवां दिन, नवमी, महागौरी पूजन, कन्‍या पूजन, नवमी हवन, नवरात्रि पारण

सर्वमंगलमंगलये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्रयम्बके गौरि नारायणि नमोऽतु ते।।

शरणांगतदीन आर्त परित्राण परायणे।
सर्वस्यार्तिहरे देवी नारायणि नमोऽस्तु ते।।

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।
भयेभ्यारत्नाहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते।।

 

 

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