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रथ सप्तमी पर कैसे करें सूर्य देव की आराधना

रथ सप्तमी पर कैसे करें सूर्य देव की आराधना

रथ सप्तमी – 1 फरवरी 2020

दिन –शनिवार

सप्तमी तिथि प्रारम्भ – दोपहर 3 बज के 51 मिनट (31 जनवरी 2020) से

सप्तमी तिथि कि समाप्ति – संध्या 6 बज के 10 मिनट ( 1 फरवरी 2020 ) तक 

हिन्दू पंचांग के अनुसार रथ सप्तमी या माघ सप्तमी,माघ मास के शुक्ल पक्ष के सांतवे दिन पूरे भारत भर मे मनाई जाती है। कहा जाता है कि आज के हि दिन भगवान सूर्य अर्थात नारायण के अवतार अपने रथ पर विराजमान होकर उत्तर कि ओर प्रस्थान करते है जिस कारण आज के दिन को सूर्य जयंती के रूप मे भी मनाया जाता है।इसका महत्व इस लिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह भगवान सूर्य कि उतरायन कि स्थिति को निर्धारित करती है जो कि गर्मी के मौसम के आगमन का सूचक है। इस दिन के बाद से ही मौसम मे परिवर्तन साफ देखने को मिलता है दिन मे सूर्यताप अनुभव किया जा सकता है।

क्यों है इतना महत्व

वैदिक ज्योतिषी और हिन्दू पंचांग दोनों मे हि रथ सप्तमी का अपना विशेष महत्व है। क्योंकि यह दिन सूर्य भगवान का माना जाता है जो कि साक्षात विष्णु के अवतार है। आज के दिन से जलवायु मे परिवर्तन भी देखा जाता है जो कि किसानो और उनकी फसलों कि दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

दान पुण्य कि दृष्टि से भी आज का दिन महत्वपूर्ण माना गया है जनुश्रुति है कि आज के दिन स्नान के बाद दान पुण्य करने से मनुस्यों को सभी प्रकार के पापो से मुक्ति मिल जाती है और यदि किसी भयंकर बीमारी से ग्रसित है तो उसके ठीक होने के लक्षण दिखने लगते है ।

आज के दिन कैसे करे सूर्य देव कि आराधना

रथ सप्तमी से एक दिन पहले अर्थात 31 जनवरी को सूर्य उदित होने से ठीक पहले उठ कर पवित्र स्नान करने का विशेष महत्व है। माना जाता है कि रथ सप्तमी के दिन इस पवित्र स्नान मात्र से बहुत से रोगो से मुक्ति मिलती हैसाथ हि अच्छे स्वास्थ्य का वरदान मिलता है। जिस कारण इसे आरोग्य सप्तमी भी कहते हैं।

अगले दिन अर्थात रथ सप्तमी के दिन सूर्य उदित होने पर सूर्य नमस्कार कि मुद्रा मे सूर्य देवता को अर्घ्य दें और सूर्य भगवान के विभिन्न नामो का जाप करें अच्छे फल मिलेंगे।

सूर्य भगवान को अर्घ्य देने के बाद कपूर के साथ लाल पुष्पो का अर्पण करे। इसके बाद मिट्टी से बने घी के दीपक जला कर आरोग्य सप्तमी कि पूजा करे।

भारत के दक्षिणवर्ती क्षेत्रो मे आज के दिन महिलाएं रथ सप्तमी पूजा स्थल पर सूर्य और उसके सात घोड़ो सहित चित्र खिचती है साथ ही पुष्पो और रंगो से घर के प्रवेश द्वार पर रंगोली बनाने का भी चलन है।

आज के दिन प्रसाद के रूप मे मीठे चावल बनाने की परंपरा है जिसे एक मिट्टी के पात्र मे कच्चे दूध, चीनी और पंचमेवो के साथ एक ऐसी दिशा मे रख कर पकाया जाता है जहां सूर्य का प्रकाश इस बर्तन पर पड़े बाद मे यह भोग सूर्य भगवान को लगाया जाता हैं।

क्या है मान्यता

जनश्रुति है कि आरोग्य सप्तमी कि पूर्व संध्या पर पवित्र स्नान करने से व्यक्ति जन्म मरण के बंधन से मुक्त होकर निर्वाण प्राप्ति कि ओरउन्मुख हो जाता है। आज के दिन भगवान सूर्य की पूजा अर्चना करने से व्यक्ति को दीर्घायु, यश, बल और किर्ति मिलती है।साथ हि आज के दिन भगवान सूर्य अपनी 7 रश्मियों सहित आरोग्य का दान करते है इसलिए इस दिन सूर्य देव कि पूजा करने से जिस भी जातक तो त्वचा संबन्धित रोग है उससे मुक्ति मिलती है इसलिए वैज्ञानिक दृष्टि से भी इसका महत्व बढ़ जाता है।


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(Updated Date & Time :- 2020-02-07 17:27:03 )


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