Astroscience
क्या राहु की मार से आप भी तो नही है बीमार?

क्या राहु की मार से आप भी तो नही है बीमार?

राहु ग्रह को ज्योतिष तथा शास्त्रों की मान्यता के अनुसार बहुत अशुभ ग्रह माना जाता है। राहु की माता का नाम सिंहिका जो दैत्य राज हिरण्यकशिपु की बेटी थी। राहु के 100 भाई थे इन सब भाईयों में राहु सबसे जेष्ठ थे, बलवान थे और शाक्तिशाली भी थे। राहु एक ऐसा छाया ग्रह हो जो सूर्य देव और चन्द्रमा को पीड़ित करते है यानि के उनके ऊपर आक्रमण करते है। यह राहु पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा के ऊपर आक्रमण करते है तथा अमावस्या के दिन सूर्य देव की ऊपर आक्रमण करते है, इसे ज्यातिष शास्त्र में ग्रहण कहा जाता है। ग्रहण की स्थिति में यह चारों ओर अंधकार ही अंधकार कर देते है। ग्रहण के समय जिन लोगों की जन्म कुण्डली में सूर्य ग्रहण या फिर चन्द्र ग्रहण को दोष होता है, उसनी बुद्धि का भ्रमित कर देते है जिससे उनकी सोचने तथा समझने की शाक्ति कमजोर हो जाती है।

समुद्र मंथन के दौरान राहु के अमृतपान किया था, अमृतपान करने के कारण राहु को अमरता का वरदान भी प्राप्त है यानि राहु आज भी अमर है। इसी कारण ब्रह्मा जी ने राहु को अपनी सभा में स्थान प्रदान किया था ।  हमारे नक्षत्र मण्डल में राहु का कोई अस्तित्व नही है इसीलिए राहु को छाया ग्रह कहा जाता है। छाया का मलतल कन्फ्यूजन (आपके समाने क्या चल रहा है आपको पता ही नही चलता) राहु जो दिखता है वह होता नही है और जो दिखता है वह होता नही है। राहु की दशा, अंतर्दशा एवं महादशा के दौरान बहुत से लोग भ्रमित रहते है, ऐसे लोगों को अपने जीवन को एक लेकर एक प्रकार का भ्रम बना रहता है कि क्या करें क्या न करें, कहां जाएं, ऐसी असमंजस की  स्थिति राहु उनके समाने रखता है।

यह भी पढ़ें - शनि देव कब देते हैं शुभ और अशुभ फल

राहु एक राशि में 18 महीने तक रहता है (गोचर के समय) तथा राहु की जो महादशा होती है वह 18 वर्ष की होती है। राहु ग्रह बहुत ही भयंकार परिणाम देने वाले ग्रहों में से एक होता है क्योंकि राहु को जो मुख है बहुत  बहुत ही खतरनाक है। राहु ग्रह नीले रंग का प्रतिनिधित्व करता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु के मित्रों में से बुध, शुक्र और शनि तथा गुरु ग्रह से समानता का भाव रखते है। सूर्य, चन्द्र और मंगल को राहु अपना शत्रु मनाते है, यदि सूर्य, चन्द्र और मंगल के साथ कहीं पर भी राहु विराजमान है तो यह बहुत ही बुरा अशुभ योग बनाते है। इस अशुभ योग में व्यक्ति के जीवन में संघर्ष को बढ़ा देते है तथा बहुत की परेशानियों का सामना भी करवाते है।

राहु ग्रह के शुभ परिणाम को कुण्डली के तीसरे , छठें और ग्यारहवें भाव में देखने को मिलते है, वह चाहे गोचर में हो या फिर जन्म कुण्डली में हो कहीं पर भी हो वहां पर शुभ परिणाम ही मिलते है। राहु और केतु के बीच यही जन्म कुण्डली के सभी ग्रह आ जाते है तो व्यक्ति को काल-सर्प दोष लग जाता है। काल-सर्प दोष के कारण व्यक्ति पीड़ित हो जाता है, ऐसे में उसके जीवन में धन-दौलत की कमी हो जाती है, बहुत सारी बीमारियों से भी घिरा रहता है, किसी न किसा काम में अनावश्यक खर्च होता रहता है।

राहु के कारक तत्व मुख्य रुप से गंदे स्थान, झूठ बोलना, धोखाधड़ी, वेश्यावृत्ति , लोटरी, सट्टा जुआ यानि जितने भी गलत काम होते है वह सब राहु के वजह से ही होते है। राहु की राजनीति का भी कारक ग्रह कहा जाता है। राहु आध्यत्मिकता की ओर भी लेकर जाता है। ऐसा नही है कि राहु हमेशा ही अशुभ फल देता है परंतु ज्यादा मात्रा में यह अशुभ फल देते है। खराब राहु की वजह से लम्बी समय की बीमारी, कैंसर, गैस की समस्या, अपच की समस्या क्योंकि राहु की दशा अंतर्दशा एवं महादशा में जातक के रोगों का तो पता ही नही चलता है । वह लगातार अपनी दवाई करवाता रहता है और अगर उससे कोई उसकी बीमारी के बारे में पूछता है तो बोलता है कि डाक्टरों ने तो सब प्रकार की जाँचे कर ली है परंतु कुछ भी नही निकला और रोग बना ही रहता है इस तरह की बीमारियां राहु ही देता है।

राहु से पीड़ित जातक हमेशा असमंजस (दुविधा) की स्थिति में रहते है, इनको हर बात पर कोई न कोई संदेह रहता है। राहु की दशा में अगर सूर्य आ जाता है तो इस स्थिति में जातक के अंदर दर बैठ जाता है। राहु की दशा में अगर चन्द्रमा आ जाता है तो व्यक्ति में मन मे ही डर इतना प्रबल हो जाता है कि वह फिर हर कार्य को डर-डर कर ही करता है तथा बहुत ज्यादा भयभीत हो जाता है और कष्टों में घिर जाता है। इस तरह की परेशानियाँ राहु की वजह से ही होती है।

राहु ग्रह को पूर्व जन्म के कार्मों का भी कारक माना जाता है, क्योंकि यदि आपने पूर्व जन्म में बुर कार्य किएं है और वह संचित है तो उसके फल आपको राहु की दशा में मिलते है। राहु ग्रह के जो परिणाम है वह पूर्व कार्म अर्थात जो आपने अपने पिछले जन्म में कार्म किएं है उसके अनुसार आपको राहु फल देते है।

यदि आप भी अपने जीवन में ऐसी किसी समस्या से परेशान है या फिर राहु को शांत करने के उपाय, मंत्र उपचार , राहु शांति , रत्न सुझाव किसी के भी बारें कुछ जानकारी चाहते है तो आप हमारे संस्थान आकर राहु से संबंधित किसी भी प्रकार के समाधान प्राप्त कर सकते है।


यह भी पढ़ें - राशि अनुसार कैसे करें, अपने-अपने देवताओं का पूजन?

(Updated Date & Time :- 2020-02-14 15:00:43 )


Gd Vashisht Enquiry

Comments

speak to our expert !

Positive results come with right communication and with decades of experience. Try for yourself about our experts by calling one of them
to feel the delight about understanding your problems, and in getting the best solution and remedies.

Astroscience