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ज्योतिष के पीछे का क्या विज्ञान है? क्या रत्न हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं?

ज्योतिष के पीछे का क्या विज्ञान है? क्या रत्न हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं?

आज हम यहाँ ज्योतिष के विषय के बारे में चर्चा कर रहें है l ज्योतिष एक प्रकार की गणित है और गणित को कभी अंध विश्वास नहीं कहा जा सकता है l यह पूरी पूरी गणनाओं पर आधारित है l ज्योतिष को वेदों का छठा अंग माना जाता है l सबसे पहले इसी विज्ञान ने ब्रह्मांड के बारे में नक्षत्रों, ग्रहों, राशियों के बारे में विस्तार से बताया। उसका गणितीय संयोजन प्रस्तुत किया, जो आज के खगोल विज्ञान का आधार बना। पृथ्वी पर होने वाली ऋतुओं, तिथि, समय, अंक, समुद्र में ज्वार-भाटे, सूर्य-चन्द्र ग्रहण या धरती पर पर होने वाले सृजन, विकार या विनाश का सटीक विश्लेषण प्रस्तुत किया।  ज्योतिष पर मुंह बनाने वाले मूढ़मति लोगों को सूर्य सिद्धांत का पढ़ लेना चाहिए, जिसमें न केवल पृथ्वी बल्कि सौरमंडल के ग्रहों का नियमन करने वाली गतियों, उनके प्रभाव आदि का विस्तार वैज्ञानिक आधार पेश किया गया है। लोग जिस न्यूटन का नाम लेते नहीं थकते उसे भास्कराचार्य ने पहले ही सिद्ध कर दिया था। ज्योतिष की सार्थकता और सटीकता पर आंखे बंद करके विरोध करना अज्ञानी या अर्द्धज्ञानी का काम है। इसके पहले आपको वेदों, पुराणों, ज्योतिषशास्त्र का समझें। ऐसे लोग प्रज्ञा अपराध के साथ गुरु अपराध के भागी भी है, जो खुद समय लेकर परेशानी आने पर ज्योतिष गुरु के यहां नतमस्तक होते है और सार्वजानिक जीवन में विरोध करके खुद शालीन और ज्ञानी बताते है। ये अपने गुरु ज्ञान का अपमान है। खास बात जो लोग ज्योतिष पर विश्वास नहीं करते उनको अधिकार भी नहीं की पंचांग की गणना के आधार पर निर्धारित किए जाने वाले होली, दीपावली, बच्चों के नाम, शादियों के मुहूर्त आदि को मानें।

      यस्य नास्ति स्वयं प्रज्ञा शास्त्रं तस्य करोति किम् ।

लोचनाभ्यां विहीनस्य दर्पणः किं करिष्यति ॥

इस श्लोक के माध्यम से ज्योतिष के बारे में बताया गया है कि जिस मनुष्य में स्वयं का विवेक, चेतना एवं बोध नहीं है, उसके लिए शास्त्र क्या कर सकता है। आंखों से हीन अर्थात् अंधे मनुष्य के लिए दर्पण क्या कर सकता है।

रत्नों में ग्रहों के बुरे प्रभाव को दूर करने की शक्ति होती हैं l रत्न आभूषणों के रूप में शरीर की शोभा तो बढ़ाते ही हैं, साथ ही अपनी दैवीय शक्ति के प्रभाव के कारण रोगों का निवारण भी करते हैं। ये ऋतुओं के परिवर्तन के कारण तथा समय-समय पर प्रकृति के भीषण उथल-पुथल से तहस-नहस होने के कारण भी प्रभावित नहीं होते। ऋषियों-महर्षियों ने भावी जीवन के संबंध में जानकारी हेतु अनेकों सिद्धांतों को प्रतिपादित किया है, जिसमें ज्योतिष शास्त्र, सामुद्रिक अतः शिशु जन्म धारण करते ही उन ग्रह-नक्षत्रों की किरणों से प्रभावित होता है।

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(Updated Date & Time :- 2019-06-26 16:01:14 )


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