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स्वाभाव की दृष्टि से कैसे होते है पुनर्वसु नक्षत्र में जन्मे जातक

स्वाभाव की दृष्टि से कैसे होते है पुनर्वसु नक्षत्र में जन्मे जातक

अब तक हम नक्षत्र मण्डल मे छः नक्षत्रो अश्विनी, भरणी, कृतिका, रोहिणी, मृगशिरा और आर्द्रा के बारे मे विस्तारपूर्वक चर्चा कर चुके है। आज की हमारी पूरी चर्चा पुनर्वसु नक्षत्र पर केन्द्रित रहेगी। पुनर्वसु नक्षत्र के देवता अदिति है जबकि इस नक्षत्र के स्वामी है बृहस्पति या गुरु ग्रह। यह नक्षत्र चार तारो का समूह है। 
जैसे की नाम से ही भाव स्पष्ट हो रहा है पुनर्वसु जिसमे ( पुनः अर्थात दोबारा और वसु का अर्थ बना या होना अर्थात जो बना ही है किसी काम को दोबारा करने के लिए ।) अब जहां तक इसके अन्य नामो की बात की जाए  तो आदित्य और सुरजन्य भी इसी नक्षत्र के नाम है। जिसमे आदित्य अर्थात सूर्य और सुर्जन्य की संधि विच्छेद  ( सुर अर्थात देवता जननी का तात्पर्य है जहां से जन्म हुआ है)  अतः हम इसका सीधा संबंध देवताओ से जोड़ कर देख सकते है। जहां तक बात की जाये गण की तो इस नक्षत्र का गण है  "देव" अर्थात देवता योनि है इसकी मार्जर, नाड़ी है इसकी आद्य । इन सभी के साथ वैदिक ज्योतिष के अंतर्गत सभी नक्षत्रो को कुछ प्रतीकों से निर्दिष्ट किया गया है जो की पुनर्वसु के संबंध मे तीर और कमान हमे देखने को मिलते है। जहां तक प्रतीको के माध्यम से इनके चरित्र को बताया जाए तो कहा जा सकता है की इस नक्षत्र मे जन्मे जातक हमेशा तीर और कमान की भांति दूसरो पर निशाना साधे खड़े रहते है। सृष्टि में जन्मा हर व्यक्ति किसी न किसी पुरुषार्थ के लिए जन्मता है। अर्थात किसी का भी जीवन व्यर्थ नही है। अगर हम इस नक्षत्र के जातकों की  पुरुषार्थ कि बात करते है तो इस नक्षत्र मे जन्मे जातक का सीधा संबंध अर्थ अर्थात धन से है। जिससे इनके वर्ण का भी निर्धारण हो जाता है जो कि वैश्य है अर्थात व्यापारी।  इस नक्षत्र मे जन्मे जातक अत्यंत खूबसूरत होते है और ईश्वर मे इनकी असीम आस्था होती है। इन जातको का चरित्र अत्यधिक धार्मिक प्रवृति का होता है। आध्यात्म कि ओर झुकाव अधिक होता है। जिसके चलते समाज मे इनकी एक अलग ही छवि दृष्टिगत होती है। लोग इनके प्रति आकर्षित होते है। और इनके नक्शे कदम पर चलने को भी तैयार रहते है। इनके स्वभाव मे ज़िम्मेदारी का भाव होता है। किसी आपराधिक मामलो मे कभी संलग्न नही रहते और अपने आस-पड़ोस में यदि कहीं कोई गलत चीज़े घटित होती हुई देखते है तो ये पहले व्यक्ति होते है जो कि उसका विरोध करते दिखेंगे। जैसा कि आरम्भ में बताया गया था कि इन जातको के चरित्र मे प्रतीक रूप मे तीर कमान को प्रदर्शित किया जाता है जो कि हमेशा दूसरों पर चलाने के लिए तत्पर रहता है। अपने आप पास कुछ गलत होते देख चुप रहने कि प्रवृति इनमे नही होती है। दुसरो के लिए आवाज बुलंद करना इनके स्वभाव कि सबसे बड़ी विशेषता है। अन्य विशेषताओ कि बात कि जाए तो "सादा जीवन उच्च विचार" जैसे मुहावरों मानो इन्ही के चरित्र का गुणगान करते हो अत्यंत सादा जीवन जीने में विश्वास रखते है। दिखावे से इनका दूर दूर तक कोई लेना देना नही होता हालांकि महत्वाकांक्षी होते है परंतु इनकी महत्वाकांक्षा अपनी झोली भरने कि नही अपितु परोपकार के लिए सदैव खुली रहती है। ये जातक अपने माता-पिता के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव रखते है या यूं कहे कि माता- पिता के भक्त होते है। अपने शिक्षको के प्रति आदर भाव रखते है। चरित्र मे इतनी सारी विशेषताओ के होते हुए भी इनका वैवाहिक जीवन उतना अच्छा नही होता क्योंकि इनका सिद्धांतवादी, आध्यात्मिक स्वभाव हर किसी के साथ सामंजस्य नही बैठा सकता जिसका अंतिम परिणाम वैवाहिक जीवन में तलाक के रूप में सामने आता  है। अब जहां तक इन नक्षत्र के नाम को याद किया जाये तो पुनर्वसु अर्थात दोबारा अतःये जातक किसी काम मे पहली बार फ़ेल हो जाते है और दूसरी बार में ही उसमे सफलता को प्राप्त करते है। और ये सिर्फ वैवाहिक जीवन कि ही  बात नही है किसी भी क्षेत्र मे फिर चाहे वो शिक्षा हो , कारीयर हो ,प्रेम संबंध हो। इन जातको मे हमेशा कार्यो को दूसरी बार मे ही सफल करने कि प्रवृति होती है।


(Updated Date & Time :- 2020-04-07 21:11:50 )


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