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संतान प्राप्ति के अचूक उपाय

संतान प्राप्ति के अचूक उपाय

दोस्तो हर वैवाहिक दम्पत्ति का यह सपना होता है उसकी गोद मे भी नन्हे बाल गोपाल खेले। एक स्त्री सम्पूर्ण तभी मानी जाती है जब की उसकी गोद भरी हुई हो। और जहां तक हिन्दू धर्म की बात करें तो यहां बच्चे को साक्षात ईश्वर का स्वरूप  माना जाता है। इसलिए कई बार ये जरूरी हो जाता है कि बच्चे समय से हो और उनकी सेहत भी अच्छे हो। आज की भाग दौड़ भारी ज़िन्दगी में किसी के भी पास इतना समय नही है कि वो अपने बारे में या अपने परिवार के बारे में ठीक से सोच सके। कॅरिअर और नौकरी के चलते कई बार इन सभी कामो में काफी देरी हो जाती है। जो सन्तोंत्पत्ति में बाधक साबित होती है। क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ साथ पुरषो में वीर्य और स्त्रियों में अंड जनन की क्षमता क्षीण होती जाती है।  
हिन्दू समाज मे ऐसा माना जाता है कि संतान सुख ही  दुनिया का सबसे बड़ा सुख होता है। जिन्हें ये सुख यानि पुत्री या पुत्र रत्न की प्राप्ति आसानी से हो जाती है वो दुनिया के सबसे खुशनसीब लोगों में से होते हैं, लेकिन जिनको इस सुख की प्राप्ति किसी कारण वश नहीं हो पाती है वो दिल में इस कमी का दुख लिए रहते हैं और बस पुत्री-पुत्र प्राप्ति के लिए कई तरीकों व उपायों को अपनाते हैं। हम आपको यहां बताने जा रहे हैं संतान प्राप्ति के अचूक उपाय जिन्हें अपनाकर आपकी सूनी झोली भर जाएगी और आपको संतान सुख प्राप्ति होगा।
संतान सुख से वंचित क्यों- ज्योतिष शास्त्र की नज़र से
कुडंली का पांचवा घर  संतान व उससे संबंधित कारक तत्वों को दर्शाता है।पांचवा घर  व पंचमेश यानि पंचम भाव के स्वामी आपके जीवन में संतान से संबंधित कर्मों को दर्शाते हैं। इसके साथ ही बृहस्पति को संतान प्राप्ति का मुख्य कारक बताया जाता  है। इसके अलावा संतान प्राप्ति के लिए लग्न कुंडली में नौवें घर के स्वामी की स्थिति का भी विश्लेषण किया जाता है। नवमांश कुंडली के पंचमेश व पंचम भाव, लग्न का स्वामी व सप्तांश कुंडली के पंचमेश, संतान संबंधी जानकारी को इंगित करते हैं। यदि पंचमेश, पंचम भाव व गुरु बुरे ग्रहों के दोष से प्रभावित हो जाएं तो संतान सुख में देरी हो सकती है। जैसे शनि के बुरे प्रभाव से संतान प्राप्ति में देरी या जातक संतान सुख से वंचित ही राह जाता है। मंगल व केतु के दुष्प्रभाव से शारीरिक कष्ट हो सकता है। तो वहीं राहु व केतु संतान से संबंधित नकारात्मक कार्यो का संकेत देते हैं। राहु सर्प दोष व प्रजनन क्षमता से संबंधित हानि को प्रदर्शित करता है। राहु गुरु या नवमेश को प्रभावित करके पितृ दोष उत्पन्न करता है जिसके चलते भी संतान सुख प्राप्त करने में कष्ट हो सकता है। वैसे संतान की प्राप्ति में षष्ठेश, अष्टमेश व द्वादेश भी बाधा उत्पन्न कर सकते हैं। ऐसे में यदि गुरु यानि बृहस्पति नीच का हो या बलहीन हो तो संतान का सुख मिलना लगभग असंभव हो जाता है। क्योंकि पंचम भाव संचित कर्मों को भी दर्शाता है, ऐसे में इस भाव को देख कर भी संतान से संबंधित खुशहाल या कष्टकारी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
खैर ये तो हुई कुंडली मे उपस्थित दोषो की बात तो आइए जानते है इन दोषों को दूर करने के उपाय के बारे में।
संतान प्राप्ति के उपाय
ऐसे लोग जिनके कुंडली में मंगल और केतु का मेल यदि अशुभ भाव में बैठा हो तो सात प्रकार के फल जिसमे से एक को ज्वार के साथ तथा अन्य सभी को सात तरह के पानी (जैसे गंगा जल,घर का पानी,तालाब का पानी, दूध इत्यादि) से धोकर जमीन के नीचे दबा दे। दोष से मुक्ति मिलेगी।
पंचमेश के प्रभाव को बढ़ाएं यदि लग्न कुंडली में पंचमेश पीड़ित हैं तो उनकी आराधना करें, ऐसा करने से इसका दुष्प्रभाव कम होगा और सकारात्मक प्रभाव बढ़ेगा।
गुरु को करें प्रसन्न बृहस्पति की आराधना करना संतान प्राप्ति का सरल उपाय है। क्योंकि गुरु के बलहीन होने से भी कई बार संतान का सुख प्राप्त नहीं हो पाता है। ऐसे में संतान प्राप्ति का मुख्य कारक गुरु यानि बृहस्पति ग्रह के प्रभाव को मज़बूत करने व बढ़ाने के लिए उसका पूजन करें। वैसे गुरुवार के दिन गुड़ दान करने से भी संतान सुख प्राप्त होता है। इसके साथ ही गुरुवार के दिन गरीबों में गुड़ बाँटें। गुरु ग्रह को शक्तिशाली बनाने के लिए इन दो मंत्रों का जाप करें।
इसी प्रकार की अनेक समस्याओं तथा उनके समाधान के लिए गुरुदेव जी. डी. वशिष्ठ द्वारा लिखित "लाल किताब अमृत" में वर्णित मूल उपायों को अपनाकर विभिन्न दोषों से निजात पाया जा सकता है।


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(Updated Date & Time :- 2020-04-11 11:27:49 )


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