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क्या 30 साल बाद शनि का मकर राशि में प्रवेश ही है इस भयंकर महामारी का कारण

क्या 30 साल बाद शनि का मकर राशि में प्रवेश ही है इस भयंकर महामारी का कारण

ज्योतिष शास्त्र और itihaas के पन्नो को जब जब हम टटोलते है तो पाते है कि जब भी शनि  30 साल बाद  बली होकर अपने घर मकर राशि मे आते हैं तब तब ऐसे ही महाविनाश के पल दोहराया करते है.

165 ईसवी में जब शनि मकर में प्रविष्ट हुए थे, तब इतालवी प्रायद्वीप में चेचक के संक्रमण से पांच मिलियन लोगों की मौत हुई थी। 

साल 249 में जब शनि मकर में पहुंचा, तो कहा जाता है कि ‘प्लेग ऑफ साइप्रियन’ के प्रकोप से रोम में महीनों तक हर रोज औसतन 5,000 लोगों की मौत होती रही। 
1312 में जब शनि ने अपने घर में पग धरा, यूरोप से प्लेग ने वापसी की और इसके कहर से दुनिया भर में 7.5 करोड़ लोगों के मरने का अनुमान लगाया गया, जिसे ब्लैक डेथ कहा गया। प्लेग से 1344 से 1348 के बीच भूमध्य सागर और पश्चिमी यूरोप तक दो-तीन करोड़ यूरोपियों के मरने का अनुमान था, जो उनकी कुल जनसंख्या का एक तिहाई हिस्सा था। शनिदेव तब भी स्वराशि में ही थे। 

1666 का ग्रेट प्लेग ऑफ लंदन तब एक लाख लोगों की मौत का कारण बना था जो तब लंदन की 20 प्रतिशत आबादी थी. शनि तब भी अपनी राशि में लंगर डाले हुए थे।

19वीं सदी के मध्य में चीन से तीसरी वैश्विक महामारी ने सिर उठाया, जिससे केवल भारत में एक करोड़ लोगों की मौत हो गयी थी। 

1902 में अमेरिका के सैनफ्रांसिस्को से शुरू होकर वहां पहली बार प्लेग का कहर बरपा। तब भी शनि अपने ही घर में चलायमान थे। 

यहां तक कि गुजरात के सूरत में जब 1994 में प्लेग की आफत आयी, तब भी शनि अपनी ही राशि में थे।

इस समय शनि स्वयं की राशि मकर ने चक्रमण कर रहे हैं। जो अब की मारक महामारी का मुख्य कारक बन गयी, जिसे कोरोना वाइरस कहा जा रहा है। 15 मार्च को सूर्य का राशि परिवर्तन कुछ राहत देने में नाकाम साबित हुआ. मंगल अभी गुरु राशि धनु में चलायमान हैं। इसके साथ ही 22 मार्च 2020 को  मंगल शनि की राशि मकर में प्रवेश किया तब से यह चरण  मानव सभ्यता को और बेचैन किये जा रहा है।  इस स्थिति में शनि के संग युति करके इस महामारी को और भयंकर रूप देता जा रहा है ।
अब जहां तक बात है कि जाए  इसका असर कब तक रहेगा तो ज्योतिषी गणना के अनुसार  4 मई तक तो यह अपने सबसे उग्र रूप में स्थापित रहेगा. 
इसके बाद 18 जून तक इसके प्रभाव कुछ कुछ कम होने शुरू हो सकते हैं. 18 जून से 16 अगस्त तक इसके प्रभाव हमें  बहुत ही कम रूप में दिखाई देंगे और हम कह सकते हैं कि 16 अगस्त के बाद से फिर से वही जिंदगी शुरू होने के आसार दिखाई दे रहे हैं यह ग्रह गोचर और लाल किताब कि प्रमाणिकता के अनुसार बताया गया है. 
खैर अभी ये शनिदेव कितना तांडव मचाएंगे इसका जवाब तो भविष्य के गर्भ में ही छुपा हुआ है. ग्रह, नक्षत्र और ज्योतिषी से सम्बंधित तमाम जानकारियों के लिए हमसे जुड़े रहे.


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(Updated Date & Time :- 2020-04-07 09:55:28 )


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