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पुराणों के अनुसार क्या है मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का रहस्य

पुराणों के अनुसार क्या है मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का रहस्य

धार्मिक और पौराणिक दृष्टि से सृष्टि के आरंभ मे ब्रह्मा, विष्णु और महेश का योगदान सर्वाधिक है। समस्त सिद्धियो को देने वाले महादेव कि आराधना सिर्फ मनुष्य और देवता ही नही अपितु वानर, दैत्य, असुर, तथा किन्नर भी करते है। शिव पुराण के अंतर्गत महादेव के 12 ज्योतिर्लिंगों के महत्व को बताया गया है। जो कि भारत के अलग-अलग राज्यो मे स्थित है। इस लेख मे हम जानेंगे कि आखिर क्या है इन ज्योतिर्लिंगों के स्थापना कि कथा साथ ही क्यों है इसकी इतनी महत्ता। इस लेख के माध्यम से हमआंध्रप्रदेश मे स्थितमल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग कि कथा को विधिपूर्वक बताने का प्रयास करेंगे।

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग

शिव पुराण के कोटीरूद्र संहिता के अंतर्गत मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का उल्लेख मिलता है। यह ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश के शैलम नामक स्थान पर स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग कि स्थापना के संदर्भ मे एक कथा प्रचलित है जो कि इस प्रकार से है। कहा जाता है कि एक बार गणेश और उनके भाई कार्तिके के बीच पहले विवाह करने को लेकर कलह उत्पन्न हो गया। जिसके निवारण हेतु दोनों माता पार्वती और पिता महादेव के पास पहुंचे। तब भगवान शिव और पार्वती ने कहा कि तुम दोनों मे से जो भी इस पूरी धरती का एक चक्कर पूरा करके पहले यहाँ आएगा उसी का विवाह पहले होगा। ये कथन सुनते ही कार्तिके अपनी सवारी मोर पर विराजमान होकर पृथ्वी कि प्ररिक्रमा के लिए निकल पड़े। जबकि तीव्र बुद्धि गणेश थोड़ी देर वहीं खड़े रहे और सोचने लगे कि मेरा मूषक इतनी तेज़ गति से परिक्रमा तो नही कर सकता। तभी उनके मन मे एक विचार आया और उन्होने अपने माता-पिता को एक आसन पर विराजमान होने को कहा और उनकी कुल सात बार परिक्रमा कि जो कि पूरी पृथ्वी कि परिक्रमा करने के तुल्य थी। क्योंकि सम्पूर्ण पृथ्वी का सार तो महादेव और पार्वती अर्थात देवताओ और देवियों और उससे भी बढ़ कर अपने माता पिता मे ही निहित होता है।

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अपने पुत्र कि इस चतुर बुद्धि और मातृ-पितृ भक्ति को देख दोनों ने गणेश का विवाह पहले करवा दिया। परंतु जब कार्तिके सम्पूर्ण पृथ्वी कि परिक्रमा कर वापस आए तब यह दृश्य देख अत्यंत दुःखी हुए और अपने माता पिता का आशीर्वाद ले कर उनसे अलग होकर क्रौंच पर्वत कि ओर प्रस्थान कर गए। पुत्र मोह मे व्याकुल माँ पार्वती ने भगवान शिव से आग्रह किया और क्रौंच पर्वत कि ओर चलने का निर्णय लिया। जैसे ही कार्तिके को यह पता चला कि उनके माता पिता आए है वह वहाँ से 12 कोष अर्थात 36 किलोमीटर दूर चले गए। कार्तिके के चले जाने के बाद भगवान शिव उसी क्रौंच पर्वत पर ज्योतिर्लिंग के रूप मे प्रकट हो गए। जिसे मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के रूप मे जाना जाता है। मल्लिका माता पार्वती को कहा जाता है जबकि अर्जुन भगवान शिव का ही एक नाम है। जिसे सम्मिलित रूप मे मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग कहते है। इसकी महत्ता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यहीं एक मात्र मंदिर है जहां माता सती के शरीर के अवशेष मिले थे जिस कारण यहाँ शक्तिपीठ भी स्थापित है। 

इस लेख मे हमने मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग कि कथा का सार विधिपूर्वक बताया है। अन्य ज्योतिर्लिंगों के स्थापना संबन्धित कथाएँ आगे के लेख मे पढ़ने को मिलेगी। 


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(Updated Date & Time :- 2020-02-28 16:36:35 )


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