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जया एकादशी पर कैसे करे भगवान विष्णु की आराधना

जया एकादशी पर कैसे करे भगवान विष्णु की आराधना

जया एकादशी – 5 फरवरी 2020

दिन - बुधवार

एकादशी तिथि का प्रारम्भ – 4 फरवरी रात्री 9 बज के 49 मिनट से

एकादशी तिथि का समापन – 5 फरवरी रात्री 9 बज के 30 मिनट पर

हिन्दू धर्म मे एकादशी व्रत का अत्यधिक धार्मिक महत्व है। हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष भर मे कुल 24 एकादशी पड़ती है। अर्थात हर माह मे दो। जिसमे से एक शुक्ल पक्ष मे तथा एक कृष्ण पक्ष मे पड़ती है। हिन्दू पंचांग मे मल मास पड़ने के कारण एकादशी की संख्या मे परिवर्तन संभव है। ये किसी वर्ष 24 तो कभी 26 तक पहुँच जाती है। इस वर्ष 2020 मे कुल 25 एकादशी व्रत पड़ेंगे। एकादशी व्रत पूर्ण रूप से भगवान विष्णु को समर्पित होता है, परंतु जया एकादशी मे भगवान विष्णु के साथ शिव की भी आराधना की जाती है। इस दिन नारायण की आराधना कर मोक्ष प्राप्ति के मार्ग प्रशस्तहोते है। माघ मास के शुक्ल पक्ष मे पड़ने वाली जया एकादशी या भौमि एकादशी का अपना विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है की आज के दिन व्रत साधना से प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है और स्वर्ग का मार्ग खुल जाता है।

शुभ मुहूर्त एवं पूजन विधि

एकादशी व्रत के एक दिन पहले अर्थात 4 फरवरी को ही रात के समय अल्प आहार ले और कोशिश करे की ज्यादा किसी से बात न करे। एकादशी वाले दिन व्रत धारण करे और भगवान विष्णु की आराधना करे। नारायण भगवान को भोग लगाए और उसमे तुलसी के पत्ते अवश्य डाले परंतु एकादशी वाले दिन तुलसी के पत्ते न तोड़े। एकादशी वाले दिन चावल न बनाए और न ही परिवार के सदस्यो को खिलाएँ। श्री हरी की आरती के बाद पूरे घर मे आरती फेरे। अगले दिन पारन करने से पहले मंदिर जाकर अपनी इच्छानुसार दान पुण्य करे। इस वर्ष 2020 मे एकादशी तिथि 4 फरवरी रात्री 9 बज के 49 मिनट से प्रारम्भ होकर अगले दिन दिनांक 5 फरवरी रात्री 9 बज के 30 मिनट पर समाप्त हो रही है। यह बेला पूजा ,व्रत और प्रभु नारायण की भक्ति की दृष्टि से सर्वोत्तम है।

कौन सी कथा प्रचलित है

महाभारत के अनुसार महाराज युधिष्ठिर ने भगवान श्री कृष्ण से माघ मास मे पड़ने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी का अर्थ जानने की इच्छा प्रकट की थी युधिष्ठिर ने भगवान श्री कृष्ण से पूछा की ..........................................

हे सुदर्शन चक्रधारी! आपने माघ मास के कृष्ण पक्ष मे पड़ने वाली षटतिला एकादशी का तो सम्पूर्ण वर्णन किया है। परंतु माघ मास की शुक्ल पक्ष मे पड़ने वाली एकादशी से हम सब को अनभिज्ञ रखा है।इसलिए हे नाथ कृपया आप इस व्रत के महत्व को समझाएँ।

इस पर श्री कृष्ण ने उत्तर दिया की माघ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी के रूप मे मनाया जाता है। इस दिन व्रत धारण कर देवो की उपासना करने से भूत-प्रेत (पिशाच) जैसी योनियो मे जन्म से मुक्ति मिलती है। और स्वर्ग का द्वार खुल जाता है। अर्थात आज के दिन देवो की आराधना मात्र से मोक्ष प्राप्ति के मार्ग प्रशस्तहो जाते है।

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भगवान श्री कृष्ण कहते है की.........‘एक बार नन्दन वंश मे एक उत्सव का आयोजन किया गया था । जिसमे संत महात्मा तथा स्वर्ग से ईश्वर तक पधारे हुए थे। इस आयोजन मे कन्याएँ गंधर्व गीतो पर नृत्य कर रही थी। इसी दौरान पुष्पवती नामक एक गंधर्व कन्या की दृष्टि अनुपम गीत गा रहे माल्यवान नामक पुरुष पर पड़ी। और वो उस पर मोहित हो उठी। पुष्पवती अपना सुध-बुध खो कर विभिन्न दिशाओ मे नृत्य करने लगी। इन भाव-भंगिमाओ को देख माल्यवान अपना राग खो बैठे और दोनों अपने ही गीतो मे भाव विभोर होते गए। ये दृश्य देख इंद्रक्रोधित हो उठे और उन्होने इसे स्वयं का अपमान समझा और दोनों प्रेमी जोड़े को पृथ्वी पर प्रेत योनि मे जन्म लेकर पाप भोगने का श्राप दे दिया। इस श्राप के कारण माल्यवान और पुष्पवती को हिमालय पर एक वृक्ष पर प्रेत योनि प्राप्त हुई।जहां उनका जीवन अत्यंत पीड़ादायक बितने लगा। उनके दिन नही कट रहे थे। वे रातो को सोते नही थे। भूके प्यासे बस फलो को खाकर अपना दिन व्यतित कर रहे थे। मानो एक एक दिन कई जन्मो के समान हो गया था। धीरे धीरे दिन बीत रहा था। तभी माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि आई। इस दिन भी अनजाने मे ही दोनों जोड़े ने सिर्फ फलो को खाकर पूरी रात जागते हुए बिताई । प्रातः दोनों की मृत्यु हो गयी और उन्हे प्रेत योनि से छुटकारा मिला और सीधे स्वर्ग की प्राप्ति हुई। स्वर्ग मे इस अनुपम जोड़े को देख इंद्र ने उनसे श्राप मुक्ति का कारण जानने की इच्छा जताई । तो उन्होने बताया की “माघ मास के शुक्ल पक्ष मे पड़ने वाली जया एकादशी के दिन हम दोनों ने फलहरी भोजन किया तत्पश्चात पूरी रात जागरण कर भगवान विष्णु की आराधना की जिससे हमे प्रेत योनि से मुक्ति मिली “

देवराज इंद्र ये रहस्य जानकर अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होने कहा आप तो स्वयं नारायण के भक्त है। आपका स्वर्ग मे आगमन हम स्वीकार करते है। और आप अब यहाँ सुख पूर्वक रह सकते है।


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(Updated Date & Time :- 2020-02-07 17:12:40 )


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