Astroscience
हिन्दू धर्म के ऐसे रहस्य जिससे लोग है अंजान

हिन्दू धर्म के ऐसे रहस्य जिससे लोग है अंजान

आज भी हिन्दू धर्म में ऐसे-ऐसे प्राचीन रहस्य है जिसे हर कोई नही जानता है। हिन्दू धर्म एक ईश्वरवादी धर्म होने के साथ इस धर्म में देवता, भगवान, गुरु, पितृ, प्रकृति आदि को भी पूर्ण सम्मान दिया गया है। इस धर्म में पाप और पुण्य की भी बहुत ही विस्तार से चर्चा की गई है और इस धर्म में न्याय-अन्याय की भी परिभाषा बनाई गई है। कर्म-फल को भाग्य से भी अधिक महत्वपूर्ण बताया गया है। हिन्दू धर्म में पुनर्जन्म को लेकर भी बहुत गरही आस्था रही है तथा इस धर्म में यम-नियम के सिद्धांत भी इस धर्म के मुख्य सिद्धांतों में से एक है।

प्रार्थना, व्रत, तीर्थ, दान प्रत्येक हिन्दू का कर्तव्य है। इस धर्म के 12000 वर्ष एक प्राचीन इतिहास एक रहस्य ही है। अब इसके रहस्यों की बात की जायें तो – कल्प वृक्ष जिसका वेद और पुराणों में उल्लेख मिलता है। कल्प वृक्ष स्वर्ग का एक विशेष वृक्ष है जिसको पौराणिक धर्म ग्रंथों और हिन्दू मान्यताओं के अनुसार ये माना जाता है कि इस वृक्ष के नीचे बैठ कर  व्यक्ति जो भी इच्छा करता है वह पूर्ण हो जाती है, क्योंकि इस वृक्ष में आपार सकारात्मक ऊर्जा होती है। कुछ धर्म के जानकारों का मानना यह है कि अपरिजात के वृक्ष को भी कल्प वृक्ष माना जाता है।

हिन्दू धर्म के इन रहस्यों में से एक है उड़ने वाले सांप क्योंकि  हिन्दू धर्म में सांप ही एक ऐसा जीव है जो गाय के बाद उससे ऊंचा स्थान है। सांप एक रहस्यमयी प्राणी है। शिव जी के प्रमुख गणों में सांप भी एक उनका प्रमुख गण है। भारतीय इतिहास में नाग जाति का एक लम्बा इतिहास रहा है। इन सांपों के बारे में मान्याता है कि 100 वर्ष से ज्यादा उम्र होने के बाद सर्प में उड़ने की शाक्ति आ जाती है। इन सर्पों में भी कई प्रकार के होते है जैसे मणिधारी, इच्छाधारी, उड़ने वाले सांप तथा एक फनी से लेकर दस फनी तक के सांप जिस शेष नाग कहा जाता है। नीलमणिधारी सांप को सबसे उत्तम माना जाता है, क्योंकि अब विज्ञान भी बहुत सारे प्रयोंगो के बाद कहने लगे है कि सांप इस प्रथ्वी का सबसे रहस्यमयी जीव है।

यह भी पढ़ें - महादेव ने कैसे किया ब्रह्मा और विष्णु के अहंकार का अंत

हिन्दू धर्म के रहस्यों में से एक है मणि जो चमकता हुआ पत्थर होता है। मणि को हीरे की श्रेणी में रखा जाता है। मणि होती थी यह भी अपने आप में एक रहस्य है। जिसके भी पास मणि होती थी, वह कुछ भी कर सकता था। महाभारत के अनुसार अश्वथामा के पास मणि थी, जिसके बल पर वह बहुत ही शाक्तिशाली और अमर हो गया था। रावण ने भी कुवेर से चन्द्रकांत नाम की मणि छीन ली थी। मान्यता है कि मणिया कई प्रकार की होती थी। नीलमणि, चन्द्रकांत मणि, शेषमणि, पारस मणि, लाल मणि इत्यादि। पारस मणि से लोहे की किसी भी चीज को छू देने से वह सोने की हो जाती थी और कहते थे कि इस मणि कि पहचान कौओं को होती थी।

भारतीय रहस्यों में से चौथा रहस्य है शंख, क्योंकि इस शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुई थी। शंख को हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण दर्जा प्राप्त है। शंख बहुत से प्रकार से होते है। इन शंखों के तीन प्रमुख प्रकार है। दक्षिणावतीँ शंख, मध्यावृत्ति शंख और वामावृत्ति शंख। इन शंखों के कई उप प्रकार भी होते है। शंखों की शाक्ति का वर्णन महाभारत और पुराणों में देखने को मिलता है। लक्ष्मी शंख, गोमुखी शंख, कामधेनु शंख, विष्णु शंख, देव शंख, चक्र शंख, पौड्र शंख, सुघोष शंख, गरुण शंख, मणिपुष्प शंख, राक्षस शंख, शनि शंख, राहु शंख, केतु शंख, शेषनाग शंख, कच्छप शंख आदि प्रकार के होते है। महाभारत के सभी पात्रों के पास अलग अलग शंख थे तथा सभी शंखों के अलग-अलग महत्व और शाक्तियां थी।

अब अगला रहस्य है पुनर्जन्म का सिद्धांत सिर्फ हिन्दू धर्म से जुडा है। यहुदि और इस धर्म से निकलने वाले धर्म, इसाई और इस्लाम इस सिद्धांत को नही मानते है। लेकिन अब विज्ञान भी इस रहस्य पर सहमत होने लगा है। हिन्दू धर्म के अनुसार आत्मा अजर-अमर है  न तो यह जन्म लेती है न ही मरती है बस यही पुराने शरीर को छोड कर नये शरीर में प्रवेश कर जाती है। यह चक्र तब तक चलता रहता है जब तक मोक्ष की प्राप्ति नही हो जाती है। मोक्ष का अर्थ होता है कि खुद के मूल स्वर्प को पहचानना।

अब बात करते है भारत के जड़ी बुटी रहस्य की जो एक ऐसी जड़ी है जिसको खाने से व्यक्ति गायब रहता है यह तब तक होता है जब तक उस जड़ी का असर मनुष्य के शरीर में रहता है। यह एक ऐसी जड़ी है जिसका सेवन करने से मनुष्य को भूत, भविष्य का ज्ञान हो जाता है। आयुर्वेद और अथर्ववेद में उल्लेख है कि इस तहह की जड़ी बुटियाँ होती है। जिसके प्रयोग मात्र से स्वर्ण बनाया जा सकता है। सोने के निर्माण में तेलियाकंद जड़ी बुटी का बहुत बड़ा योगदान माना जाता है। बहुत ही ऐसी भी जड़ी बुटियां होती है जो इंसान को जवान बना देती है। औषधियों के बल पर व्यक्ति 500 वर्ष तक जीवित रह  सकता है। माना जाता है कि जड़ी बुटियों के बल पर जहां सभी तरह के दुख-दर्द दूर किये जा सकते है, वहीं इन जड़ी बुटियों से धनवान भी बना जा सकता है। जड़ी बुटियों के प्रयोग से सम्मोहन टीका भी बनाया जाता है। जड़ी बुटियों के प्रयोग से धन, कीर्ति, सम्मान, यश, संमृद्धि सब कुछ पाया जा सकता है।

ज्योतिष और वास्तु यह भी एक बहुत बड़ा रहस्य है और ज्योतिष को वेदों का नेत्र कहा गया है। ज्योतिष एक ऐसी विद्या है, जिसके माध्यम से प्राचीन कालीन ऋषि, मुनि , भूत, वर्तमान और भविष्य को जान लेते थे और साथ ही इस विद्य़ा के माध्यम से ब्रह्माण्ड की हर हरकत पर पैनी नजर भी रखते थे। ज्योतिष को अद्वैत का विज्ञान कहा गया है। पुराणों एवं अन्य ग्रंथों में ज्योतिष और वास्तु के कई चमत्कारों को उल्लेख मिलता है। आधुनिक मन इस विद्य़ा को मनाने को तैयार नही है परंतु वैज्ञानिकों के बहुत से शोध और वास्तुकार ज्योतिष की प्रसंशा करने लगे है। हालांकि इस ज्ञान पर और ज्यादा शोध किए जाने की जरुरत है।

भारत की संस्कृत भाषा भी हिन्दू धर्म के रहस्यों के दायरे में ही आती है क्योंकि संस्कृत का शाब्दिक अर्थ है परिपूर्ण भाषा क्योंकि सभी भाषायों की जननी (माता) संस्कृत को ही कहा जाता है। वैदिक काल में लोग संस्कृत बोलते थे क्योंकि संस्कृत को देवों की भाषा कहा जाता है, जिसे देवनागरी लिपि में लिखा जाता है। अब हम बात कर लेते है कि इस भाषा को देवों की भाषा क्यों कहते है? संस्कृत भाषा की व्याकरण ने विश्व भर के विद्वानों का ध्यान आकर्षित किया है। संस्कृत भाषा कि व्याकरण को ही देखकर अन्य भाषाओं की व्याकरण विकसित हुई है। आधुनिक वैज्ञानिकों के अनुसार यह भाषा कम्प्यूटर के उपयोग के लिए सर्वोत्तम भाषा मानी गई है। मात्र 3000 वर्ष पूर्व तक भारत में संस्कृत बोली जाती थी। तभी तो ईसा से 500 वर्ष पूर्व पाणिनि में दुनिया का पहला व्याकरण ग्रंथ लिखा था, जो कि संस्कृत भाषा का था। जिसका नाम अष्टाध्यायी है। यदि संस्कृत व्यापक पैमाने पर नही बोली जाती तो व्याकरण लिखने की आवश्यकता ही नही होती। संस्कृत ऐसी भाषा नही है जिसकी रचना की गई हो। इस भाषा की खोज की गई है। संस्कृत विद्वानों के अनुसार सौर्य परिवार के प्रमुख सूर्य की एक ओर से नौ रश्मियां निकलती है और यह चारों ओर से अलग-अलग निकलती है। इस प्रकार से कुल 36 रश्मियां हो गई, इन 36 रश्मियों की ध्वनि पर संस्कृत के 36 स्वर बने। जब सूर्य की 9 रश्मियां प्रथ्वी पर आती है तो उनकी प्रथ्वी के आठ वसुओं से टक्कर होती है। सूर्य की 9 रश्मियां प्रथ्वी के 8 वसुओं के आपस मे टकराने से जो 72 प्रकार की ध्वनियां उत्पन्न होती है। वह संस्कृत के 72 व्यंजन बन गए। इस प्रकार ब्रह्माण्ड में निकलने वाली 180 ध्ववियों पर संस्कृत की वर्ण माला आधारित है।

कामधेनु गाय जिसका नाम आप सभी सुनते आये है यह भी हिन्दू धर्म का एक रहस्य है। कामधेनु गाय की उतपत्ति भी संमुद्र मंथन के दौरान हुई थी। कामधेनु गाय एक चमत्कारी गाय होती थी, जिसके दर्शन मात्र से सभी तरह के दुख-दर्द दूर हो जाते थे। दैविय शाक्तियों से संपन्न यह गाय जिसके भी पास होती थी, उसे चमत्कारिक लाभ मिलता था। इस गाय का दूध अमृत के सामान माना जाता था। श्री राम के पूर्वज परशुराम के समकालीन गुरु वशिष्ठ के पास कामधेनु गाय होती थी। इस गाय की रक्षा के लिए वशिष्ठ जी को कई राजाओ से युद्ध तक करना पड़ता था। कामधेनु की औलोकिक क्षमता को देखकर विश्वामित्र के मन में भी लोभ उतपन्न हो गया था और उन्होंने ने वशिष्ठ जी से इस गाय को लेने की इच्छा तक प्रकट कर दी थी, लेकिन वशिष्ठ जी ने इंकार कर दिया था। अंत में दोनों ऋषियों में इसे लेने के लिए घोर युद्ध हुआ और विश्वामित्र को अंत में हार का सामना करना पड़ा।

ध्यान हिन्दू धर्म का एक रहस्य है और इस योग का सातवां अंग माना जाता है बिना ध्यान के योग पूर्ण नही माना जाता है। वैदिक ऋषियों के खोज आज वैज्ञानिकों के अनुसार सबसे महत्व पूर्ण खोज मानी जाती है। ध्यान के ऊपर संपूर्ण विश्व में न जाने कितने शोध हुए तब पता चला कि ध्यान हर तरह के रोग को दूर कर मस्तिष्क को शांत करने की क्षमता रखता है। यह हमारी शरीरिक और मानशिक क्षमता को भी बढ़ा देता है। स्पेन, फांस और अमेरिका के वैज्ञानिको द्वारा किये गये शोध में सामने आया कि ध्यान की मदद से इंसान के शरीर में उन जीन्स को दबाया जा सकता है, जो उत्तेजना पैदा करते है। इस शोध से पता चला कि मनुष्य अपने शरीर के जैनेटिक गतिविधियों को नियंत्रित कर सकते है। जिसमें गुस्से को काबू करना, सोच , आदतें या सेहत को सुधारना भी शामिल है। ध्यान करने से कैंसरर तथा ऐड्स  जैसे बीमारियों को भी दूर किया जा सकता है। ध्यान करते रहने से यह तेज सुक्ष्म शरीर मजबूत होता है।


यह भी पढ़ें - पुराणों के अनुसार क्या है मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का रहस्य

(Updated Date & Time :- 2020-02-29 14:03:20 )


Gd Vashisht Enquiry

Comments

speak to our expert !

Positive results come with right communication and with decades of experience. Try for yourself about our experts by calling one of them
to feel the delight about understanding your problems, and in getting the best solution and remedies.

Astroscience