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गुड फ्राइडे- प्रभु यीशु ने अपनी मौत के दिन को क्यों कहा शुभ शुक्रवार

गुड फ्राइडे- प्रभु यीशु ने अपनी मौत के दिन को क्यों कहा शुभ शुक्रवार

“प्रभु यीशु ने अपने मौत के दिन को मानवता की भूल समझ कर यह संदेश दिया था की वास्तव मे यह दिन “शुभ शुक्रवार’ है।“
ईसाई धर्म के अनुसार आज के दिन (अर्थात इस वर्ष 10 अप्रैल 2020) को ब्लाक फ्राइडे या होलो फ्राइडे के रूप मे भी जानते है। आज के दिन पृथ्वी पर मानवता का पाठ पढाने वाले प्रभु की इकलौती संतान यीशु को शूली पर चढ़ाया गया था। ईसाइयों के पवित्र ग्रंथ बाइबिल मे प्रभु यीशु के सभी उपदेश को भली पूर्वक वचनबद्ध करके सहेजा गया है। आज के दिन को त्याग, पवित्रता और बलिदान का प्रतीक भी माना जाता है।

गुड फ्राइडे मनाए जाने का कारण  

इसाइयों के पवित्र ग्रंथ बाइबिल के अनुसार आज के दिन ही सदियों पहले प्रभु यीशु को कुछ तात्कालिक धार्मिक कट्टरपंथियों और शासको ने शूली पर चढ़ा दिया था। कहा जाता है की जब विधाता ने सृष्टि का सृजन किया तो उनकी प्रथम संतान के रूप मे एडम और ईव ने जन्म लिया। जो भी संतान इस दंपत्ति से जन्मी वो पाप की भागीदार बनी अर्थात उसे शैतान का जीवन मिला। सृष्टि मे हर जगह बस पाप ही पाप, मानवता की हत्या और सर्वनाश हो रहा था। प्रभु ऐसा दृश्य देख कर विचलित हुए और उन्होने अपनी इकलौती संतान प्रभु यीशु को पृथ्वी पर पाप के सर्वनाश के लिए भेजा। इंसान रूप मे जन्मे यीशु ने सभी मनुष्यों को मानवता का पाठ पढ़ाया, प्यार और भाईचारे का संदेश जन जन तक पहुंचाने का कार्य किया परंतु तात्कालिक धर्म के पाखंडियों और कट्टरपंथियों को यीशु की ये शिक्षा रास नही और उन्होने प्रभु यीशु को शूली पर चढ़ा दिया । शूली पर चढ़ने से पूर्व उन्हे बहुत सी शारीरिक यतनाएं दी गयी जिसे प्रभु ने बिन कुछ कहे सह लिया और अपने अंतिम वाक्य के रूप मे उन्होने कहा........

“गुड फ्राइडे ..........................हे ईश्वर! इन मनुष्यों को माफ करना क्योंकि इन्हे नही पता की ये क्या कर रहे है”

कैसे मानते है गुड फ्राइडे
इसाइयों के अनुसार गुड फ्राइडे का अत्यंत धार्मिक महत्व है। आज के दिन को त्याग और मानवता की नींव रखने वाले परम प्रभु यीशु को पूर्ण रूप से समर्पित किया जाता है। ईसाई धर्म के अनुयाई आज के दिन बड़ी संख्या मे चर्च मे उपस्थित होकर प्रभु यीशु की प्रार्थना करते है मोमबत्तियाँ जलाते है। और समाज मे मानवता के प्रति दया भाव रखने की प्रार्थना करते है। इसके साथ ही प्रकृति को नियमित रूप से चलाने और सभी प्रकार से खुद की रक्षा के लिए प्रभु से विनती करते है। जिससे समस्त प्राणी जीवन सुचारु रूप से चलता रहे।


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(Updated Date & Time :- 2020-04-10 11:51:39 )


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