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कैसे हुआ माँ दुर्गा के शैलपुत्री रूप का जन्म

कैसे हुआ माँ दुर्गा के शैलपुत्री रूप का जन्म

दोस्तों जैसा की आप सभी जानते है कि भारतीय परंपरा और हिन्दू रीतिरिवाज़ों में नावतत्रो को कितना महत्व दिया जाता है। कहते है कि इन नौं दिनों में माँ दुर्गा अपने नौ रूपो का दर्शन देती हैं । तो आज इस लेख के माध्यम से हम जानेंगे कब से और क्यों की जाती है माँ दुर्गा के इन अलग अलग रूपो की आराधना। इस लेख में माँ शैलपुत्री के जन्म के संदर्भ में बात की जायेगी।  
माँ शैलपुत्री 
नवरात्री प्रारंभ के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है। 
जो की माँ दुर्गा का प्रथम स्वरुप है। क्योंकि माँ शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय के घर जन्मी थी इसलिए वो जगत में शैलपुत्री के नाम से विख्यात हुई। 
माँ शैलपुत्री पूजा की पौराणिक कथा
पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के संदर्भ में जो कथा हमें सुनने को मिलती है। उसके अनुसार प्रजापति दक्ष ने एक बार एक बहुत विशाल यज्ञ करवाने कि घोषणा की तथा सभी श्रेष्ठ जनों और ऋषि-मुनियों को उसमे अपनी-अपनी सिद्धि प्राप्त करने हेतु आमंत्रित किया । परंतु इस यज्ञ में भगवान् शिव को निमंत्रण नही भेजा गया। जब सती को इस बात का संज्ञान हुआ कि उनके पिता एक विशाल अनुष्ठान करा रहे है तो उनका मन वहां जाने के लिए व्याकुल हो उठा। और वो अपने पति भगवान् शंकर से अपने पिता के पास जाने की हट करने लगी। इस पर महादेव बोले कि प्रजापति दक्ष किसी कारणवश हमसे नाराज़ है। इसलिए उन्होंने हमें निमंत्रण नही दिया इसलिए " हे सती! कृपया आप भी वहां न जाए। "
परंतु सती के बार-बार आग्रह करने के कारण अन्ततः शिव जी ने उन्हें वहां जाने की आज्ञा दे दी। 
जब सती अपने पिता के घर पहुंची तो उन्होंने देखा की वहां किसी ने उनका आदर सत्कार नही किया। किसी ने भी उनसे सीधी मुंह बात तक नही की। राजा दक्ष ने उनसे कई अपमानजनक बाते भी कही । जिसे सती ने अपने साथ अपने पति का भी तिरस्कार समझा इस समय उन्हें अपने पति शिव जी की कही सभी बातें याद आयी और उन्होंने सोचा कि यहाँ आकर उसने बहुत बड़ी भूल कर दी है। इस अपमान से कुंठित होकर सती ने उसी समय उस योगाग्नि में अपने आप को भस्म कर दिया। जब भोलेनाथ को इन सभी बातों का संज्ञान हुआ तो क्रोध में आकर उन्होंने अपने गुणों को भेज उस यज्ञ को विध्वंश कर दिया। 
इस योगाग्नि में भस्म होते ही सती ने अगले जन्म में पर्वतराज हिमालय के घर जन्म लिया और जगत में शैलपुत्री के नाम से जानी गयी। देवी के इसी स्वरुप की आराधना नवरात्री के प्रथम दिन की जाती है। 
इस लेख के माध्यम से हमने माँ दुर्गा के प्रथम स्वरुप माँ शैलपुत्री की जन्म कथा को विधिपूर्वक बताया है । माँ दुर्गा के अन्य रूपो की कथा आगे के लेखों में पढ़ने को मिलेगी।


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(Updated Date & Time :- 2020-03-25 14:56:49 )


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