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भगवान धन्वंतरि को क्यों कहा जाता है, धनतेरस के देवता?

भगवान धन्वंतरि को क्यों कहा जाता है, धनतेरस के देवता?

हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रतिवर्ष कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस के देवता भगवान धन्वंतरि के जन्म दिन के रुप में मनाया जाता है। यह त्यौहार दीपावली के त्यौहार से 2 दिन पूर्व मनाया जाता है। इस वर्ष धन तेरस का त्यौहार 25 अक्टूबर 2019 दिन शुक्रवार को मनाया जायेगा। धनतेरस को मनाने के पीछे हमारे हिन्दू धर्म में बहुत सारी मान्यताएं प्रचलित है। प्राचीन काल से लेकर अभी तक इस दिन नये बर्तन, कपड़े, सोना, चाँदी, भूमि, मकान एवं अन्य जरुरत के सामान खरीदने की परंपराएं चलती आ रहीं है। हमारें घरों की माताएँ बहने अपने लिए आभूषण, गहने एवं अन्य गृहस्थी से संबंधित सामान खरीदती है, क्योंकि इस दिन ऐसा करने से उनके सुख-सौभाग्य की वृद्धि होती है। मान्यता है कि धनतेरस के दिन जिस वस्तु की खरीदारी की जाएगी उसमें 13 गुणा वृद्धि होती है। इन सबके अलावा कुछ ऐसी चीजे हैं जिन्हें धनतेरस के दिन खरीदने से पूरे साल घर में सौभाग्य बना रहता है। धनतेरस के दिन लक्ष्मी माता और गणेश जी का चित्र बने सिक्को को खरीदकर उनकी पूजा करने से धन-सं​पत्ति के लिए शुभ फलदायी होता है।

भगवान धन्वंतरि को धनतेरस का देवता माना जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान धन्वंतरि जी का अवतरण हुआ था, भगवान धन्वंतरि स्वास्थ्य और आरोग्य के देवता है, इस दिन इसकी पूजा करने से हमारा शरीर निरोगी रहता है, और किसी भी प्रकार की कोई भी शरीरिक बाधा नही होती है। धन्वंतरि हिंदू धर्म के अनुसार देवताओं के वैद्य (डाँक्टर) हैं। उन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। आयुर्वेद की चिकित्सा करने वाले वैद्य इन्हें आरोग्य का देवता कहते हैं। संपूर्ण विश्व में वैद्य समाज द्वारा भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना कर उनके प्रति आभार प्रकट किया जाता है तथा उनसे यह कामना की जाती है कि वे समस्त विश्व को निरोग कर पूरे विश्व को रोग मुक्त कर उन्हें लम्बी उम्र प्रदान करें।

इन वस्तुओं की खरीदारी होती है शुभ खरीदारी के हिसाब से धनतेरस से बहुत ही अच्छा दिन होता है, आज के दिन शुभ मुहूर्त में खरीदी गई वस्तुए बहुत ही लाभकारी और शुभ होती है। धनतेरस के दिन लक्ष्मी गणेश जी मूर्ति खरीदना चाहिए और इनकी पूजा भी करना चाहिए। धनतेरस के दिन वाहन की खरीदारी भी अच्छी मानी जाती है। परंतु राहु काल के समय बचना चाहिए, इस समय को खुद देख ले या फिर किसी पंडित जी से राहु काल का समय पूछ लें, क्योंकि राहु काल में वाहन की खरीदरी करना अच्छा नही माना गया है। धनतेरस के मौके पर झाड़ू खरीदना भी अच्छा माना जाता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा घर से बाहर चली जाती है। इस दिन संपत्ति खरीदना बेहद शुभ माना जाता है।

धनतेरस पूजा मुहूर्त  - 19:19 से 20:17 बजे तक

कुल अवधि         - 58 मिनट

प्रदोष काल         - 17:45 से 20:17 बजे तक

वृषभ काल         - 19:19 से 21:14 बजे तक

विशेष मुहूर्त  - धनतेरस के दिन पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रदोष काल के दौरान होता है जब स्थिर लग्न प्रचलित होती है। माना जाता है कि अगर स्थिर लग्न के दौरान धनतेरस पूजा की जाये तो लक्ष्मीजी घर में ठहर जाती हैं। वृषभ लग्न को स्थिर माना गया है और दीवाली के त्यौहार के दौरान यह अधिकतर प्रदोष काल के साथ ही चल रही होती है।


(Updated Date & Time :- 2019-10-23 15:16:22 )


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