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आओ मनाएँ सौंदर्य, संगीत और वाणी की देवी माँ सरस्वती का जन्म दिन

आओ मनाएँ सौंदर्य, संगीत और वाणी की देवी माँ सरस्वती का जन्म दिन

भारतीय संस्कृति, साहित्य और कला की देवी माँ सरस्वती का जन्म वसंत के आगमन के साथ ही मानते है l इनके जन्म से ही वसंत का जन्म हुआ है l पुराणों की मान्यता के अनुसार माता सरस्वती का जन्म हर साल माघ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन मनाया जाता है l मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था l इस वर्ष इनका जन्म दिन या जयंती 10 फरवरी को वसंत पंचमी के रूम मे पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा l भारतीय ऋतुओं के अनुसार पतझड़ के बाद बंसत ऋतु का आगमन होता है बंसत को ऋतुओं का राजा कहा जाता है l स्वयं भगवान कृष्ण ने गीता मे कहा है की ऋतुओं में मैं बसंत हूं l

पौराणिक मान्यता के अनुरूप सृष्टि के प्रारंभ में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने मनुष्य की रचना की lलेकिन अपने सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे l उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है, जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है l विष्णु जी से सलाह लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल छिड़का l पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कंपन होने लगा और एक अद्भुत शक्ति का प्राकट्य हुआ l यह प्राकट्य एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था, जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था l अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी l

ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया l जैसे ही देवी ने वीणा बजाना शुरू किया, पूरे संसार में एक मधुर ध्वनि फैल गई l संसार के जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई l तब ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा l मां सरस्वती विद्या और बुद्धि प्रदान करती हैं l बसंत पंचमी के दिन इनकी उत्पत्ति हुई थी, इसलिए बसन्त पंचमी के दिन इनका जन्मदिन मनाया जाता है l मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा की जाती है और विद्या और बुद्धि का वरदान मांगा जाता है l

वसंत पंचमी के दिन जो भी भक्त या साधक माता सरस्वती की पूजा वंदना और आराधना सच्चे मन से करता है, उसे किसी भी प्रकार की विदध्या प्राप्त करने मे कोई बाधा नहीं आती है l ये शुक्लवर्ण, श्वेत वस्त्रधारिणी, वीणावादनतत्परा तथा श्वेतपद्मासना कही गई हैं। इनकी उपासना करने से मूर्ख भी विद्वान् बन सकता है। शिक्षा संस्थाओं में वसंत पंचमी को सरस्वती का जन्म दिन समारोह पूर्वक मनाया जाता है। सरस्वती पूजा करते समय सबसे पहले सरस्वती माता की प्रतिमा अथवा तस्वीर को सामने रखना चाहिए। पूजा करते समय उन्हें सबसे पहले आचमन और स्नान कराएं।

इसके बाद माता को फूल, माला चढ़ाएं l सरस्वती माता को सिन्दूर, अन्य श्रृंगार की वस्तुएं भी अर्पित करनी चाहिए।  इसके बाद माता को फूल, माला चढ़ाएं, सरस्वती माता को सिन्दूर, अन्य श्रृंगार की वस्तुएं भी अर्पित करनी चाहिए। देवी सरस्वती श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, इसलिए उन्हें श्वेत वस्त्र पहनाएं। सरस्वती पूजन के अवसर पर माता सरस्वती को पीले रंग का फल चढ़ाएं और फिर  मीठा  अर्पित करें और इसके  बाद  सरस्वती वंदना करें और मन से  मां का ध्यान करें, सच्चे मन से की गई  प्रार्थना मां  हमेशा स्वीकार करती हैं।

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