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पुराणों के अनुसार क्या है भीम-शंकर ज्योतिर्लिंग का रहस्य

पुराणों के अनुसार क्या है भीम-शंकर ज्योतिर्लिंग का रहस्य

धार्मिक और पौराणिक दृष्टि से सृष्टि के आरंभ मे ब्रह्मा, विष्णु और महेश का योगदान सर्वाधिकरहा है। समस्त सिद्धियो को देने वाले महादेव कि आराधना सिर्फ मनुष्य और देवता ही नही अपितु वानर, दैत्य, गंदर्भ,असुर, तथा किन्नर भी करते है। शिव पुराण के कोटीरूद्र संहिता के अंतर्गत महादेव के 12 ज्योतिर्लिंगों के महत्व को बताया गया है। जो कि भारत के अलग-अलग राज्यो मे स्थित है।

इस लेख मे हम जानेंगे कि आखिर क्या है इन ज्योतिर्लिंगों के स्थापना कि कथा साथ ही क्यों है इसकी इतनी महत्ता। इस लेख के माध्यम से हम महाराष्ट्र के पुणे मे स्थित भीम-शंकर ज्योतिर्लिंग कि कथा को विधिपूर्वक बताने का प्रयास करेंगे।

कहाँ स्थित हैभिंमशंकर ज्योतिर्लिंग

भीम-शंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पुणे मे स्थित है। 3,250 फीट कि ऊंचाई पर स्थित यह शिवलिंग महादेव के 12 ज्योतिर्लिंगों मे शुमार है जो कि अत्यधिक मोटा होने के कारण मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। कहते है कि इसी जगह पर महादेव ने भीम नामक राक्षस का वध किया था जिस कारण इस ज्योतिर्लिंग का नामभीम-शंकरपड़ा।

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यह ज्योतिर्लिंग पश्चिमी घाट के सह्याद्रि नामक पर्वत पर स्थित है जहां से भीमा नदी का उद्गम होता हैजो कि आगे चलकर कृष्णा नदी मे मिल जाती है। इस ज्योतिर्लिंग के संदर्भ मे ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति प्रातः काल सूर्य उदय होने के उपरांत यहाँ आकर महादेव के 12 ज्योतिर्लिंगों के नामो का जप करता है उसे 7 जन्मो तक के पापो से मुक्ति मिल जाती हैऔर मोक्ष प्राप्ति के मार्ग उसके लिए स्वयं ही खुल जाते है।

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग कि पौराणिक कथा

शिवपुराण कि कोटीरूद्र संहिता के अंतर्गत इसका उल्लेख मिलता है और जो कथा इस ज्योतिर्लिंग के संदर्भ मे लिपिबद्ध है वह इस प्रकार से है।

प्राचीन काल मे भीम नाम का एक राक्षस हुआ करता था जो कि लंका नरेश रावण के भाई कुंभकर्ण का पुत्र था। परंतु उसका जन्म उसके पिता के मृत्यु के उपरांत हुआ था जिस कारण वह अपने पिता के संदर्भ मे कुछ नही जानता था। वह अपनी माता कर्कटी के साथ वन मे रहता था। युवावस्था आने पर उसने अपनी माँ कर्कटी से अपने पिता के मृत्यु का भेद जाना और राम के हाथो अपनी पिता कि हत्या का राज जानकार उसने भगवान राम (विष्णु) जी का वध करने का प्रण लिया। उसने पूरे 1000 वर्षो तक कठोर तपस्या कर सृजंनकर्ता ब्रह्मा को खुश किया और उनसे असीम शक्ति का वर प्राप्त किया।अब क्या था...उसने अपनी शक्तियों का प्रयोग कर समस्त मानव जाती के साथ-साथ देव लोक का भी सर्वनाश करना आरंभ कर दिया।यहाँ तक कि भीम ने श्री हरी को भी युद्ध मे परास्त कर दिया जिसके उपरांत शिव के परम भक्त राजा सुदक्षिण को युद्ध मे परास्त कर उन्हे वहीं करगार मे डाल दिया। जहां राजा सुदक्षिण ने भगवान शिव कि पार्थिव शिवलिंग कि स्थापना कर उनकी स्तुति करना आरंभ किया। उसी समय भीम वहाँ आया और अपनी तलवार से उस पार्थिव शिवलिंग को तोड़ने का प्रयास किया। तभी उस शिवलिंग से महादेव प्रकट हुए और महादेव ने अपनी पिनाक धनुष से राक्षस भीम कि तलवार के दो टुकड़े कर दिये तत्पश्चात महादेव ने अपनी हुंकार मात्र से राक्षस भीम का अंत कर दिया और स्वयं उसी जगह पर लिंग रूप मे विराजमान हो गए। इस स्थान पर राक्षस भीम के वध करने के कारण ही इसका नाम भीम-शंकर पड़ा।

इस लेख मे हमने महाराष्ट्र के पुणे मे स्थित भिंमशंकर ज्योतिर्लिंग कि कथा का सार विधिपूर्वक बताया है। अन्य ज्योतिर्लिंगों के स्थापना संबन्धित कथाएँ आगे के लेख मे पढ़ने को मिलेगी।


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(Updated Date & Time :- 2020-03-18 10:02:26 )


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