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घर में गरुण पुराण रखना शुभ है या अशुभ

घर में गरुण पुराण रखना शुभ है या अशुभ

आज के समय में कुछ अल्प विद्वानों ने समाज में यह अंध विश्वास फैला दिया है कि गरुण पुराण को घर में रखना अशुभ माना जाता है परंतु यह किसी भी शास्त्र या फिर हमारे किसी भी हिन्दु पुराण में नही दिया है  कि गरुण पुराण को घर में नही रखना चाहिए। 
हिन्दू धर्म के अन्य पवित्र ग्रंथों के समान ही गरुण पुराण एक पवित्र ग्रंथ है, जो कि पूरी तरह से सिद्दांत के अनुसार ही कार्य करता है। कुछ लोगों में यह भ्रांत धारणा बनी है कि इस गरुण पुराण यानि कि प्रेत कल्प को घर में नही रखना चाहिए केवल श्राद्ध आदि प्रेत कार्यों में ही इसकी कथा सुनते है। 
यह गलत धारणा बहुत भ्रम पैदा करने वाली है और अन्ध विश्वास से भरी हुई है। क्योंकि इस ग्रंथ की महिमा में ही यह बात लिखी है कि जो मनुष्य इस गरुण पुराण सारोद्धार को सुनता है, चाहे जैसे भी इसका पाठ करता हो वह यमराज की भयंकर यातनाओं को तोडकर निष्पाप होकर स्वर्ग को प्राप्त करता है। 
यह ग्रंथ बड़ा ही पवित्र और पुण्य दायक है। गरुण पुराण सभी पापों का विनाशक और सुनने वाले की सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाला है। इसको सुनना बहुत ही लाभकारी एवं मोक्ष की प्राप्ति दिलाने वाला ग्रंथ है। 

हिन्दु धर्म में गरुण पुराण को लेकर लोगों ने यह मान्यता बना रखी है कि इस पुराण का पढ़ने या फिर घर में रखने से अशुभ घटनाएं घटती है। 
ऐसा माना जाता है कि यह पुराण जीवित व्यक्ति के लिए है ही नही। बल्कि यह पुराण जुडी हुई है, मृत्यु से। गरुण पुराण वह ग्रंथ है 
 जिसमें विष्णु जी के वाहन गरुण श्री हरि से प्रश्न पुछते है और हरि यानि कि स्वयं विष्णु उनके प्रश्नों का उत्तर देते हुए पक्षी राज की जिज्ञासा को शांत करते है अर्थात गरुण पुराण में जो भी लिखा है वह श्री हरि की वाणी है.
इसी वजह से इस पुराण को वैष्णव पुराण भी कहा जाता है। गरुण पुराण को अशुभ कहने का अर्थ है हरि की वाणी का तिरस्कार करना। गरुण पुराण हो या फिर अन्य कोई भी ग्रंथ, कोई भी धार्मिक लेख अशुभ कैसे हो सकता है। 
गरुण पुराण के अशुभ न होने का यह एक कारण तो है ही कि स्वयं विष्णु के द्वारा दिया गया ज्ञान है। इसके साथ-साथ जब हम इन सब मान्यताओं का सच खोजने के लिए गरुण पुराण का अध्ययन कर रहे थे तो हमें कुछ ऐसा प्रतीत हुआ कि जिस गरुण पुराण के अशुभ न होने का प्रमाण कहा जा सकता है। 

गरुण पुराण में लिखा हुआ है कि गरुण पुराण विद्या, यश और लक्ष्मी की प्राप्ति  व रोगों को दूर करने वाली और सौन्दर्य प्रदान करने वाली है। 
इस पुराण में यह भी लिखा है कि जो भी इंसान किसी भी समय इसका पाठ करता है उसे संपूर्ण ज्ञान की प्राप्ति होती है। गरुण पुराण के अनुसार यह भी कहा जाता है कि जो मनुष्य श्रद्धा पूर्वक ध्यान लगाकर इस पुराण का पाठ करता है और जो व्यक्ति गरुण पुराण को सम्मान और शुद्धता के साथ अपने घर में रखता है वह धर्मार्थी हो जाता है अर्थात धर्म को जानने वाला बनता है।
 जिस मनुष्य के हाथ में गरुण पुराण होती है, उसके हाथों में नीतियों का संग्रह होता है। जो प्राणी गरुण पुराण  का पाठ करता है व सुनता है  उसे भोग और मोक्ष दोनो की प्राप्ति होती है। 
गरुण पुराण में लिखा है कि यदि निःसंतान दंपत्ति विश्वास पूर्वक गरुण पुराण के पाठ को सुनते है तो उन्हे संतान की प्राप्त होती है। यानि की यह पुराण मृत्यु की ही नही बल्कि जन्म से भी जुड़ी है। गरुण पुराण में बताया गया है कि इसके पाठ से विद्यार्थियों को विद्या, विजय की इच्छा रखने वालों को विजय मिलती है व पापियों को पाप से मुक्ति प्राप्ति होती है। 

गरुण पुराण में पक्षी राज गरुण द्वारा कहा गया है कि यह गरुण पुराण धन्य है और सबका कल्याण करने वाली है। 
गरुण पुराण के अनुसार एक श्लोक का पाठ भी आकाल मृत्यु को टालने की  शाक्ति रखता है। इसके मात्र आधे श्लोक का पाठ करने से ही निश्चित दुष्ट शत्रु का नाश हो जाता है। गरुण पुराण के लिए जहां लोगों के मन में भय है लोग इसे पढने से डरते है तो वहीं पक्षी राज गरुण कहते है कि गरुण पुराण के समान दूसरी और कोई पुराण है ही नही जैसे देवों में जनार्दन श्रेष्ठ है वैसे पुराणों में गरुण पुराण श्रेष्ठ है।


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(Updated Date & Time :- 2020-04-04 14:39:04 )


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