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कैसा होता है रोहिणी नक्षत्र में जन्मे जातकों का स्वभाव

कैसा होता है रोहिणी नक्षत्र में जन्मे जातकों का स्वभाव

अब तक हम नक्षत्र मण्डल में तीन नक्षत्रों अश्वनी भरणी और कृत्तिका के बारे में से विस्तार पूर्वक चर्चा कर चुके है। आज की हमारी पूरी चर्चा रोहिणी नक्षत्र पर आधारित रहेगी। यह नक्षत्र मंडल का चौथा नक्षत्र है। रोहिणी नक्षत्र के नक्षत्र स्वामी चंद्र तथा राशि स्वामी शुक्र है। 
भारतीय पुराणों के अनुसार रोहिणी का संबंध बलराम जी की माता से जोड़ा गया हैं जो की ऋषि कश्यप की पुत्री थी।
वैदिक ज्योतिष की माने तो रोहिणी नक्षत्र का विस्तार वृष राशि में  10 डिग्री से लेकर 23 डिग्री 20 कला तक मान गया है।  जिसका अर्थ है कि रोहिणी के समस्त लक्षण आपको वृष राशि में ही दृश्यमान होंगे। 
जहाँ तक कद काठी और शारीरिक बनावट की बात की जाये तो रोहिणी नक्षत्र के जातक अधिकांशतः दुबले पतले ही मिलते हैं।  राशि स्वामी शुक्र होने के कारण रोहिणी नक्षत्र में जन्मे जातक अत्यधिक खूबसूरत होते हैं और यदि  जातक महिला है तो शुक्र उनकी खूबसूरती में चार चांद लगा देते है। 
क्योंकि शुक्र को सभी ग्रहों में सबसे सुंदर और चमकीले ग्रह की संज्ञा प्राप्त है। जहाँ तक शारीरिक सुंदरता की बात है तो इस नक्षत्र में जन्मे जातकों का नाक नक्शा अत्यधिक सुन्दर होता है। परंतु  स्वाभाव की बात की जाए तो ये जातक अत्यन्त पारखी प्रवृति के होते है। दुसरो में गलतियां निकालना इनके स्वभाव का सबसे बड़ा गुण है। 
अत्यन्त गुस्सैल प्रवृति के होते है। यदि इनके काम में कोई बाधा उत्पन्न करे तो उनके लिए ये शत्रु सामान होते है। इन जातकों में बदला लेने की भावना होती है। इसलिए जरूरी है कि इन जातकों को सिर्फ प्यार और स्नेह से ही जीता जाए न की बुद्धि से । 
ये भी  माना गया है कि इस नक्षत्र में जन्मे जातक अपने प्रियतम के प्रति सर्वस्व न्योछावर करने को भी तैयार रहते है। अत्यन्त खर्चीले स्वाभाव के होते है।वर्त्तमान में जीना ज्यादा पसंद करते है।भविष्य की चिंता कम करते है। 
जो की कभी-कभी इन जातकों के लिए परेशानियों का सबब बन जाता है। रोहिणी नक्षत्र में जन्मे जातक अपने काम के प्रति पूरी ईमानदारी बरतते है। यदि किसी कार्य को आरम्भ करे तो उसे पूरा कर के ही मानते है। जो की इनके कर्तव्यपरायणता की और इशारा करता है। 
परंतु कभी कभी ऐसे कार्यो को भी करने का निर्णय कर लेते है जिसमे वो निपुण नही है जिस कारण कभी कभी इन्हें निराशा का सामना भी करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त विचारों और भाव के धनि होते है परंतु विचारों की अत्यधिक स्वतंत्रता इनकी असफलता का कारण भी बनती है। 
यहाँ कहने का तात्पर्य यह है कि "अति हमेशा क्षति करती है" (जैसे कोई नदी यदि अपना प्रवाह छोड़ कर बहने लगे तो कई गांवों को अपने आवेग में ले लेती है) ।
इस नक्षत्र के जातक अपनी माँ के प्रति ज्यादा आदर भाव रखते है। परंतुु वैवाहिक जीवन में प्रवेश करने के बाद अपनी स्वेच्छाचारिता के कारण गृहस्थ जीवन में सदैव क्लेश बना रहता है।
कई बार अपनी स्वतंत्रता और मनमर्ज़ी के कारण अपना वैवाहिक जीवन ख़राब भी कर लेते है। अगर बात की जाए जीवन के अंतिम क्षणों की तो रोहिणी नक्षत्र के जातकों में लकवा मार देने या फिर कुबड़ेपन की शिकायत उत्पन्न हो जाती है। 
भारतीय वैदिक ज्योतिष के अनुसार रोहिणी को एक उदार , मधुर,मनमोहक तथा शुभ नक्षत्र की संज्ञा दी गयी है। अगर हम रोहिणी का शाब्दिक अर्थ जानने की कोशिश करते है तो पाते है कि रोहिणी का अर्थ होता है रोहन करना अर्थात "सवारी" या विकास के पथ पर गतिशील रहना । सही मायने में देखा जाये तो इस नक्षत्र में जन्मे जातकों की गतिशीलता ही इनकी सबसे बड़ी पहचान है।
जहाँ तक बात करे प्रतीकों की तो इस नक्षत्र का प्रतीक दो बैलों के द्वारा खिंची जाने वाली बैल गाड़ी है। अतः हम ये कह सकते है की इस नक्षत्र में जन्मे जातकों में बैल के गुणों का समावेश देखने को मिलता है। 
जो की इनके अत्यधिक परिश्रमी होने की ओर संकेत करता हैं। इन जातकों में दृढ़ इच्छाशक्ति होती है। किसी काम के प्रति पूरी निष्ठा और ईमादारी  बरतते  है। ज्योतिष विद्या के अंतर्गत रोहिणी को पहिए से भी जोड़ा जाता है जो की गतिशीलता और सृजन का प्रतीक है। शुक्र ग्रह के प्रभाव के कारण रचनात्मकता , सुंदरता ,सृजनता करने की शक्ति भी इस नक्षत्र में जन्मे जातकों में भरपूर होती है।
 इस लेख में हमने रोहिणी नक्षत्र के जातकों के स्वभाव और उनके चरित्र के बारे में जानने की कोशिश की है आगे की लेखो में आपको अन्य नक्षत्रों के बारे में जानकारी दी जाएगी.


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(Updated Date & Time :- 2020-04-03 21:08:47 )


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