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पुराणों के अनुसार क्या है रामेश्वर ज्योतिर्लिंग का रहस्य

पुराणों के अनुसार क्या है रामेश्वर ज्योतिर्लिंग का रहस्य

धार्मिक और पौराणिक दृष्टि से सृष्टि के आरंभ मे ब्रह्मा, विष्णु और महेश का योगदान सर्वाधिक रहा है। समस्त सिद्धियो को देने वाले महादेव कि आराधना सिर्फ मनुष्य और देवता ही नही अपितु वानर, दैत्य, गंदर्भ, असुर, तथा किन्नर भी करते है। शिव पुराण कि कोटीरूद्र संहिता के अंतर्गत महादेव के 12 ज्योतिर्लिंगों के महत्व को बताया गया है। जो कि भारत के अलग-अलग राज्यो मे स्थित है।
इस लेख मे हम जानेंगे कि आखिर क्या है इन ज्योतिर्लिंगों के स्थापना कि कथा साथ ही क्यों है इसकी इतनी महत्ता। इस लेख के माध्यम से हम रामेश्वर ज्योतिर्लिंग कि कथा को विधिपूर्वक बताने का प्रयास करेंगे।
 

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रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग की कथा
शिव पुराण की कोटिरूद्र संहिता के अंतर्गत इस ज्योतिर्लिंग का उल्लेख मिलता है । यह ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु के रामेश्वरम नामक स्थान पर स्थित है। इसके सन्दर्भ में जो कथा पुराणों में उल्लेखित है वह रामायण काल की है। जब रावण, माता सीता का हरण कर उन्हें लंका ले आया था और भगवान् राम लंका पहुँचने के लिए अपने समस्त वानर सेना के साथ समुद्र तट पर पहुंचे थे। भगवान् राम वहां पहुँच कर इसे पार करने की सोच ही रहे थे कि उन्हें अचानक तीव्र प्यास लगी इस पर एक वानर ने उन्हें मीठा जल ग्रहण करने को दिया। भगवान् राम नित्य प्रति अपने आराध्य देव शिव कि पूजा किया करते थे परंतु उस दिन वो पूजा करना भूल गए थे।
जैसे ही उन्होंने पानी पीना चाहा तभी उन्हें स्मृति हुई कि आज उन्होंने आने आराध्य देव भगवान् शिव की स्तुति नही की है।  इस पर उन्होंने वहिं समुद्र के किनारे भगवान् शिव के पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया और उनकी आराधना में लींन हो गए। तभी शिव जी ने उन्हें अपने दिव्य दर्शन दिए। भगवान् राम ने शिव जी से कहा कि "हे महादेव! आपके वरदान के कारण ही वह दुष्ट रावण अभिमानी होता जा रहा है इसलिये उसके अभिमान का अंत करने के लिए मेरी जीत सुनिश्चित करे। और लोक कल्याण के लिए यहीं निवास करे।" इस पर महादेव ने तथास्तु कहा और सैदेव के लिए वहिं रामेश्वर के तट पर लिंग रूप में स्थापित हो गए। जो जगत में रामेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से प्रख्यात हुआ।
इस लेख मे हमने तामिलनाडु में स्थित रामेश्वर ज्योतिर्लिंग कि कथा का सार विधिपूर्वक बताया है। अन्य ज्योतिर्लिंगों के स्थापना संबन्धित कथाएँ आगे के लेख मे पढ़ने को मिलेगी।


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(Updated Date & Time :- 2020-03-26 16:35:50 )


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