Astroscience
केदारनाथ (केदारेश्वर) ज्योतिर्लिंग का रहस्य

केदारनाथ (केदारेश्वर) ज्योतिर्लिंग का रहस्य

धार्मिक और पौराणिक दृष्टि से सृष्टि के आरंभ मे ब्रह्मा, विष्णु और महेश का योगदान सर्वाधिक है। समस्त सिद्धियो को देने वाले महादेव कि आराधना सिर्फ मनुष्य और देवता ही नही अपितु वानर, दैत्य, असुर, तथा किन्नर भी करते है। शिव पुराण के अंतर्गत महादेव के 12 ज्योतिर्लिंगों के महत्व को बताया गया है। जो कि भारत के अलग-अलग राज्यो मे स्थित है। इस लेख मे हम जानेंगे कि आखिर क्या है इन ज्योतिर्लिंगों के स्थापना कि कथा साथ ही क्यों है इसकी इतनी महत्ता। इस लेख के माध्यम से उत्तराखंड मे स्थिति केदारेश्वर (केदारनाथ) ज्योतिर्लिंग कि कथा को विधिपूर्वक बताने का प्रयास करेंगे।

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग भारत के उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले मे स्थित है। हिमालय कि गोद मे स्थित यह मंदिर महादेव के बारह ज्योतिर्लिंगों मे शुमार होने के साथ-साथ चार धाम और पंच केदार मे भी सम्मिलित है। प्राचीन ग्रंथो और पुराणो मे जो कथा इसके संदर्भ मे प्रचलित है वो इस प्रकार से है।

कहते है की ब्रह्मा जी के पुत्र धर्म और उनकी भार्या मूर्ति ने नर और नारायण नामक दो पुत्रो को जन्म दिया था। जो कि द्वापर युग मे अर्जुन और कृष्ण के रूप मे अवतरित हुए थे। और धर्म की स्थापना के लिए ही जन्मे थे। इस बात का उल्लेख स्वयं श्री कृष्ण ने भगवत गीता के चौथे अध्याय के पांचवें श्लोक मे किया है।

धर्म और मूर्ति के ये दोनों बालक हिमालय मे स्थित बद्रीवन मे अपने द्वाराबनाए गए पार्थिव शिवलिंग की रोजाना घोर तपस्या करते थे। उनकी तपस्या को देख महादेव अत्यंत प्रसन्न थे और रोजाना उनके द्वारा बनाए गए पार्थिव शिवलिंग मे विराजमान हो जाया करते थे। बहुत समय बीत जाने के बाद महादेव ने स्वयं उन भाइयो के समक्ष प्रकट होकर उन्हे अपने दिव्य दर्शन दिये। इनकी भक्ति से अवीभूत होकर भोलेनाथ मे इनसे उत्तम वर मांगने को कहा। जिसपे इन दोनों भाइयों ने कहा की हे महादेव....! आप तीनों लोको के स्वामी है आप समस्त मानव कल्याण हेतु इसी जगह पर विराजमान हो जाये जिससे कि यहाँ आने वाले लोगो को आपके दिव्य दर्शन आसानी से प्राप्त हो जाये।“

यह भी पढ़ें - पुराणों के अनुसार क्या है मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का रहस्य

अपने भक्तो की भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव वहीं केदारनाथ मे लिंग रूप मे स्थापित हो गए। कहते है की इन दोनों भाइयों ने हिमालय के बद्रीवन मे स्थित केदार तीर्थ पर यह तपस्या की थी जिसके कारण यह पवित्र स्थान केदारेश्वर या केदारनाथ के नाम से प्रख्यात हुआ। इसी स्थान परबद्रीनाथ मंदिर भी है साथ ही नर और नारायण नाम के दो पर्वत भी वीराजमान है।

कहते है कि जो भी श्रद्धालु ईश्वर कि भक्ति मे लीन होकर इन चारो धामो कि यात्रा पूर्ण कर लेता है उसके मोक्ष प्राप्ति का मार्ग स्वयं ही खुल जाता है।

इस लेख मे हमने केदारनाथ (केदारेश्वर) ज्योतिर्लिंग कि कथा का सार विधिपूर्वक बताया है। अन्य ज्योतिर्लिंगों के स्थापना संबन्धित कथाएँ आगे के लेख मे पढ़ने को मिलेगी।


यह भी पढ़ें - होलाष्टक में क्यों वर्जित होता है शुभ कार्य

(Updated Date & Time :- 2020-03-13 11:24:14 )


Gd Vashisht Enquiry

Comments

speak to our expert !

Positive results come with right communication and with decades of experience. Try for yourself about our experts by calling one of them
to feel the delight about understanding your problems, and in getting the best solution and remedies.

Astroscience