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कैसे लाएं जीवन में खुशहाली?

कैसे लाएं जीवन में खुशहाली?

गांव में एक व्यक्ति रहता था और उसके पास एक खेत था। वह उस खेत में अनाज उगाता था और किसी न किसी तरह से अपने परिवार का पालन पोषण करता था। उस इंसान ने बचपन से ही गरीबी देखी थी। उस इंसान के जो माता पिता थे वह भी बहुत ही गरीब थे। वह बचपन से ही गरीबी में रहता आया था, इसी गरीबी  के कारण वह धीरे-धीरे परेशान होने लगा था, क्योंकि उसके जो बच्चे थे वह भी धीरे-धीरे बडे हो रहे थे। उनके फीस के खर्चे, किताबों के खर्चे  बढ़ते ही जा रहे थे और इन सबके साथ-साथ घर का भी खर्च था। ऊपर से लगातर महगांई भी दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही थी।

वह अक्सर सोचता रहता था कि  आज के समय में जीवन जीना कितना कठिन हो गया है। हमारे जीवन में एक समस्या खत्म नही होती है कि दूसरी मुंह खोले द्वार पर खडी रहती है। ऐसे वह कभी-कभी ऐसा सोचता था कि मेरी पूरी जिन्दगी क्या ऐसी ही समस्यों को हल करने में निकल जायेगी, पर यह समस्या हल ही नही होती और इसी तरह यह समस्याएं चलती रहती थी। कुछ समय बाद उस गांव में एक साधु आएं तभी उसे पता चला ही वह संत बहुत ही पहुंचे हुए ज्ञानी साधु है और लोगों की समस्यों को क्षण भर में हल कर देते है। तभी उस  इंसान में मन में हुआ कि क्यों में भी उस साधु से मिल लू, और उसे अपनी परेशानी बताउं। तब वह साधु के पास जाकर अपनी परेशानियों को उनके सामाने रखा। तभी साधु उस व्यक्ति की बाते सुनकर हंसने लगे। तभी साधु ने कहा तुम मेरे साथ चलो, मै तुम्हे तुम्हारी परेशानियों का हल बता दुंगा तो उस इंसान ने कहा सही है। साधु उस व्यक्ति को नदी की तरफ ले गए और बोले की मै नदी के दूसरे किनारे पर जा कर तुम्हे परेशानियों का हल बता दूंगा और फिर तुम्हारी परेशानियाँ दूर हो जायेगी, इतना कहने के बाद साधु नदी के किनारे पर खड़े हो गए।

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साधु को नदी के किनारे खडे-खड़े काफी देर हो गये और वह इंसान सोचने लगा कि यह यहां पर इतनी देर से क्यों खडे है और यदि नदी के पार ही सभी समस्याओं का समाधान है तो क्या फिर हमें कोई लेने आ रहा है, या फिर साधु किसी का इंतजार कर रहे है। अंत में उस इंसान के सब्र का बांध टूट गया और उसने साधु से पूछ ही लिया कि महाराज हमें तो नदी पार करनी है तो हम अभी तक यहां क्यों खड़े हुए है। इस बात पर साधु ने जबाब देते हुए कि बेटा जो यह नदी का पानी है मै उसके सुखने के इंतजार कर रहा हूँ। जैसे ही पानी सुख जायेगा, हम आराम से नदी पार करेंगे और उस पार चलें जायेगे और फिर मै तुम्हे तुम्हारी सारी परेशानियो का हल बता दुंगा। इसके बाद वह व्यक्ति सोचने लगा कि महाराज कैसी मुर्खों के जैसी बातें कर रहे है। फिर भी वह अनायास ही
पूछ बैठा कि महाराज नदी का पानी कैसे सुख सकता है और आप यह कैसी मुर्खता पूर्ण बातें कर रहें है। नदी को पानी तो निरंतर बहता ही रहेगा, यह कभी सुखने वाला नही है।

साधु महाराज उस इंसान की बातें सुनकर हंसने लगे  और कहने लगे कि  बेटा मै तुम्हें यही समझना चाह रहा हूं कि जीवन नदी की तरह है और इस नदी का पानी समस्याओं की तरह है। जब तुम्हें पता है कि नदी का पानी नही सुखेगा तो तुम्हें खुद प्रयास करके नदी को पार करना होगा। ठीक उसी प्रकार जीवन में समस्याएं भी चलती रहेंगी। तुम्हें अपने प्रयासों से ही नदी को पार करना होगा मतलब इन परेशनियों का सामना तो करना ही पड़ेगा। तुम्हारें जीवन में जो भी कठिन परस्थितियां आएंगी तुम्हें उसका डटकर सामना करना ही होगा। यदि तुम नदी के किनारे बैठे रहोगे और नदी के पानी का सुखाने का इंतजार करते रहोगे तो तुम जीवन में कभी भी आगे नही बढ़ पाओंगे। अर्थात पानी तो बहता ही रहेगा और समस्याएं भी आती रहेगी परंतु आपको नदी की धार को चीरते हुएं आगे बढ़ना होगा यानि की हर समस्या को आगे बढ़कर खत्म करना है, तभी तुम जीवन में कुछ कर पाओगे। यह हर व्यक्ति के जीवन में खुशहाली का अर्थ है यदि आप अपनी समस्या खत्म करना जानते है तो इस संसार में आपसे सुखी दूसरा कोई व्यक्ति नही है।


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(Updated Date & Time :- 2020-02-29 11:43:25 )


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