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षटतिला एकादशी पर किस दान से मिलेगी पापो से मुक्ति

षटतिला एकादशी पर किस दान से मिलेगी पापो से मुक्ति

हिन्दू पचांग के अनुसार हर मास मे दो एकादशी पड़ती है अर्थात पूरे वर्ष मे कुल चौबीस। इन सब मे माघ मास के कृष्ण पक्ष  मे पड़ने वाली षटतिला एकादशी का अपना विशेष महत्व है। जैसे की नाम से ही स्पष्ट है “षटतिला “ अर्थात “छ प्रकार के तिल” जो की इस प्रकार से है “तिल का स्नान ,तिल का उबटन ,तिल का हवन , तिल का तर्पण, तिल से बन हुआ भोजन और तिल का दान” आज के दिन इन सभी वस्तुओ के प्रयोग और भगवान विष्णु की आराधना करने से व्यक्ति के सभी प्रकार के पापो का विनाश हो जाता है।

क्यों हर मास मे पड़ती है एकादशी

ये स्थिति पूर्णत चन्द्रमा की गति को निर्दिष्ट करती है। चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करने मे लगभग एक मास का समय लगाता है और लगभग इतना ही समय वह अपने अक्ष पर घूमने मे भी लगाता है जिससे इसकी स्थिति पृथ्वी के सापेक्ष मास के हर दिन बदलती रहती है जिसे हम चंद्रमा की कलाओ के रूप मे जानते है इसी गति के कारण हर माह मे चंद्रमा का आकार बढ़ता हुआ तथा घटता हुआ दिखाई पड़ता है जिसे हिन्दू पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की संज्ञा दी गयी है इन सबमे से षटतिला एकादशी कीअपनी महत्ता है। क्योकि अधिकांशतः ज्योतिष और पंडितो मे यह भ्रांति फैली है की शुक्ल पक्ष मे पड़ने वाली एकादशी ही व्रत के लिए उत्तम है जो की पूर्णतः सही नही है। 

पौराणिक मान्यताओ के अनुसार क्यों करते है तिल का दान

पौराणिक मान्यताओ के अनुसार एक बार ऋषि दाल्भ्य ने ऋषि पुलस्त्य से प्रश्न किया की “हे ऋषि” इस संसार मे मनुष्य पितृहत्या जैसे जघन्य अपराधो मे लिप्त रहता है। मदिरापान कर काम वासनाओ मे व्यस्त रहता है। बुरे कर्म करता है। मांस मछली का सेवन करता है। जीव जन्तु की निर्मम हत्या करता है और नित्यप्रति आलस्य मे पड़ा रहता है फिर भी उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है आखिर वो ऐसा कौन सा व्रत, पूजा और आराधना करता है जिससे उसके सभी पाप समाप्त हो जाते है?

इस पर ऋषि ने जवाब दिया की “हे ऋषि”आपने मुझसे अत्यंत कठिन प्रश्न का उत्तर मांगा है जिसका उत्तर खुद ब्रम्हा और विष्णु भी नही दे सकते फिर भी मैं आपको बताता हूँ ।

इस संसार मे मनुष्यो ने अपने लाभ को सर्वोपरि रखा है फिर चाहे अपनी इच्छाओ की पूर्ति के लिए दूसरों की हत्या ही क्यों न करनी पड़े। ऐसे मे वह अपने जीवन भर के पापो से कलुषित हो जाता है इससे निजात पाने के लिए माघ मास की कृष्ण पक्ष मे पड़ने वाली षटतिला एकादशी के दिन स्नान करने के पश्चात छ प्रकार के तिलो के प्रयोगो सहित अन्य वस्तुओ का दानकरता है और फिर भगवान विष्णु की आराधना मात्र से उसे सभी प्रकार के पापो से मुक्ति मिल जाती है।

 

पूजन से कैसे करे तीनों लोको के स्वामी को खुश

षटतिला एकादशी के दिन प्रातः काल के स्नान के बाद भगवान विष्णु की आराधना करे। छ प्रकार के तिलो के प्रयोगो सहित अपने क्षमता के अनुसार अन्य वस्तुओ का दान करे।  भगवान विष्णु को अर्घ्य दे और श्री नारायण का जाप करे।

श्रीमन नारायण नारायण हरी हरी।।
श्रीमन नारायण नारायण हरी हरी।।

भजमन नारायण नारायण हरी हरी।।
जय जय नारायण नारायण हरी हरी।।
श्रीमान नारायण नारायण हरी हरी।।


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(Updated Date & Time :- 2020-02-10 10:41:41 )


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