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कैसे निर्धारित होती है हीरे की चमक और व्यक्ति की परख

कैसे निर्धारित होती है हीरे की चमक और व्यक्ति की परख

बहुत समय पहले की बात है जब एक गांव में एक व्यक्ति रहा करता था. वह अपने जीवन से अत्यधिक परेशान हो चुका था. उसे घर में ना कोई इज्जत देता ना उसकी बाहर कोई इज्जत थी. वह कोई काम नहीं करता था इसलिए उसने एक फैसला किया कि वह इस जिंदगी को  अलविदा कह देगा और उसने आत्महत्या करने का निर्णय लिया.
वह आत्महत्या करने जा ही रहा था तभी उसे रास्ते में गौतम बुद्ध मिले उसने गौतम से कहा कि हे बुद्ध मैं अपने जीवन से बहुत  परेशान हूं. मुझे इस दुनिया में कोई अपना नहीं समझता है.मैं ना ही कोई काम करता हूं. मुझे सब इस धरती पर एक बोझ के समान ही मानते हैं. इसलिए मैं चाहता हूं कि मैं इस जीवन को अलविदा कह दूं और आज मैंने आत्महत्या करने का निर्णय लिया है परंतु मैंने सुना है कि आप प्रत्येक व्यक्ति को मार्ग दिखाते हैं कृपया आप ही मुझे कोई मार्ग बताएं.
भगवान् बुद्ध थोड़ा देर सोचने के बाद उस व्यक्ति को एक पत्थर देते हुए कहते है कि बाजार में जाओ और इसकी सही कीमत पता करके आओ.
 परंतु ध्यान रहे कि इस पत्थर को तुम्हें बेचना नहीं है इतना सुनते ही व्यक्ति उस पत्थर को लेकर बाजार में उसकी कीमत पता करने के लिए निकल गया.
 रास्ते में जाते हुए उसे एक व्यक्ति मिला जो कि आप बेच रहा था. उसने इस व्यक्ति को पत्थर दिखाएं और कहा कि इसकी क्या कीमत होगी आम बेचने वाले ने उस पत्थर को देखा और उसकी चमक के हिसाब से उसने कहा कि इसके बदले में मैं तुम्हें 10 आम दे सकता हूं. 
इतना सुनकर वो व्यक्ति आगे बढ़ गया फिर वह व्यक्ति एक सब्जी वाले के पास जाता है और उससे उस   पत्थर का दाम पूछाता है इस पर सब्जी वाला कहता है कि मैं तुम्हें इसके बदले में एक बोरी आलू दे सकता हूं.
अब इस व्यक्ति को धीरे धीरे यकीन हो रहा था कि इस की चमक मे जरूर कोई ना कोई खास बात है इसी वजह से आम बेचने वाला इसके 10 आम दे रहा था जबकि सब्जी वाला उसे एक-एक बोरी आलू  देने को तैयार था.
तो अब वह व्यक्ति इस पत्थर को लेकर एक  जौहरी के पास जाता है. जोहरी इस पत्थर को देखकर तुरंत समझ जाता है कि यह कोई आम पत्थर नहीं है जबकि यह बहुमूल्य गोबी का पत्थर है  जो किस्मत वालों को ही मिलता है. इस पर  जौहरी उस व्यक्ति से कहता है कि मैं तुम्हें इस पत्थर के एक लाख स्वर्ण मुद्राएं देने को तैयार हूं. 
 पत्थर का मूल्य पता होते ही जैसे ही व्यक्ति दुकान से बाहर जाने लगा तभी जौहरी ने कहा कि रुको रुको मैं  इसके बदले में तुम्हे 50 लाख  स्वर्ण मुद्राएं देने को तैयार हूँ  कृपया तुम इसे मुझे दे दो. व्यक्ति अभी भी नहीं रुका वह कैसे ही वहां से भागना चाह रहा था परंतु फिर जोहरी ने कहा कि मैं इसके तुम्हें एक करोड़ स्वर्ण मुद्राएं देने को तैयार हूं यह  कोई आम पत्थर नहीं है तुम यह मुझे दे दो परंतु व्यक्ति यह पत्थर उसे नहीं दे सकता था और जैसे-तैसे उसने उस जौहरी से पीछा छुड़ाया और वापस बुद्ध की शरण में चला गया
 उसने यह सारी बातें भगवान बुद्ध को बताई तभी बुद्ध ने हंसते हुए कहा कि इस संसार में प्रत्येक व्यक्ति एक पत्थर के समान है. अन्य लोग उसे अपनी अपनी क्षमताओं के अनुसार उसका आंकलन करते हैं.  इस संसार में प्रत्येक व्यक्ति की कीमत है जो कोई व्यक्ति जितना अपने आप को तरासता है उसकी कीमत संसार में उतनी ही बढ़ती  जाती हैं. अर्थात कहने का आशय यह है कि तुम्हारा व्यक्तित्व अमूल्य हीरे के समान है परंतु अभी तक तुमने उसे पहचाना और तरासा  नहीं है. 
इसलिए हे पार्थ तुम जाओ और खुद को निखारो यह बात याद रखना कि तुम खुद को जितना तराशोगे  संसार में तुम्हारी कीमत उतनी ही ज्यादा बढ़ती जाएगी.


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(Updated Date & Time :- 2020-04-03 11:20:52 )


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