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जानिए शहीद भगत सिंह और 14 फरवरी का खास संबंध ?

जानिए शहीद भगत सिंह और 14 फरवरी का खास संबंध ?

भारतीय इतिहास की जानकारी के अनुसार शहीद भगत सिंह जी का जन्म जन्म: 28 सितम्बर 1907 में पंजाब प्रांत के लायलपुर के बंगा नामक एक गाँव में हुआ था जो अब पाकिस्तान में है l कुछ लोगों ने इनके फांसी को लेकर देश और समाज में गलत अफवाह फैला की 14 फरवरी वैलेंटाइन डे यानी प्यार के दिन भारतीय स्वतंत्रता के लिए अंग्रेजों से लड़ने वाले क्रांतिकारी भगत सिंह, राजगूरू और सुखदेव को फांसी दी गई थी. उनका कहना है कि उनकी शहादत 23 मार्च 1931 को नहीं हुई.

शहीद भगत सिंह को फासी की सजा का ऐलान या फासी 14 फरवरी को दी गई थी, जबकि इतिहास की माने तो ये एक दम सारा-सर बेबुनियाद और गलत है l बहुत ही कम उम्र में भगत सिंह एक क्रांतिकारी के रूप में उभरकर सामने आए और लोगों में लोकप्रिय हो गए. भगत सिंह ने 8 अप्रैल 1929 को एसेंबली बम कांड को अंजाम दिया, जिसके बाद ही उन्होंने खुद को सरेंडर कर दिया और उसके बाद से ही उन पर और उनके अन्य साथियों पर मुकदमा चलने लगा. जेल में भगत सिंह ने करीब २ साल रहे।

इस दौरान वे लेख लिखकर अपने क्रान्तिकारी विचार व्यक्त करते रहे। जेल में रहते हुए उनका अध्ययन बराबर जारी रहा। उनके उस दौरान लिखे गये लेख व सगे सम्बन्धियों को लिखे गये पत्र आज भी उनके विचारों के दर्पण हैं। अपने लेखों में उन्होंने कई तरह से पूँजीपतियों को अपना शत्रु बताया है। उन्होंने लिखा कि मजदूरों का शोषण करने वाला चाहें एक भारतीय ही क्यों न हो, वह उनका शत्रु है। उन्होंने जेल में अंग्रेज़ी में एक लेख भी लिखा जिसका शीर्षक था मैं नास्तिक क्यों हूँ, जेल में भगत सिंह व उनके साथियों ने ६४ दिनों तक भूख हडताल की। उनके एक साथी यतीन्द्रनाथ दास ने तो भूख हड़ताल में अपने प्राण ही त्याग दिये थे।

क्या है 14 फरवरी का वास्तविक सच?

इतिहास की जानकारी के मुताबिक आपको बता दे की 14 फरवरी को पंडित मदन मोहन मालवीय जी के द्वारा भगत सिंह को एक विशेषाधिकार के तौर पर वायसराय से ( जो उस समय सजा का निर्धारण करते थे ) माफी का प्रस्ताव प्रस्तुत किया और अपील दायर की जिससे मानवता के आधार पर फांसी की सजा माफ हो जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ और यह अपील खरीज़ हो गयी l

इसके बाद 7 अक्तूबर, 1930 को अदालत के द्वारा निर्णय दिया, जिसमें भगत सिंह, सुखदेव तथा राजगुरु को फांसी की सजा सुनाई गई। और उनको 23 मार्च 1931 को शूली पर चढ़ा दिया गया l हम ऐसे भारतीय वीर सपूतो को शत-शत नमन करते है और लोगों से अपील भी करते है की शहीदों के इतिहास के साथ भ्रांति पैदा न करें l

नोट :- इस ब्लॉग में दी गयी जानकारी पूर्णतः भारतीय इतिहस के अनुरूप है l

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