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मुम्बई का सिद्धिविनायक मंदिर क्यों है इतना प्रसिद्द

मुम्बई का सिद्धिविनायक मंदिर क्यों है इतना प्रसिद्द

देशभर में गणपति पूजन एवं गणपति मंदिर की खासी विशेषता रही है। प्रथम पूज्य भगवान् गणेश जी के पूरे भारत भर में अनेको मंदिर है। जहाँ पर भक्तो का ताँता लगा रहता है। परंतु इन सभी मंदिरों में से मुंबई में स्थित सिद्धिविनायक मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध है। गणपति उत्सव के समय पर तो यहाँ भक्तो की भीड़ देखने लायक होती है।  लेकिन इसके साथ ही आम दिनों पर भी इस मंदिर में भक्तों का ताँता लगा रहता है। इस मंदिर को लेकर लोगों में ख़ास आस्था और विश्वास है। बता दें कि यहाँ देश विदेश के लोग गणेश जी के दर्शन के लिए आते हैं। आज हम आपको मुंबई के प्रभादेवी क्षेत्र में स्थित गणेश जी के सिद्धिविनायक मंदिर की महिमा के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।
क्यों कहा जाता है सिद्धिविनायक
सिद्धिविनायक मंदिर  में भगवान गणेश की अनुपम प्रतिमा है। इस प्रतिमा में भगवान् गणेश की सूंड दाएं साइड को मुड़ी हुई है जिसे धर्मावलंबियों ने सिद्धिपीठ की संज्ञा दी है। और इसी कारण से इस मंदिर का नाम सिद्धिविनायक पड़ा । कहा जाता है कि यहाँ सच्चे मन से मांगी गयी सभी मुराद पूरी हो जाती है।
सबसे अमीर मंदिरों में से एक
इस मंदिर को देश के सबसे अमीर मंदिरों की श्रेणी में रखा जाता है। इस मंदिर के वार्षिक आय की बात करें तो वो करीबन 45 करोड़ रूपये है, ये राशि यहाँ आने वाले भक्तों द्वारा चढ़ावे के रूप में मंदिर ट्रस्ट को मिलता है। एक कुल राशि की बात करें तो इस मंदिर के नाम करीबन 126 करोड़ रूपये का फिक्स्ड डिपोसिट जमा है।
चूहे पहुंचातें है सन्देश
सिद्धिविनायक को मराठी भाषा के लोग नवसाचा गणपति और नवसाला गणपति नाम से भी बुलाते हैं। इसका अर्थ है कि जब भी कोई सच्चे मन से बप्पा की पूजा अर्चना करता है तो बप्पा उसकी मांगी हर मुराद को पूरा करते हैं।मंदिर से जुड़ी एक दिलचस्प बात यह भी है कि बप्पा की सवारी माने जाने वाले मूषकों की भी यहां दो बड़ी मूर्तियां हैं।मान्यता है कि जो भी भक्त मूषकों के कानों में अपनी मनोकामनाएं बताते हैं तो वो आपका संदेश बप्पा तक पहुंचाते है।इस धार्मिक काम को करते हुए आपको बहुत से भक्त यहां दिखेंगे।
सिद्धिविनायक मंदिर की महिमा इसलिए भी अपरंपार मानी जाती है क्योंकि यहाँ आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं बप्पा जल्द पूरी कर देते हैं। गणेश जी के इस रूप के बारे में ये भी कहा जाता है कि वो जितनी जल्दी भक्तों से प्रसन्न होते हैं, उतनी ही जल्दी उनसे नाराज भी हो जाते हैं। इस मंदिर में स्थापित गणेश जी का चतुर्भुजी रूप एक चतुर्भुजी विग्रह भी है। हालाँकि सिद्धिविनायक मंदिर की गिनती अष्टविनायकों में नहीं की जाती है लेकिन इसके वाबजूद भी भक्त यहाँ गणेश जी के विशेष दर्शन के लिए जरूर आते हैं।


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(Updated Date & Time :- 2020-04-13 15:56:53 )


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