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श्री कृष्ण ने क्यों कहा कर्ण को दानवीर कर्ण

श्री कृष्ण ने क्यों कहा कर्ण को दानवीर कर्ण

महाभारत का युद्ध भले ही कर्ण ने अधर्मी कौरवों के तरफ़ से लड़ा परंतु मन, विचार और एक शासक की दृष्टि से उसका ह्रदय उस पवित्र गंगा के सामान था जिसकी अविरल धारा से संपूर्ण पृथ्वी सिंचित होती है।

एक बार भरी सभा में श्री कृष्ण ने कर्ण के दानवीर होने की प्रशंसा की जिससे की उसी सभा में उपस्थित अर्जुन के माथे पर चिंता की लकीरें  खींच गयी और वह वहां से चले गए। तभी श्री कृष्ण ने यह निश्चय किया कि वो अर्जुन को कर्ण के दानवीर होने का प्रमाण देंगे।

एक बार की बात है जब एक ब्राह्मण की पत्नी की असमय मृत्यु हो गयी जिससे की वह निर्धन ब्राह्मण अश्रु भरे नैनो के साथ अर्जुन के राज महल में गया और वहां उस निर्धन ब्राह्मण ने राजा को बताया कि उसकी पत्नी की अंतिम इच्छा यह थी की उसका दाह संस्कार चन्दन की लकड़ियों से किया जाए। अर्जुन ने तुरंत ही अपने कोषाध्यक्षो  से यह आग्रह किया किे इस निर्धन ब्राह्मण को  अपनी पत्नी के दाह संस्कार हेतु चन्दन की  लकड़ी दान में दे दी जाए। परंतु उस दिन राजमहल सहित पूरे बाज़ार से चन्दन की लकड़ी नदारद थी। जिस वजह से उस ब्राह्मण को खाली हाथ ही अर्जुन के दरबार से जाना पड़ा।

फिर वह ब्राह्मण राजा कर्ण के दरबार में पहुंचा और उन्हें अपनी व्यथा सुना कर उनसे भी वहीँं आग्रह किया।

राजा कर्ण को भी उसके कोषाध्यक्षो  ने चन्दन की लकड़ी मिल पाने में असमर्थता जताई परंतु राजा कर्ण ने कहा की हमारे महल का यह खंभा चन्दन की लकड़ियों से बना है जिसे निकलवाकर इस ब्राह्मण को दान में दे दिया जाए।

राजा के मुख से यह वचन सुन वह निर्धन ब्राह्मण अत्यन्त हर्षित हो उठा और उस खंभे की लकड़ी से अपनी पत्नी की अंतिम इच्छा की पूर्ति  करने के लिए चला गया।

शाम को जब अर्जुन और श्री कृष्ण उसी मार्ग से गुज़र रहे थे तो उन दोनों ने उस ब्राह्मण को शमशान में यज्ञ करते देखा और अपनी जिज्ञासा को शांत करने के लिए उस ब्राह्मण से चन्दन की लकड़ी मिलने का भेद पूछा तो ब्राह्मण ने उत्तर दिया की यह लकड़ी मुझे राजा कर्ण ने  अपने महल के खंभों को निकलवाकर दिया है। वह अत्यंत दानी है। भगवान् ऐसे राजा हर प्रजा को दें।

उस ब्राह्मण के मुख से यह कथन सुन कर अर्जुन लज्जित हो गए। और श्री कृष्ण के कहे गए वचन दानवीर कर्ण को मानाने पर विवश हो गए।


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(Updated Date & Time :- 2020-03-19 17:16:41 )


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