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यशोदा जयंती पर कैसे होंगे भगवान श्रीकृष्ण के लड्डू गोपाल रूप के दर्शन

यशोदा जयंती पर कैसे होंगे भगवान श्रीकृष्ण के लड्डू गोपाल रूप के दर्शन

यशोदा जयंती – 14 फरवरी 2020 (शुक्रवार )

षष्ठी तिथि का प्रारम्भ – 13 फरवरी बृहस्पतिवार (रात्री 8 बज के 45 मिनट से )

षष्ठी तिथि की समाप्ती – 14 फरवरी शुक्रवार (संध्या 6 बज के 20 मिनट तक )

वैसे तो भगवान श्री कृष्ण ने देवकी की कोख से जन्म लिया था। परंतु मातृत्व सुख तो यशोदा को ही प्राप्त हुआ। कहते है की एक बार कृष्ण ने अपनी माँ यशोदा से कहा था की जो भी फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी के दिन पूरी भक्ति भाव से आपकी आराधना करेगा मैं स्वयं उसको दर्शन दूंगा। इसलिए हर वर्ष फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को माँ यशोदा की जयंती के रूप मे मनाते है। कहते है की जो भी स्त्री संतान सुख से वंचित है उसे आज के दिन पूरे मग्न होकर माँ यशोदा और बाल कृष्ण की भक्ति साधना करने से पुत्र की प्राप्ति होती है अर्थात उसके जीवन मे जल्दी ही संतान सुख के योग बनते है।

इस वर्ष यशोदा जयंती 14 फरवरी शुक्रवार के दिन पड़ रही है।

क्या है मान्यता

कहा जाता है की एक बार यशोदा जी ने भगवान विष्णु की घोर तपस्या की। इस तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान नारायण ने यशोदा को दर्शन दिया और वर मांगने को कहा। यशोदा जी ने वर मांगा की भगवान विष्णु स्वयं उनके पुत्र के रूप मे जन्म ले । नारायण ने तथास्तु कहा और मातृसुख भोगने की इच्छा जताई। भगवान ने भले ही जन्म देवकी की कोख से लिया परंतु मातृसुख तो यशोदा जी को ही प्राप्त हुआ।

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क्या है पूजा की विधि

यशोदा जयंती के दिन जो कोई भी स्त्री संतान सुख की कामना करती है वह प्रातः काल शुभ बेला मे स्नान कर साफ सुथरा आशन ग्रहण करे। इसके बाद यशोदा के गोद मे खेलते हुए बाल कृष्ण की मूरत की आराधना सच्चे मन से करे। पूजा के बाद माँ को चुनरी तथा लड्डू गोपाल को मोर पंख अर्पित करे। लड्डू गोपाल को माखन का भोग लगाए। साफ मन से की गयी आराधना से सभी मनोकामनए होंगी पूरी।


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(Updated Date & Time :- 2020-02-07 17:10:15 )


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