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मृत्यु के बाद गरुण पुराण का पाठ ही क्यों किया जाता है

मृत्यु के बाद गरुण पुराण का पाठ ही क्यों किया जाता है

आप अगर गरुण पुराण की रचना को देखते है तो गरुण पुराण आपको साफ तौर पर दो भागों में बंटी हुई दिखाई देती है। इसके एक भाग में विष्णु के रुपों के बारें में विस्तृत वर्णन किया गया है तो वहीं दूसरे भाग में मृत्यु के बाद आत्मा के साथ क्या होता है? इसका जिक्र किया गया है। गरुण पुराण में मृत्यु के बाद होने वाली क्रियाओं तथा श्राद्ध आदि के महत्व और उन्हे सही तरीके से करने के बारे में बताया गया है। किसी की मृत्यु होने पर शोकाकुल परिजनों के मन में जीवन और मरण को लेकर अलग-अलग आशांकाएं और प्रश्नों का जन्म होने लगता है। जिनके जवाब केवल और केवल गरुण पुराण में ही मिलते है। इसलिए किसी की मृत्यु के बाद गरुण पुराण का पाठ करवाया जाता है। इतना ही नही शांकाओं और प्रश्नों का समाधान होने पर परिवार जन सभी क्रियाओं से संतुष्ट होकर जीवन में आगे बढने की प्रेरणा पाते है। लेकिन इसका अर्थ यह बिल्कुल भी नही की इस पुराण का पाठ किसी की मृत्यु के बाद ही किया जाना चाहिए, इसके अलावा कभी नही। "कहते है न कि अगर एक झुठी या गलत बात को बार-बार बोला जाये तो वही सही और सच लगने लगता है।" गरुण पुराण के साथ भी कुछ ऐसा भी हुआ है। अब आप गरुण पुराण के बारे में इतना कुछ जान ही गए है कि गरुण पुराण को किसी जीवित के रखने या सुनने से उसके जीवन में किसी प्रकार की अशुभ घटना घटने की संभावना है ही नही। बल्कि गरुण पुराण के रखने पढने या सुनने से किसी भी जीवित व्यक्ति को शुभ फल की प्राप्ति ही होती है और उसके लिए स्वर्ग और मोक्ष के द्वार हमेशा के लिए खुल जाते है।


(Updated Date & Time :- 2020-04-04 15:02:26 )


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