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भाग्य निर्धारण में क्या भूमिका निभाते है नक्षत्र

भाग्य निर्धारण में क्या भूमिका निभाते है नक्षत्र

नक्षत्र - अश्वनी

ज्योतिष शास्त्र में कुल 27 नक्षत्रों का उल्लेख मिलता है। जिसे व्यक्ति के भाग्य निर्धारण में अहम बताया गया है। व्यक्ति के स्वाभाव, कॅरिअर और संबंधों का कई हद तक पता नक्षत्रों के माध्यम से लगाया जाता है। नक्षत्रों की इस पूरी सिरीज़ में आज पहले नक्षत्र अश्वनी की बात की जायेगी तो आइये जानते है कैसे होते है अश्वनी नक्षत्र में पैदा हुए जातक। क्या क्या है इनके स्वाभाव के लक्षण साथ ही किन क्षेत्रो में बनना सकते है कॅरिअर।

कई बार हमारे मन में ये सवाल उठते है, की क्यों एक जैसी राशि वाले दो व्यक्ति या कहें किसी भी राशि वाले अधिकतर व्यक्ति बहुत ही अलग स्वाभाव के क्यों होते है। और उनकी सोच और ज़िन्दगी जीने का तरीका एकदम अलग होता क्यों होता है, और इसी वजह से कहीं न कहीं फिर हमे वैदिक ज्योतिष की crediblity अर्थात  विश्वनियता पर शक होने लगता है। दोस्तों इसका एक मूल कारण नक्षत्र है। हालाकिं इसके अलावा आपकी कुंडली में स्थित ग्रह की स्थिति भी एक बड़ा कारण है.

परन्तुं नक्षत्र मुख्य रूप से व्यक्ति के स्वाभाव को प्रथम दृस्टि से समझने में बहुत सहायक होता है, नक्षत्र राशि की ही एक डिवीज़न है, मतलब एक हिस्सा है उदाहरण स्वरूप: एक राशि 30 डिग्री की होती है, और हर राशि  में करीब सवा दो नक्षत्रों का समावेश होता है, मतलब हर राशि में लगभग 2.25  नक्षत्र होते है।

पुरे आकाशीय मंडल में अलग अलग तरह के असंख्य तारे है, परन्तुं हमारे प्राचीन वैदिक ऋषियों ने, तारों का गहन अध्यन करके उनकी पहचान की, और पुरे आकाशमण्डल को बराबर 12 भागों में बाट दिया। और इन्हे 12 भागों को या कहें डिवीज़न को हम राशि कहते  है , मतलब जोडिएक कहते है, परन्तुं आकाशीय ऊर्जा के प्रभाव और स्थिति को और गहराई से समझने के लिए वैदिक ऋषियों ने 12 राशियों को 27 नक्षत्रों में बराबर हिस्सों  बाट  दिया, और उनके स्वाभाव और गुणों को प्रदर्शित करते हुए उनको चिन्ह भी दिए, मतलब हर नक्षत्र का हर constelation का अपना एक symbol है। 

जैसा की ऊपर बताया गया है हर राशि में करीब सवा दो नक्षत्रों मतलब लगभग 2. 25  नक्षत्रों का समावेश होता है जैसे मेष राशि में 3 नक्षत्र सम्मलित है, या कहे की मेष राशि में 3 अलग अलग नक्षत्र है,  पहला अश्वनी, दूसरा भरणी और तीसरा नक्षत्र कृतिका, अब अश्वनी और भरणी नक्षत्र तो पुरे पुरे मेष राशि में है सम्मलित है , परन्तुं कृतिका नक्षत्र की सिर्फ एक पदा, ही मेष  राशि में होती है, अब आप सोच रहे होंगे की अब ये पदा क्या होता है या होती  है। जिस प्रकार 12  राशियों को 27 नक्षत्रों में विभाजित किया गया है, उसी प्रकार सभी नक्षत्रों को भी 4 भाग में बाटा गया है, और इन्ही को हम पदा कहते है।
अतः हर नक्षत्र में 9 पदा होती है, इसलिए यदि किसी व्यक्ति की मेष राशि है, तो उनका स्वभाव अलग इन्ही वजह से होता है, क्युकी जन्म के समय चन्द्रमा जिस राशि, जिस नक्षत्र और जिस पदा में होता है, तो व्यक्ति का स्वाभाव और व्यहार को उसी के अनुरूप ढालता है, और व्यक्ति के बारे में अधिक बारीकी से बताने में सहायक होता है , परन्तुं याद रहे बाकी ग्रहों की स्थितियां का भी आपके मनोभाव और व्यवहार पर प्रभाव रहता है, परन्तुं हर नक्षत्र का अपना स्वभाव और गुण है।

अश्वनी नक्षत्र का प्रतीक क्या कुछ निर्धारित करता है -
अश्विनी का अर्थ होता है घोड़ा, इसलिए इस नक्षत्र का का चिह्न घोड़े का मुख है। यह तो सभी जानते हैं कि मस्तिस्क शरीर की सभी कार्य-प्रणालियों का स्वामी है। यह नियंत्रण शक्ति का प्रतीक भी है। अतः अश्विनी नक्षत्र में जन्में लोग मानसिक बल और नेतृत्व के गुणों से युक्त होते हैं। घोड़े का मुख आरंभ का प्रतीक है। ऋषि-मुनि घोड़े के गुणों से अवगत थे। वे जानते थे कि घोड़ा गति और पराक्रम का प्रतीक है।  इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। कहा जाता है की जब इस सृष्टि का आरंभ नहीं हुआ था, तब चारों ओर मात्र शून्य था। इसी शून्य या  zeroness  को दर्शाने वाले केतु हैं। अश्विनी नक्षत्र के समान केतु भी हर कार्य का आरंभ करते हैं, वह भी गति के साथ। यही कारण है कि इनके हाथ में पकड़ी हुई ध्वजा इनकी गति और आरंभ को दर्शाती है। केतु को आध्यात्म से जुड़ा भी माना जाता है। ये एक सतोगुणी नक्षत्र है, ये चिकित्सा के माध्यम से रोगों को समाप्त करने, अंगों का पुनः निर्माण करने और यौवन देने की क्षमता रखते हैं। इनके यही गुण अश्विनी कुमारों में भी होते हैं। अश्विनी नक्षत्र के देवता अश्विनी कुमार हैं। अश्विनी कुमारों को देवों का चिकित्सक माना गया है।  इसलिए इस नक्षत्र में जन्मे जातक अच्छे डॉक्टर, सर्जन, मनो वैज्ञानिक,  होते है, अधिकतर अच्छे डॉक्टर्स की कुंडली में आप चंद्र, सूर्य या मंगल को अश्वनी नक्षत्र में पाएंगे

कैसा होता है अश्वनी नक्षत्र में जन्मे जातकों का स्वाभाव

यदि आप अश्विनी नक्षत्र के स्वभाव और कार्यशैली को जानना चाहते हैं, तो उसके चिह्न को अवश्य याद रखिए। इसका चिह्न अश्व है मतलब घोडा  । अब आप समझ गए होगें कि जिस प्रकार घोड़ा सीधा, सरल, तेज़ गति से भागने वाला और अपने गंतव्य स्थान में तुरंत पहुँचने को आतुर होता है, ऐसे ही अश्विनी नक्षत्र का स्वभाव और कार्यशैली भी होती है। अश्विनी नक्षत्र का यह स्वभाव उनके जातकों में भी देखने को मिलता है। वह अपनी ऊर्जा का अच्छे ये प्रयोग करते है, चाहे खेलकूल हो, एक्सरसाइज हो, कोई भी अड्वेंचर एक्टिविटी हो, ये लोग हमेशा आगे होते है, परन्तुं अश्वनी नक्षत्र की पहली और दूसरी पदा में ये सभी गुण ज्यादा एक्टिव मतलब सक्रीय होते है। अपने काम को पहले, तुरंत और कम-से-कम समय में करने के लिए ये जातक हमेशा आगे रहते हैं। वे सरल, सीधे, स्पष्टवादी, समय के महत्व को समझने वाले और कार्य को तुरंत समाप्त करने वाले होते हैं। उनमें कार्य को फुर्ती से करने की क्षमता होती है। वे मस्तिष्क में उठे विचार को तुरंत रूप देकर समाप्त करने में विश्वास रखते हैं। यही जल्दबाज़ी उनकी कार्यशैली को प्रभावित करती है, जिसके कारण उनके कार्य बीच में रूक जाते हैं। अश्विनी नक्षत्र चार पदों में विभाजित होता है। इनकी गणना हम एक पद, दो पद, तीन पद और चार पदों के रूप में करते हैं। यही कारण है कि अश्विनी नक्षत्र में जन्में जातकों के स्वभाव में भिन्नता देखी जा सकती है।

चुनौतियों का सामना पूरे साहस और निडरता से करना इनकी मुख्य विशेषता होती है। अनजान लोगों को अपना बना लेना इन्हें आता है। हर जोखिम को सहजता से उठा लेते हैं। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अश्विनी नक्षत्र में जन्मा जातक वृद्धावस्था में भी जोखिम उठाने से कतराता नहीं है। वे ऐसे कार्य सरलता से कर जाते हैं, जिस कार्य को करने के लिए युवा दस बार सोचें।  ये कार्य को आरंभ करने में तेज़ी दिखाते हैं, परन्तु उपयुक्त परिणाम न मिलने पर उसे बीच में ही छोड़ देते हैं। इसी वजह से इनकी कार्यशैली प्रभावित होती है और कार्य अधूरे रह जाते हैं। 

अश्वनी नक्षत्र में जन्मे जातक किस क्षेत्र में बना सकते है कॅरिअर

सबसे पहला है घोड़ों से संबंधी व्यवसाय। जैसे घुड़सवारी या जॉकी, घोड़ों का प्रशिक्षक, आदि अश्विनी नक्षत्रों के जातकों के लिए फलदायी है। दूसरा है, चिकित्सक या डॉक्टर, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े व्यवसाय, दवाइयों का निर्माण या इन्हें बेचने का व्यवसाय, अस्पताल के लिए बनने वाले उपकरणों से जुड़े व्यवसाय इत्यादि इनके लिए उत्तम व्यवसाय हैं। तीसरा है, खेलकूद से संबंधी व्यवसाय अर्थात ये खिलाड़ी के रूप में या प्रशिक्षक के रूप में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। चौथा है,  नृत्य, परिवहन इत्यादि व्यवसाय भी इनके लिए उत्तम हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त यदि ये जोखिम वाले कार्य, छोटे-मोटे व्यवसाय या आभूषण संबंधी व्यापार करें, तो भी इनके लिए फलदायी होते हैं। 

तो उम्मीद है की अब आपको अश्वनी नक्षत्र के बारें में काफी हद जानकारी हो गयी होगी।
आज हमने अश्वनी नक्षत्र के बारे में बताया है अन्य नक्षत्रों के संबंध में जानकारी आपको आगे के ब्लॉग में पढ़ने को मिलेगी।


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(Updated Date & Time :- 2020-04-01 21:26:38 )


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