Astroscience
लोहड़ी पर्व न सिर्फ रिश्तों की मधुरता है, बल्कि सुकून और प्रेम का भी प्रतीक है

लोहड़ी पर्व न सिर्फ रिश्तों की मधुरता है, बल्कि सुकून और प्रेम का भी प्रतीक है

नववर्ष 2020 की शुरुआत हो चुकी है और नये साल का पहला महिना जनवरी ढ़ेर सारे त्यौहारों को लेकर आया है, उसी में एक त्यौहार है लोहड़ी का त्यौहार जो हर वर्ष मकर संक्रांति के एक दिन पहले मनाया जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार हर वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी के दिन मनाई जाती है, इस त्यौहार को मकर संक्रांति इसलिए कहा जाता है क्योंकि सूर्य देव एक वर्ष का पूरा राशि चक्रण करने के बाद हर वर्ष 14 जनवरी को मकर राशि में आते है जिससे हर वर्ष 14 जनवरी के ही दिन मकर संक्रांति मनाई जाती है। परंतु ज्योतिष गणना के अनुसार वर्ष 2020 में संक्राति का आगमन 15 जनवरी की रात करीब 2 बजे हुआ है जिससे इस वर्ष मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जायेगी और लोहड़ी का त्यौहार 14 जनवरी को मनाया जायेगा।

लोहड़ी का त्यौहार आपसी भाई-चारा, प्रेम, स्नेह कायम करने वाला त्यौहार है। इस त्यौहार को  माघ संक्रांति की पूर्व संध्या पर सभी एक साथ मिलकर खुशी-खुशी मनाते है। यह त्यौहार मुख्य रुप से पंजाब हरियाणा और दिल्ली में मुख्य रुप में मनाया जाने वाला त्यौहार है, परंतु अब समय के बदलाव के साथ-साथ इस त्यौहार को देश के कोने-कोन में बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मनाय जाने लगा है। लोहड़ी के त्यौहार को पूरे उत्तर भारत में बडे ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है, ठीक वैसे ही दक्षिण भारत में पोंगल का त्यौहार तथा असम में बिहु का त्यौहार मनाया जाता है।

हर त्यौहार के पीछे कोई न कोई एक सत्य घटना जरुर जुड़ी होती है तथा हर त्यौहार के पीछे उसको मनाने कारण भी अवश्य रहता है। उसी प्रकार लोहड़ी के त्यौहार में भी एक सत्य घटना पर आधारित है। कहा जाता है कि सुन्दरी और मुंदरी नाम की दो सुन्दर लड़कियां थी जिसके माँ-बाप बचपन में ही गुजर गये थे। जवान होने के बाद उनके चाचा उन्हें किसी राजा के हाथों बेच देना चाहते थे। जब इसकी जानकारी दुल्ला भट्टी नाम के एक डाकू को हुई तो उन बच्चियों को  जालिमों से बचाकर जंगल ले आएऔर पिता बनकर योग्य वर से आग जलाकर सात फेर कराए। क्योंकि शादी बहुत जल्दी में हुई थी इसलिए दुल्ला भट्टी के पास उस समय देने के लिए कुछ नही था। इसलिए लड़कियों के आंचल में एक सेर (किलो) गुड़ डालकर बिदा किया था । तब से लोहड़ी का त्यौहार इस रुप में मनाया जाने लगा। पूरे देश में इस त्यौहार को हर्ष उल्लाष के साथ मनाया जाता है। लोहड़ी का त्यौहार उमंग और उत्साह का प्रतीक है। रात को अलाव जलाकर उस आग के चारो ओर नाच गान किया जाता है तथा जलती हुई आग में मुंगफली, तिल, गुड़ आदि भोग लगाकर लोगों को आपस में बांटा जाता है।

लोहड़ी के त्यौहार का संबंध फसलों से भी है, क्योंकि इस समय गेहूं और सरसों की फसलें अपने यौवन पर लहलहा रही होती है।  लोहड़ी उत्तर भारत का एक लोक प्रिय त्यौहार है। पंजाब के अतिरिक्त इसे हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और जम्मू कशमीर में भी बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। कुल मिलाकर लोहड़ी पर्व न सिर्फ रिश्तों की मधुरता बल्कि सुकून और प्रेम का प्रतीक भी है। लोहड़ी का त्यौहार हमें आपस में सद्भावना से रहने का  संदेश देता है। 


यह भी पढ़ें - संतान सुख में विलम्ब के संयोग, जाने क्या कहते है ग्रहो के योग

(Updated Date & Time :- 2020-02-10 10:45:20 )


Gd Vashisht Enquiry

Comments

speak to our expert !

Positive results come with right communication and with decades of experience. Try for yourself about our experts by calling one of them
to feel the delight about understanding your problems, and in getting the best solution and remedies.

Astroscience