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लाल किताब के उपाय कैसे बनाएँगे आपको निरोग

लाल किताब के उपाय कैसे बनाएँगे आपको निरोग

आरोग्यम्परमं सुखम्।“

(अर्थात व्यक्ति का स्वस्थ्य होंना ही जीवन का उत्तम सुख है)

इंसान का सेहतमंद होना न सिर्फ शारीरिक तौर पर अपितु मानसिक स्वास्थ्य भी इसमे उतना ही महत्वपूर्ण है। कई बार हमे देखने को मिलता है की कोई व्यक्ति बाहर से तो हिष्ट-पुष्ट नज़र आता है परंतु बहुत सी परेशानियाँ उसे अंदर ही अंदर घेरे रहती है जैस चिंता, तनाव इत्यादि जो आगे चल कर बहुत सी बड़ी बीमारियों को जन्म देती है। अगर ज्योतिष शास्त्र के नज़रिये से देखे तो व्यक्ति के स्वास्थ्य पर कहीं न कहीं ग्रहो और नक्षत्रो का प्रभाव व्यापक रूप से पड़ता है जो कि इंसान को बीमार, बहुत बीमार बनाने के लिए जिम्मेदार होता है। परंतु जैसे कि हम हमेशा से ही बताते आए है कि ज्योतिष विज्ञान सिर्फ कारणो को ही नही बताता अपितु समस्या के निवारण हेतु उपायो को बताना भी इसका उतना ही कर्तव्य है। वैदिक ज्योतिष के ये उपाय लाल किताब मे वर्णित है जो कि व्यक्ति को स्वास्थ्य और सुखमय जीवन का मूल मंत्र देते है। अतः सामान्य तौर पर हम कह सकते है कि लाल किताब व्यक्ति को सम्पूर्ण जीवन मे आरोग्यता का वरदान देती है।

कुंडली के अंदर कौन से योग बनाते है व्यक्ति को बीमार

आम तौर पर जब भी हम किसी बीमार व्यक्ति कि कुंडली देखते है तो ऐसे दो योग हमे निश्चित तौर पर देखने को मिलते है जो कि उसकी सेहत को खराब करने के लिए जिम्मेदार होते है।

सबसे पहला योग है कुंडली के भीतर मंगल यदि बुद्ध के साथ विराजमान है तो यह दाँतो से, नसो से, ज़ुबान या गले से संबन्धित रोगो को उत्पन्न करता है। इन सभी के साथ समस्या तब बढ़ जाती है जब मंगल और बुद्ध कि बुरी दशा व्यक्ति को मानसिक तौर पर भी अक्षम कर देती है।

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इसके अलावा मंगल कि शुक्र के साथ बुरी संगति गुप्तांगो से संबन्धित समस्याओ को जन्म देती है। और कमर यापाव से संबन्धित दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

अगर मंगल केतू के साथ बुरी स्थिति मे विराजमान है तो रीढ़ कि हड्डी से संबन्धित रोग उत्पन्न होते है इसके साथ ही पाव मे लंगड़ापन देखने को मिलता है।  अब मुख्य तौर पर बात करे तो हमारे शरीर मे तीन चीज़ों कि प्रधानता है जो कि जल,हड्डी और नस है। अगर मंगल कि खराब स्थिति किसी भी ग्रह के साथ होती है तो ये हमारे शरीर के अंदर खून या प्रतिरक्षा तंत्र से संबन्धित बीमारियों का जन्म देता है।

बीमारियों को दूर रखने वाले लाल किताब चमत्कारिक के उपाय

जीवन मे रोग मुक्त और स्वस्थ्य रहने के लिए सदियों से चली आ रही परंपरा का अनुशरण करना हमारे लिए आवश्यक हो गया है। क्योंकि जो मंत्र हमारे वैदिक शास्त्रो और ज्योतिष मे वर्णित है वह कहीं न कहीं सदियो से जाँची और परखी हुई है। परंतु आज मनुष्य इस आरामदायक जीवम पर इतना ज्यादा  आश्रित हो गया कि उसे इनकी आवश्यकता ही नही रह गयी है। जैसे कि वेदो मे भी बताया गया है कि घर मे बीमारियाँ कहाँ से आती है। घर मे बीमारियों का आगमन बाहर से आए लोगो द्वारा चप्पले और जूतो से भी होता है जिसे हम नज़रअंदाज़ करते रहे है। इसीलिए पुराने समय मे घर के भीतर जूतो और चप्पलों का प्रवेश वर्जित था। इसी के साथ भोजन रसोई घर मे बैठ कर ग्रहण करना भी उतना ही जरूरी था क्योंकि पूरे घर मे रसोई ही एकमात्र ऐसी जगह है जहां आग जलती है और इस अग्नि से जीतने भी हवा मे जीवाणु,विषाणु व्याप्त होते है उनका खात्मा हो जाता है।

अब जहां तक बात कि जाये लाल किताब के उपायो कि तो कुंडली मे मंगल और बुद्ध कि बुरी स्थिति को ठीक करने के लिए मंगलवार के दिन छोटी-छोटी कन्याओ को साबूत बादाम दान मे दें या बुधवार के दिन बकरी को काले या सफ़ेद चने खिला दें।

मंगल और शुक्र कि युति के समाधान हेतु अपने वजन के बराबर हरा चारा लेकर गाय को खिला दें यह उपाय हर तीन महीने के भीतर एक बार कर दे सभी समस्याएँ समाप्त होंगी या एक मुट्ठी जौ या सारसो (काली) लेकर उसे दूध से धोकर जल प्रवाह कर दें या फिर किसी खुली स्थान पर छींठ दें जहां पक्षियों का आगमन हो। इन सभी उपायो को अपनी रोज़मर्रा कि ज़िंदगी मे अपना कर इनसे निदान पाया जा सकता है।

रोग मुक्ति एवं ग्रहो कि युति से संबन्धित ऐसी तमाम समस्याओ के निवारण हेतु हमारी संस्थान से संपर्क करे।


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(Updated Date & Time :- 2020-03-17 09:36:41 )


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