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क्यों इंद्रजीत के नागपाश को प्रभु श्री राम भी न भांप पाएं?

क्यों इंद्रजीत के नागपाश को प्रभु श्री राम भी न भांप पाएं?

गोस्वामी जी हनुमााष्टक में कहते हैं

रावन जुद्ध अजान कियो तब नाग की पास सबे सिर डारो
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल मोह भयो यह संकट भारो
आनी खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटी सु त्रास निवारो
को नहीं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो

रामायण के एक प्रसंग के अनुसार जब लंकापति रावण के अनेकोनेक योद्धा, प्रभु श्री राम और लक्ष्मण से परास्त होकर युद्ध भूमि में अपने प्राण त्याग रहे थे। तब लंका के युवराज इंद्रजीत ने रण में जाने का निश्चय किया था । 
इंद्रजीत अत्यन्त मायावी और प्रतापी था। तुलसीदास जी ने ही एक प्रसंग में ये कहा है कि जब इंद्रजीत का जन्म हुआ था तो उसके रोने की आवाज में मेघो के समान गर्जना हुई जिस कारण उसका नाम मेघनाद पड़ा और साथ ही देवताओं समेत इंद्र को परास्त करने के कारण जगत में इंद्रजीत के नाम से प्रख्यात हुआ। 
युवराज इंद्रजीत ने घोर तपस्या और यज्ञ के द्वारा त्रिदेवों को खुश कर उनसे न जाने कितने ही अस्त्र शास्त्र की प्राप्ति की थी। इसी में से एक शस्त्र था नागपाश जिसे स्वयं प्रभु श्री राम भी न भांप पाये थे और इसमें बंध कर मूर्छित अवस्था को प्राप्त हुए।

तो आज के इस लेख में हम इसी नागपाश की बात करेंगे।

रामायण के गहन अध्ययन से हमें ये बात पता चलती है कि इंद्रजीत की पत्नी सुलोचना सर्पो के राजा वासुकी की पुत्री थी। इसीकारण इन्द्रजीत की पुहँच दुनिया के महाभयानक सर्पो तक थी। 
इन्ही विशिष्ट महाभयानक सांपो के विष से उसने नागपाश का निर्माण किया था। नागपाश का उपयोग इन्द्रजीत के सिवा कभी किसी ने नहीं किया, और शायद इन्द्रजीत की मृत्यु के साथ इस अस्र की जानकारी अतीत के गर्त में चली गयी।
लंका की ओर से अगर किसी एक का नाम सर्वश्रेष्ट योद्धा कहकर लिया जा सकता था, तो वो था इन्द्रजीत. इन्द्रजीत को ब्रम्हदंड, पाशुपतास्त्र के साथ सेकड़ो दैवी अस्त्रो की जानकारी थी। युद्धभूमि में वो अपने पिता रावण से कई गुना ज्यादा खतरनाक था।
जब इन्द्रजीत युद्धभूमि पर आता हे तो वो हजारो वानरों का संहार करने लगता हे, तब प्रभु राम और लक्ष्मण उसके सामने युद्ध करने हेतु उतर जाते हैं। 
दोनों ओर से घमासान युद्ध शुरू होता है। इन्द्रजीत के हर बाण का जवाब प्रभु राम और लक्ष्मण के पास होता हे तो प्रभु राम और लक्ष्मण के हर बाण का तोड़ इन्द्रजीत के पास होता है। शायद इन्द्रजीत उस दिन अपने पराक्रम के चरम पर होता है दोनों महाप्रतापी योद्धा प्रभु राम और लक्ष्मण मिलकर भी उसके हरा नहीं पा रहे होते हैं।
हर अस्र का जवाब किसी दुसरे अस्र से दिया जा रहा था कोई भी हारने को या पीछे हटने को तैयार नही था। 
तब उस हालत में इन्द्रजीत नागपाश का उपयोग करता है। 
ऊपर से साधारण दिखने वाले इस बाण को प्रभु राम भांप नहीं पाते और मेघनाद का ये अस्त्र प्रभु राम और लक्ष्मण को जकड़ लेता है। 

जब कोई भी इस अस्र का तोड़ नहीं निकाल पाता तब भगवान् श्रीराम की मुक्ति के लिए खुद भगवान् गरुड़ को लाने के लिए हनुमान जी जाते हैं।.


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(Updated Date & Time :- 2020-04-17 16:21:14 )


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