Astroscience
स्वामी विवेकानंद जी की जन्म जयंती में पर एक झलक उनके संपूर्ण जीवन पर

स्वामी विवेकानंद जी की जन्म जयंती में पर एक झलक उनके संपूर्ण जीवन पर

स्वामी विवेकानंद  जी ने भारत के आध्यात्मिक उत्थान के लिए अपने जीवन में बहुत सारे महत्वपूर्ण कार्य किए। 19 वीं शदी में भारतीय विद्वान राम कृष्ण परम हंस के परम शिष्य एवं भारतीय संस्कृति, साहित्य को विदेशो तक फैलाने के वाले महापुरुष स्वामी विवेकानंद ने संपूर्ण विश्व में हिन्दू धर्म के महत्व को बताया। स्वामी जी ने गरीबो की सेवा के लिए रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। उन्होंने देश के युवाओं में प्रगति करने के लिए नया जोश और उत्साह भर दिया। इसलिए उनके जन्म दिन को राष्ट्र युवा दिवस के रुप में मनाया जाता है।

स्वामी विवेका नंद जी का जन्म 12 जनवरी सन् 1963 को  कोलकाता शहर में हुआ था। स्वामी जी के सन्यास लेने से पूर्व इनका नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। इनके पिता का नाम विश्वनाथदत्त तथा माता का नाम भुनेश्वरी देवी था। स्वामी जी ने बहुत ही कम उम्र में अपना परिवार छोड़ने का निर्णय ले लिया था, उस समय स्वामी जी कि उम्र 25 वर्ष थी। स्वामी जी के विचारों और उनकी सोच ने उन्हें विश्व प्रसिद्ध गुरु बना दिया था और आज भी उनके विचार जिन्दा है, जिनको अपना कर हर कोई महान बनने वाले रास्ते में चल सकता है और महान बन सकता है। उनके इन्हीं विचारों ने अमेरिका जैसे महान देश ने स्वामी जी की बुद्धि का लोहा माना था। सन् 1883 में हुए अमेरिका के शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी ने जी अपने विचारों को भाषण के माध्यम से प्रस्तुत किया और इसी भाषण ने इनको विश्व प्रसिद्धि दिलाई। स्वामी जी के उस भाषण की प्रथम लाइन हर किसी के जुबान में आज भी बरबस आ जाती है "मेरे अमरीकी भाइयो एवं बहनो" इस पंक्ति से स्वामी जी ने पूरे अमेरिका के लोगो का दिल जीत लिया था।

 

स्वामी जी के जीवन में घटी एक सत्य घटना –

यह घटना उस समय कि है जब स्वामी जी अपने आश्रम में विश्राम कर रहे थे और तभी एक  दुःखी व्यक्ति उनके पैरो में गिरकर बोला कि स्वामी जी मै दिन रात मेहनत करता हूँ और पूरे मन के साथ करता हूँ परंतु मै आज तक सफल क्यों नही हो पाया आखिर मुझे सफलता क्यों नही मिली इस तरह का प्रश्न स्वामी जी के समक्ष रखा।

उस व्यक्ति की यह सब बाते स्वामी जी बड़े ही ध्यान से सुन रहे थे और बात पुरी होने के बाद बोले कि ठीक है तुम मेरे इस पालतु कुत्ते को कुछ देर टहलाकर लाओं फिर मैं तुम्हे तुम्हारी परेशानी का हल बताता हूँ। इतना सुनकर वह दुःखी व्यक्ति कुत्ते को घुमाने के लिए चल पड़ा। कुछ समय बितने के बाद पुनः वह व्यक्ति स्वामी के पास आ गया। तब स्वामी जी से उस व्यक्ति से एक प्रश्न पूछा कि यह कुत्ता इतना ज्यादा हाँफ क्यों रहा है और तुम तो बिल्कुल भी थके नही लग रहे हो, आखिर ऐसा क्या घटित हुआ कि दोनो कि परिस्थितियां बिल्कुल अलग है।

तब उस व्यक्ति ने जवाब दिया कि मै सीधा रास्ते पर चल रहा था और यह आपका कुत्ता पूरे रास्ते भर इधर-उधर भाग दौड़ कर रहा है, जिसके कारण यह थक गया है और हाँफ रहा है।

उस व्यक्ति के इस उत्तर के बाद स्वामी जी ने मुस्कुराकर कहां कि यही तुम्हारी समस्या का मूल कारण है, कि तुम्हारी मंजिल ठीक तुम्हारे सामने है और तुम अपनी मंजिल जाने के बजाय इधर-उधर भकट रहें हो, इसलिए आज तक तुम अपने जीवन में कभी सफल नही हो पायें। स्वामी जी की इतनी सी बात सुनकर व्यक्ति के मन में समझ आ गया कि यदि हमें सफलता प्राप्त करना हो तो हमें हमेशा अपने लक्ष्य पर ध्यान देना होगा तभी हमें सफलता का सही मजा मिल पायेगा अन्यथा नही।

स्वामी जी की इन्हीं घटनाओं ने अनेकों लोगों के जीवन में सफलता का मार्ग दिखाया था, स्वामी जी ने शास्त्रो, वेदों एवं पुराणों के अध्ययन के बाद अपने जीवन के अंतिम समय में एक वाक्य कहा था कि "एक और विवेकानन्द चाहिये, यह समझने के लिये कि इस विवेकानन्द ने अब तक क्या किया है।" स्वामी जी के शिष्यों के बतायें अनुसार 4 जुलाई सन् 1902 को स्वामी जी महासमाधि लेकर पंच तत्व में लीन हो गए।


यह भी पढ़ें - लोहड़ी पर्व न सिर्फ रिश्तों की मधुरता है, बल्कि सुकून और प्रेम का भी प्रतीक है

(Updated Date & Time :- 2020-02-10 10:44:12 )


Gd Vashisht Enquiry

Comments

speak to our expert !

Positive results come with right communication and with decades of experience. Try for yourself about our experts by calling one of them
to feel the delight about understanding your problems, and in getting the best solution and remedies.

Astroscience