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देवताओं के पृथ्वी में आने का दिन है, माघ पूर्णिमा

देवताओं के पृथ्वी में आने का दिन है, माघ पूर्णिमा

भारतीय वैदिक पंचांग के अनुसार ग्यारहवें महीने को माघ महीने के नाम से जानते है और इस माह की पूर्णिमा को माघ पूर्णिमा कहते है, जो वर्ष 2019 में 19 फरवरी, दिन मंगलवार को पड़ने जा रही है l पुराणों  के मुताबित इस पूर्णिमा के संबंध मे ये कहा जाता है कि इस दिन स्वर्ग से देवता गण, पृथ्वी पर विचरण करने आते है l माघ पूर्णिमा पर माघ स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। माघ माह में चलने वाला यह स्नान पौष मास की पूर्णिमा से आरंभ होकर माघ पूर्णिमा तक होता है। तीर्थराज प्रयाग में कल्पवास करके त्रिवेणी स्नान करने का अंतिम दिन माघ पूर्णिमा ही है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार माघ स्नान करने वाले मनुष्यों पर भगवान माधव प्रसन्न रहते हैं तथा उन्हें सुख-सौभाग्य, धन-संतान और मोक्ष प्रदान करते हैं।

इस माघ पूर्णिमा की उत्पत्ति और महत्व के बारे में एक मान्यता है कि माघ माह में देवता पृथ्वी पर आते हैं और मनुष्य रूप धारण करके प्रयाग में स्नान, दान और जप करते हैं। इसलिए कहा जाता है कि इस दिन प्रयाग में गंगा स्नान करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में लिखे कथनों के अनुसार यदि माघ पूर्णिमा के दिन पुष्य नक्षत्र हो तो इस तिथि का महत्व और बढ़ जाता है। माघ पूर्णिमा पर स्नान, दान, हवन, व्रत और जप किये जाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु का पूजन, पितरों का श्राद्ध और गरीब व्यक्तियों को दान देना चाहिए। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार माघ पूर्णिमा पर स्वयं भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं। इस दिन जो भी जातक गंगा स्नान करते है तथा उसके बाद जप और दान करते है उन्हें सांसारिक बंधनो से मुक्ति मिलती है।

पंचांग के अनुसार माघ पूर्णिमा की अवधि 2 फरवरी की दोपहर 01:11:51 से 3 फरवरी 21:23:53 तक रहेगा l इस माघ पूर्णिमा के संदर्भ में प्राचीन काल से एक श्लोक प्रचलिक है जो इस प्रकार है l

स्वर्गलोके चिंर वासो येषां मनसि वर्तते |

यत्र क्वापि जले तैस्तु स्नातव्यं मृगभास्करे॥

अर्थात जो भी प्राणी (मनुष्य) बहुत समय के लिए (चिरकाल) स्वर्ग में निवास करने की मंशा अपने मन में रखते है, ऐसे जातकों को माघ महीने में जब सूर्य मकर राशि में स्थिति हो तब तीर्थ स्नान अवश्य करना चाहिए l ऐसा करना से उनकी ये मनोकामना पूर्ण होती है l

ज्योतिष शास्त्र और माघ पूर्णिमा का आपस मे बहुत ही गहरा संबंध है, जब चन्द्रमा अपनी ही राशि कर्क में होता है तथा सूर्य अपने पुत्र शनि की राशि मकर में होता है तब माघ पूर्णिमा का योग बनता है। इस योग में सूर्य और चन्द्रमा एक दूसरे से आमने सामने होते है। इस योग को पुण्य योग भी कहा जाता है। इस योग में स्नान करने से सूर्य और चंद्रमा से मिलने वाले कष्ट शीघ्र ही नष्ट हो जाते है। जिस जातक की जन्मकुंडली में चन्द्रमा नीच का है तथा मानसिक संताप प्रदान कर रहा है तो उसे सम्पूर्ण मास गंगा जल से स्नान करना चाहिए तथा अंतिम दिन दान करना चाहिए ऐसा करने से चन्द्रमा का दोष समाप्त हो जाता है।

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