Astroscience
शनि चालीसा के पाठ से हर तरह के विघ्न व दुर्भाग्य कैसे होते है दूर

शनि चालीसा के पाठ से हर तरह के विघ्न व दुर्भाग्य कैसे होते है दूर

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनय विनय महाराज।

कृपा करहुं हे रवि तनय, राखहु जन-जन की लाज।।

 

कलयुग के इस कलकाल में दो ही देवता जाग्रत माने जाते है, शनिदेव और हनुमान जी। किसी भी व्यक्ति को राजा बनाना या किसी को भी रंक बनाना या किसी व्यक्ति को साधु बना देना , विद्वान बना देना , शैतान बना देना शनि देव का काम माना जाता है। इस पूरे बृह्मांड में शनि ही एक ऐसा ग्रह है जो कि मोक्ष प्रदान करने में पूरी तरह से समक्ष है। जब शनि देव आपको कठिनाई देते है और आपके कार्यों में समस्याएं पैदा करते है तो आपको उस समय मान लेना चाहिए कि शनि देव उस समय आपको कुछ सीखा रहें अर्थात आने वाले समय के लिए आपको और भी मजबूत कर रहे है ताकि आपका विश्वास कमजोर न होने पायें। शनि देव समस्याएं जरुर पैदा करते है परंतु भविष्य उज्जवल करते है और भविष्य में चमक पैदा करते है, परंतु जब शनिदेव समस्याएं पैदा कर रहे होते है और उस समय हमारा इम्यून सिस्टम अर्थात हमारी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है तो हमारी यह समस्याएं बढ़ती जाती है। ऐसे समय में शनि चालीसा का पाठ करने से हमारे अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता, बीमारियों से लड़ने की ताकत और जीवन में आने वाले हर विघ्न का सामना करने की क्षमता शनि चालीसा का पाठ करने से प्राप्त होती है।

शनि देव की कृपा सभी लोगों पर एक जैसी होती है परंतु जो शनि देव के उपासक है या शनिदेव के भक्त है तो ऐसा नही है कि उनके जीवन में समस्या नही आती लेकिन बहुत आसानी से उन पर विजय प्राप्त कर लेते है। आप यदि अपने कार्य क्षेत्र में तरक्की कर रहे है तो शनि देव पूरी तरह से आपके ऊपर मेहरवान है क्योंकि शनि देव को ही भाग्य के देवता कहा जाता है। शनि देव आर्शीवाद के बिना कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में सफल नही हो सकता है। ऐसे में शनि चालीसा का पाठ बहुत ही उपयोगी और लाभकारी माना गया है क्योंकि जब इंसान के जीवन का बहुत बुरा समय चल रहा हो और वह इसके निवारण के लिए लिए शनि चालीसा का पाठ करता या फिर करवाता है तो यह बुरा समय बहुत ही आसानी से दूर हो जाता है।

यह भी पढ़ें - घर का वास्तु दोष दूर करने के उपाय

शनि चालीसा विधि – शनि चालीसा का पाठ करने से पूर्व सबसे पहले मन में संकल्प करें या  फिर जिस किसी पंडित जी से आप शनि चालीसा का पाठ करवाना चाह रहें है उनको संकल्प दें। शनि चालीसा का पाठ किसी भी शनिवार से प्रारंभ कर सकते है और यह पाठ सूर्य अस्त होने के बाद ही करें। शनि चालीसा का पाठ करने से पहले एक लोहे का टुकड़ा अपने सामने जरुर रख लें।

 

नोट – शनिवार के दिन भूलकर भी मांस-मदिरा का सेवन बिल्कुल न करें और हो सके तो इस दिन घर के सदस्यों को भी ऐसा भोजन करने से रोक दें


(Updated Date & Time :- 2020-02-07 17:11:10 )


Gd Vashisht Enquiry

Comments

speak to our expert !

Positive results come with right communication and with decades of experience. Try for yourself about our experts by calling one of them
to feel the delight about understanding your problems, and in getting the best solution and remedies.

Astroscience