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कुंभ संक्रांति के दिन स्नान और दान से प्रसन्न होंगे सूर्यदेव

कुंभ संक्रांति के दिन स्नान और दान से प्रसन्न होंगे सूर्यदेव

कुम्भ संक्रांति – 13 फरवरी

दिन – बृहस्पतिवार

शुभ मुहूर्त – प्रातः 7 बज के 5 मिनट से 9 बज के 3 मिनट तक (1 घंटा 58 मिनट)

महापुण्य मुहूर्त – प्रातः 8 बज के 39 मिनट से 9 बज के 3 मिनट तक (23 मिनट)

कुम्भ संक्रांति

ज्योतिष शास्त्र मे सूर्य का स्थान सभी राशियो मे सर्वोत्तम माना गया है। सूर्य की उत्तरायन और दक्षिणायन की  स्थिति द्वारा ही जलवायु और ऋतुओ मे परिवर्तन संभव हो पता है। सूर्य की स्थिति अथवा राशि परिवर्तन ही संक्रांति कहलाती है। हिन्दू धर्म मे संक्रांति का अत्यंत महत्व है। संक्रांति के दिन स्नान का और विशेष कर गंगा स्नान का अत्यंत महत्व है। कहते है की संक्रांति के दिन स्नान मात्र से जातक को ब्रह्म लोक की प्राप्ति होती है। देवी पुराण मे यहाँ तक कहा गया है की संक्रांति के दिन जो स्नान नही करता दरिद्रता उसे कई जन्मो तक घेरे रहती है। संक्रांति के दिन दान-पुण्य की परंपरा सदियो से चली आ रही है।

कुंभ​ संक्रांति का अर्थ

ज्योतिषी के अनुसार सूर्य गतिमान है। और ये एक रैखिक पथ पर गति कर रहा है। सूर्य की इसी गति के कारण ये अपना स्थान परिवर्तन करते रहते है। साथ ही विभिन्न राशियो मे गोचर होते रहते है। सूर्य किसी भी राशि मे एक माह का समय व्यतीत कर दूसरी राशि मे प्रवेश कर जाते है। जिसे हिन्दू पंचांग और ज्योतिष शास्त्र मे संक्रांति की संज्ञा दी गयी है। हिन्दू धर्म मे मकर संक्रांति का अत्यंत महत्व है।क्योंकि इसी दिन से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायन मे प्रवेश करता है। इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति के अगले माह मे सूर्य मकर राशि से कुंभ मे प्रवेश कर जाते है जिसे कुंभ संक्रांति की संज्ञा दी गयी है।

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कुंभ संक्रांति का महत्व

हिन्दू धर्म मे पुर्णिमा अमावस्या और एकादशी तिथि का जितना महत्व है उतना ही महत्व संक्रांति तिथि का भी है। संक्रांति के दिन स्नान ध्यान और दान –पुण्य से देव लोक की प्राप्ति होती है। कुंभ संक्रांति के दिन प्रातः उठ कर स्नान करे और स्नान के पानी मे तिल जरूर डाल दे। स्नान के बादसूर्य देव को अर्घ्य दे तत्पश्चात मंदिर जाकर दान पुण्य करे ।अपनी इच्छा से ब्राह्मणो को भोजन कराए बिना तेल घी के तिल और गुड़ से बनी चीजे ही खाए।

नोट – सूर्य की स्थिति विशेष और राशियों मे गोचर होने से आपके जीवन मे भी नकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकते है। सूर्य की बुरी स्थिति जातक के पिता के स्वास्थ्य पर नकारात्मक परिवर्तन भी डाल सकता है। यदि आपके कुंडली मे भी सूर्य बुरी स्थिति मे विराजमान है तो सूर्य के उपाय के लिए हमारे ज्योतिष संस्थान से संपर्क करे।


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(Updated Date & Time :- 2020-02-11 09:55:53 )


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