Astroscience
वरुथानी एकादशी का महत्व एवं पूजन विधि

वरुथानी एकादशी का महत्व एवं पूजन विधि

वरुथिनी एकादशी         18 अप्रैल 2020, शनिवार 
पारण का समय              सुबह 05:51 से 08:26 बजे तक (19 अप्रैल)
पारण तिथि समाप्त         00:42 (20 अप्रैल)
एकादशी तिथि प्रारंभ      20:03 बजे (17 अप्रैल)
एकादशी तिथि समाप्त    22:17 बजे (18 अप्रैल)
 
हिन्दू धर्म मे एकादशी तिथि का अत्यंत महत्व है। पुराणो मे इसे हरिदिन या विष्णु वासर कि संज्ञा दी गयी है। एकादशी तिथि सम्पूर्ण रूप से भगवान विष्णु को समर्पित होती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार हर मास मे 2 एकादशी तिथि पड़ती है। जिसमे से एक शुक्ल पक्ष मे तथा एक कृष्ण पक्ष मे पड़ती है। कृष्ण पक्ष कि एकादशी पुर्णिमा के बाद जबकि शुक्ल पक्ष कि एकादशी अमावस्या के बाद पड़ती है। हिन्दू पंचांग मे अधिक मास है इसलिए इन एकदशियों कि संख्या बढ़ती- घटती रहती है। इस वर्ष 2020 मे वर्ष भर मे कुल 25 एकादशी व्रत पड़ेंगे। इस सभी एकादशियों में वैसाख माह में पड़ने वाली वरुथिनी एकादशी का खास महत्व  है। कहते है कि आज के दिन की गयी भगवान् विष्णु की पूजा व्यक्ति को मनोवांछित फल देती है।
वरुथिनी एकादशी का महत्व
हिन्दू धर्म मे आस्था रखने वाले बहुत से लोगो के लिए इन एकदशियों का बहुत महत्व है। कुछ हिन्दू धर्मावलम्बी हर एकादशी पर व्रत धारण करते है तथा विधि विधान से पूजा पाठ कर ईश्वर कि उपासना करते है। इस वर्ष वरुथिनी एकादशी व्रत 18 अप्रैल (वैसाख माह )अर्थात आज के दिन मनाई जाएगी। 
ववरुथिनी एकादशी पूजन विधि
आज के दिन श्री हरि अर्थात भगवान् विष्णु जी के वराह अवतार की पूजा का विधान है। 
एकादशी से एक दिन पूर्व ही व्यक्ति को व्रत के नियमो का पालन करना चाहिए । अर्थात दशमी के दिन ही सिर्फ एक समय भोजन करना चाहिए और वो भी सात्विक।
आज के दिन ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें। 
एकादशी का व्रत रखने वालों को इस दिन खासकर, पान खाने से, दातून करने से, किसी की बुराई करने से, किसी से जलन की भावना रखने से, झूठ बोलने से, गुस्सा करने से खुद को बचाना चाहिए। 
 
आज के दिन अर्थात एकादशी के अवसर पर प्रातः काल उठकर स्नान ध्यान के बाद व्रत का संकल्प लें। 
इसके बाद भगवान् विष्णु के वराह अवतार की पूजा करें। 
आज के दिन भगवान् विष्णु को दूध की बनी मिठाई जैसे बर्फी का भोग अवश्य लगाएं। इनके अलावा फलों में आम या खरबूजे का भी भोग लगाया जाता है।
पूजा में ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करें। 
सच्चे मन से पूजा करनी और कथा सुननी चाहिए।
तो इस लेख में हमने वरुथिनी एकादशी के महत्वो और पूजन विधि के बारे में बताया इसी प्रकार के धर्म, आध्यात्म और  ज्योतिष से सम्बंधित अन्य लेखों को पढ़ने के लिए हमसे जुड़े रहें । और अगर आप किसी अन्य विषयों के बारे में (जैसे अध्यात्म से जुडी कथा, कहानी ) जानना चाहते है तो नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करें। हमारी पूरी कोशिश होगी की हम आपको आध्यात्म से जुड़े प्रत्येक कहानियों से अवगत कराएं।

यह भी पढ़ें - शिव पुराण के अनसुने रहस्य

(Updated Date & Time :- 2020-04-18 10:50:20 )


Gd Vashisht Enquiry

Comments

speak to our expert !

Positive results come with right communication and with decades of experience. Try for yourself about our experts by calling one of them
to feel the delight about understanding your problems, and in getting the best solution and remedies.

Astroscience