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स्वामी विवेकानन्द जी की जयंती पर जाने, भारत के महान दार्शनिक के जीवन से जुड़ी ये बाते

स्वामी विवेकानन्द जी की जयंती पर जाने, भारत के महान दार्शनिक के जीवन से जुड़ी ये बाते

स्वामी विवेकानंदजी वर्तमान समाज के एक विराट चिंतक, महान देशभक्त, दार्शनिक, युवा संन्यासी, युवाओं के प्रेरणास्रोत और एक आदर्श व्यक्तित्व के धनी थे। भारतीय नवजागरण का अग्रदूत यदि स्वामी विवेकानंद को कहा जाए तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। 'विवेकानंद' दो शब्दों द्वारा बना है। विवेक+आनंद। 'विवेक' संस्कृत मूल का शब्द है। 'विवेक' का अर्थ होता है बुद्धि और 'आनंद' का शाब्दिक अर्थ होता है- खुशियां। स्वामी विवेकानंदजी का जन्म दिन अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 12 जनवरी को मनाया जाता है। विवेकानंदजी के सम्मान में इस तिथि को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। लेकिन इनके जन्मतिथि को लेकर काफी भ्रम है। कोलकाता के वेलुर मठ में तिथि के हिसाब से विवेकानंदजी का जन्मदिवस इस साल 27 जनवरी को को मनाया जाएगा l

वैदिक पंचांग के अनुसार, स्वामी जी का जन्म पौष पूर्णिमा के सातवें दिन कृष्ण पक्ष में हुआ था। इसलिए कुछ जगहों पर इनका जन्मदिन हर साल इस तिथि के अनुसार भी मनाया जाता है। वैदिक तिथि के अनुसार वर्ष 2019 में स्वामी जी की जयंती 27 जनवरी को मनाई जाएगी जो की पौष पूर्णिमा के सात दिन बाद आती है l विवेकानंदजी महज 39 साल की उम्र में दुनिया से विदा हो गए थे। लेकिन इतने कम समय में ही इन्होंने विश्व को भारतीय दर्शन और वेद का ऐसा पाठ पढ़ाया कि दुनिया इनके सामने नतमष्तक हो गई।

सम्पूर्ण विश्व एक व्यायाम शाला है,

जहां हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते है..

1893 ई l में अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म संसद का आयोजन किया गया था। इसमें दुनिया भर से अलग-अलग धर्मों के विद्वानों के सामने इन्होंने वेदांत का ऐसा ज्ञान दिया कि पूरा संसद तालियों से गूंज उठा और भारतवासियों का मष्तक गर्व से ऊंचा उठ गया।धर्म संसद में आख्यान के बाद इन्हें अमेरिका के विभिन्न शहरों में धर्म सभाओं में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया। करीब 4 साल तक अमेरिका के विभिन्न शहरों में भ्रमण के बाद कोलंबो होते हुए 1897 में विवेकानंदजी स्वदेश लौटे। लेकिन लौटने से पहले अमेरिका में इन्होंने जो पाठ पढ़ाया, उसे हर व्यक्ति को समझना चाहिए।

इन्होंने अमेरिका में पुल से नदी में तैरते अंडे के छिलके पर बंदूक से निशाना लगाते हुए लड़कों को देखा, जिनका निशान बार-बार चूक जा रहा था। विवेकानंदजी ने बंदूक लेकर एक के बाद एक कई निशाने छिलके पर लगाए। लड़कों ने हैरान होकर विवेकानंद जी से पूछा कि यह कैसे कर लेते हैं आप। विवेकानंदजी ने बताया कि तुम जो भी कर रहे हो अपना पूरा दिमाग उसी एक काम पर लगाओ l अगर तुम निशाना लगा रहे हो तो पूरा ध्यान सिर्फ अपने लक्ष्य पर रखो, तुम कभी नहीं चूकोगे।

हमारे देश में बच्चों को यही सिखाया जाता है। स्वामी जी ने अपने देश के मूल सिद्धांतो का भारत ही नहीं बल्कि समूचे विश्व मे पाठ पठाया l उन्होंने कभी भी किसी चीज का लोभ अपने मन में नहीं रखा, ना ही उन्होंने निजी मुक्ति को जीवन का लक्ष्य बनाया था। उनका एकमात्र लक्ष्य करोड़ों भारतीयों का जीवन का उत्थान था। युवा सन्यासी स्वामी विवेकानंद आज भी करोड़ों युवाओं के प्रेरणास्रोत हैं। स्वामी जी ने मनुष्य के दिल और दिमाग में के बारे में दोनों की अलग-अलग व्याख्या की है कि जहां पर दिमाग काम करना बंद कर दें वहाँ पर आपको अपने दिल की सुनना चाहिए की आपका दिल क्या कहता है l

दिल और दिमाग के टकराव में हमेशा दिल की सुनो..


(Updated Date & Time :- 2020-02-12 14:31:58 )


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