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बापू की जन्म जयंती पर जानें, उनके जीवन से जुड़े कुछ खास किस्से

बापू की जन्म जयंती पर जानें, उनके जीवन से जुड़े कुछ खास किस्से

महात्माँ गांधी का नाम लेते ही हमारे मन में सत्य, अहिंसा और सादगी के भाव अनायास ही आ जाते है। महात्माँ गांधी एक व्यक्ति नही बल्कि विचार है, जीवन जीने का उद्देश्य है, जीवन में सही राह पर चलने का मार्ग है। बापू ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सत्यव्रत का पालन कर शांतिपूर्ण तरीके से भारत को आजादी दिलाने में जो भूमिका निभाई है, उसे भारतवर्ष सदैव याद रखेगा। गांधी जी का जन्म गुजरात के पोरबंदर नामक शहर में 2 अक्टूबर सन् 1869 को हुआ था। बापू का पूरा नाम मोहनदास करमचन्द गांधी और इनके पिता का नाम करमचन्द गांधी था। बापू की माँ का नाम पुतलीबाई था। गांधी जी का विवाह बहुत ही कम उम्र में कस्तूरबा बाई से कर दिया गया था । लोग स्न्हे से बापू की पत्नी को बा कहकर पुकारते थे। बापू के जीवन से जुड़े बहुत सारे किस्से और कहानी है। आज हम उनके जन्म दिन पर जानेगे उनके जीवन के पहलुओं से जुड़े कुछ खास किस्से।

1. समस्या का तुरंत समाधान बापू के जीवन का हिस्सा रहा है

बात 1946 की है, जब बापू गांधी जी मार्ग के पास स्थित वाल्मीकि कॉलोनी में आए थे और वहां पर करीबन 6-7 महीने के लगभग रहे थे । कुछ दिन इस कॉलोनी में रहने से उन्हे पता चला कि वहाँ पर रहने वाले लोग कम पढें-लिखे है, यह जानकर बापू को बहुत हैरानी हुई। उन्होंने उनलोगों से कहा कि अपने बच्चों को भेजो, मैं पढ़ाऊंगा। जब बापू ने पढ़ाना शुरू किया तो गोल मार्केट, पहाड़गंज, इरविन रोड और आसपास के इलाकों के बच्चे भी आने लगे। बच्चों की संख्या बढ़ती रही। बापू ने करीब 30 छात्रों से शुरुआत की जो शीघ्र ही बढ़कर 75 तक पहुंच गई। अब भी वाल्मीकि मंदिर के अंदर बापू का एक कमरा है। उस कमरे में लकड़ी की एक मेज है जिसका वह इस्तेमाल करते थे। वहां बापू का छोटा सा चरखा भी है। तो ऐसी गुणी और महान प्रतिभा थी हमारे बापू के अंदर जो लाखों-करोडों में भी नही मिलती है।

2. बापू के जीवन से जुड़ी एक सत्य घटना -

इस घटना से बापू इतना ज्यादा प्रभावित हो गये थे, कि उन्होने जीवन में कभी भी झूठ न बोलने का संकल्प तक ले लिया था। एक बार बापू के बड़े भाई कर्ज में फंस गये थे। अपने भाई को कर्ज से मुक्त कराने के लिए बापू ने अपना सोने का कड़ा बेंच दिया और उसके पैसे अपने भाई को दे दिए। मार-खाने के डर से बापू ने अपने माता-पिता से झूठ बोला कि कड़ा कही गिर गया है। किन्तु झूठ बोलने के कारण बापू का मन स्थिर नहीं हो पा रहा था। उन्हें अपनी गलती का अहसास हो रहा था और उनकी आत्मा उन्हें बार – बार यह बोल रही थी की झूठ नहीं बोलना चाहिए। बापू ने अपना अपराध स्वीकार किया और उन्होंने सारी बात एक कागज में लिखकर पिताजी को बता दी। बापू ने सोचा की जब पिता जी को मेरे इस अपराध की जानकारी होगी तो वह उन्हें बहुत पीटेंगे। लेकिन पिता ने ऐसा कुछ भी नहीं किया। वह बैठ गये और उनके आँखों से आंसू आ गये। बापू को इस बात से बहुत चोट लगी। उन्होंने महसूस किया की प्यार हिंसा से ज्यादा असरदार दंड दे सकता है। बापू के जीवन की इस घटना से हमें भी सीखना चाहिए कि जीवन में झूठ न बोले।  बापू ने अपनी इस छोटी से उम्र में झूठ न बोलने की शिक्षा ग्रहण कर ली थी। ऐसी ही आवाज हमारे अन्दर भी आती है जब हम किसी से झूठ बोलते है किन्तु हम उस आवाज पर विश्वास नहीं करते और इसे नजरंदाज करके हम सबसे बड़ी गलती कर देते है। हमें अपने जीवन में कभी भी झूठ नहीं बोलना चाहिए क्योंकि झूठ का कोई वजूद नहीं है और इससे हम किसी और को नहीं बल्कि खुद को ही धोखा देते है।


(Updated Date & Time :- 2019-10-17 17:18:01 )


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