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सत्य नारायण की कथा कैसे दिखाती है सत्य की राह?

सत्य नारायण की कथा कैसे दिखाती है सत्य की राह?

ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय – अर्थात ऊँ एक प्रकार का लौकिक घोष है, तथा नमो जिसे हम नमन करते है, भगवते जो बहुत ही शाक्तिशाली होने के बाद भी दयालु है, वासुदेवाय – जो संसार के समस्त जीवों में प्राण का संचार करता है, मैने ऐसे ईश्वर की को बारंबार प्रणाम करता हूँ तथा उनकी महिमा का श्रवणपान करता हूँ।

भगवान विष्णु की कथा सत्यनारायण पूरी तरह से सत्य के मार्ग पर चलने वाली कथा है, जो भी व्यक्ति इस कथा को अपने घर-परिवार में आयोजन कर इस कथा को पूरी श्रद्धा के साथ सुनते है तथा इसके नियमों का भली-भाँति पालन करते है, उनके ऊपर सदैव लक्ष्मी पति नारायण की कृपा बनी रहती है। सत्य नारायण की कथा व्यक्ति के संपूर्ण पापों का नाश करने वाली होती है। सत्य नारायण की कथा धन-धान्य, सुख,समृद्धी, ऐश्वर्य आदि की निरंतर वृद्धि करने वाली एवं भक्तों की सभी मनोकामनाओं की पूर्ती करने वाली है।

इस संसार में जो भी व्यक्ति सत्य नारायण व्रत कथा का पाठ करता या करवाता है तथा अपनी श्रद्धा भक्ति से सत्यनारायण भगवान को प्रसन्न कर लेता है फिर उसे अपने जीवन में किसी भी प्रकार की समस्याओं का सामना नही करना पड़ता है। सत्य नारायण कथा की मान्यता है कि कोई भी व्यक्ति कितना ही गरीब क्यों न हो, यदि वह पूरे विधि-विधान एवं नियम पूर्वक सत्यनारायण कथा को पढ़ता या सुनता है तो उसके जन्म-जन्मों की दरिद्रता (गरीबी) दूर हो जाती है।

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शास्त्रों के अनुसार सत्य नारायण की कथा करने अथवा कराने के लिए पूर्णिमा तिथि विशेष शुभदायी मानी गई है, इस दिन भगवान विष्णु जी की पूजा और सत्यनारायण कथा दोनो का ही बहुत बड़ा महत्व होता है। पूर्णिमा के दिन सत्य नारायण व्रत कथा तथा भगवान विष्णु के पूजन से जीवन के सभी बुरे कार्मों से नियात मिल जाती है। यदि कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में आर्थिक रुप से बहुत ही परेशान है, उसके घर में हमेशा धन की कमी बनी रहती है, तो उन्हें इस व्रत को अवश्य करना चाहिए। जिससे भगवान विष्णु जी उनके दुःखों को दूर कर सके। जिन लोगों की शादी-विवाह में बाधा  आ रही हो और जिन लोगों के वैवाहिक जीवन में कोई न कोई परेशानी बनी रहती है, उन्हें भी इस व्रत का पालन जरुर करना चाहिए।

 

सत्य नारायण की कथा विधि –

सर्व प्रथम पूजा के स्थान और पूजा की सामग्री को गंगा जल का छिंटा देकर शुद्ध कर लें। अब जिस जगह पर भगवान को बिठाएंगे वहां पर कुमकुम से रंगोली बना लें, इसके बाद चौकी की स्थापना करके उसके ऊपर पीला वस्त्र बिछाएं तथा चौकी के चारों कोनों पर केले के खंड (केले के पेड़ का तना) बांधें और मौली से बांधकर भगवान का मंडप तैयार कर लें। यह सब हो जाने के बाद श्री सत्यनारायण भगवान की मूर्ती स्थापित करें। मूर्ती के सामने चावल से चौकी पर स्वास्थिक बनाएं और फिर कलश की स्थापना करें, इसके बाद दीपक को प्रज्वलित करके, ईश्वर से प्रार्थना करें कि मुझे मेरी पूजा का फल मनोकामना के अनुसार मिले।

इतना सब होने के बाद कथा का पाठ प्रारंभ कर दें तथा कथा पूरी हो जाने के बाद, भगवान सत्य नारायण  जी की आरती करें तथा पीले लड्डूओं को भोग लगायें। इस प्रसाद को उन सभी लोगों में वितरित करें जो पूजा में सामिल हुएं है तथा अपने मोहल्ला-पड़ोस में भी इस पवित्र सत्य नारायण की कथा का प्रसाद देना चाहिए। कथा पूर्ण हो जाने के बाद जिस ब्रह्माण के द्वारा अपने इस पाठ को श्रवण किया है उन्हें भोजन कराएं तथा  अपने समर्थ के अनुसार दान दक्षिणा  भी भेंट करें।

सत्य नारायण व्रत कथा का प्रसाद – सत्य नारायण की कथा में भगवान सत्यनाराण का प्रसाद कैसा होना चाहिए यह बहुत ही मायने रखता है। सत्य नारायण कथा के प्रसाद में शुद्ध देशी घी की पंजीरी जो घर में बनाई जाती है, उसका भोग अवश्य लगाएं तथा साथ ही केले और बेसन के लड्डूओं को प्रमुखता से सामिल करें और यह प्रसाद सब में बांट दे।


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(Updated Date & Time :- 2020-02-21 15:40:07 )


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