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लंकापति रावण ने अपने अंतिम क्षणों मे लक्ष्मण को जीवन के कौन से रहस्य बताएं

लंकापति रावण ने अपने अंतिम क्षणों मे लक्ष्मण को जीवन के कौन से रहस्य बताएं

प्रसिद्ध महाकाव्य रामायण के अनुसार युद्ध के अंतिम क्षणो मे जब श्री राम ने रावण पर बाण साधा तो उस बाण से रावण का सिर धड़ से अलग हो गया। परंतु सिर के अलग होते ही दशानन एक नए सिर के साथ पुनः जीवित हो उठता। मायावी रावण की यह दशा देख राम अचंभित रह गए और रावण के वध का उपाय सोचने लगे। तभी विभीषण युद्ध क्षेत्र मे प्रकट होते है और श्री राम को रावण की मृत्यु का भेद बताते है .... वो कहते है की “हे प्रभु ब्रह्मा जी के वरदान से दशानन की नाभि मे अमृत है।कुंडलाकृतियों से युक्त अमृत तवो का मूल है।इसी के प्रभाव से एक शीश कटते ही दूसरा शीश पुनः उत्पन्न हो जाता है। विभीषण,श्रीराम से आग्रह करते है की आप आग्नेय शस्त्र का उपयोग कर दशानन के नाभि विवर का अमृत सुखा दीजिये तभी इस महादानव का अंत हो सकता है”विभीषण के कथनानुसार प्रभु श्री राम ने रावण के नाभि पर तीर चलाई जिससे रावण का अंत संभव हो पाया । युद्ध के अंतिम क्षणो मे जब रावण जीवन और मृत्यु की आखिरी सांस ले रहा था तो भगवान श्री राम ने लक्ष्मण से आग्रह किया की....“हे लक्ष्मण ! तुम रावण के पास जाओ और और उस महाशक्ति महापराक्रमी रावण से दिव्य ज्ञान प्राप्त करोरावण ने अंतिम क्षणो मे लक्ष्मण को जीवन के तीन अचूक रहस्य बताएं जो की हर परिस्थिति मे समस्त प्राणी जगत के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।

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प्रथम–शुभ कार्यो को करने मे कभी विलंब नही करनी चाहिए। और मोहमया से वशीभूत होकर यदि कोई अधर्म का कार्य करना पड़जाये तो जितना हो सके उससे बचने का प्रयास करना चाहिए।

द्वितीय – अपनी शक्ति और पराक्रम पर कभी घमंड नही करना चाहिए और न ही कभी शत्रु को तुच्छ सम्झना चाहिए। मुझे परम देवता ब्रह्मा से वरदान प्राप्त था की सिर्फ वानर और मानव को छोड़कर मुझे तीनों लोको मे कोई परास्त नही सकता परंतु अपनी शक्तियों के घमंड मे आकार मैं उन्हे तुच्छ और निम्न कोटि का समझता रहा जो की अंततः मेरे विनाश का कारण बना।

तृतीय–तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात.....“ऐसा कोई भी रहस्य जो की आपकी जीवन या मृत्यु का कारण बन सकता हो उसे कभी किसी को नही बताना चाहिए फिर चाहे वो आपका भाई बंधु ही क्यू न हो। क्योंकि हितैषी कब शत्रु बन जाए ये उसके ऊपर निर्भर है”


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(Updated Date & Time :- 2020-02-15 16:40:11 )


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